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घर वापसी

Posted On: 14 Jul, 2012 Others में

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क्या अपने ही घर जाने के लिये भी मुझे सोचना पड़ेगा? पिछले कई महीनों से मैं इसी कशमकश में थी। कई बार हिम्मत करके अपने इस मकान से निकल कर अपने घर की गली में कदम भी रखा, पर ना जाने क्यूँ गली में कदम रखते ही हिम्मत जवाब दे देती। मन में तरह-तरह के सवाल उमड़ आते, कोई देख लेगा तो क्या कहेगा? इतने दिनों बाद मैं सब का सामना कैसे कर पाऊंगी? अगर मुझे दरवाजे से ही भगा दिया तो? अगर घर में इस समय माँ-पिताजी, भाई-बहन ना हो तो? अगर दरवाजा भाभी खोले तो, वो तो मुझे पहचानती भी नहीं हैं। इसी तरह के अजीबो-गरीब सवालों से घिरी मैं कब वापसी का रुख कर लेती मुझे ही पता नही होता था।


और अपने मकान में आकर मैं रात-रात भर सिसका करती थी। अपनों से दूर होने का गम क्या होता है ये मुझसे अच्छा कोई नहीं जान सकता हैं। कई बार रोते-रोते सोचती तो लगता गलती भी तो मेरी ही थी, इस तरह बिना बताये कोई अपना घर छोडता है भला। ठीक है काम बहुत जरुरी था और समय भी नहीं मिला कि किसी से कुछ कह पाते, पर भला कोई इस तरह बिना बताये जाता है।


अभी भी वो दो साल आँखों के सामने एक फिल्म की तरह चलने लगते हैं। उन दो सालों में शुरु के कई महिने तो काम में इस तरह व्यस्त रहे कि ना दिन का पता होता था ना रात का। यहाँ तक कि खाने पीने का भी होश नहीं रहता था। घर से 2-4 चिट्टियाँ भी पुराने पते पर आई, पर इतना समय ही नही निकाल पाये कि कुछ जवाब दे सकें। और इसी तरह डेढ़ साल कब पूरा हुआ पता ही नहीं चला। जब काम पूरा हुआ और हमारे पास खाली समय रहने लगा तो कई बार सोचा कि जवाब लिख दें, पर लगा अब इस जवाब का कोई महत्व नहीं।


अब जब काम पूरा हो गया और हमारे पास खाली समय भी रहने लगा तो धीरे-धीरे घर की याद भी सताने लगी। घर जाने की हिम्मत तो जुटा पा नहीं रहे थे, और रहने के लिये जगह की तलाश भी थी, सो सोचा क्यों ना कुछ दिन किराये के मकान में ही रहा जाये। आज के जमाने में मनपसन्द किराये का मकान मिलना आसान नहीं होता है, बहुत चप्पले घिसनी पडती है। बहुत खोजने के बाद आखिर एक मन-माफिक किराये का मकान मिल ही गया। पूरे दिल से हम इस मकान को घर बनाने में लग गये। पर किराये का मकान क्या कभी किसी का घर बना है जो हमारा बनता। हर एक काम के लिये हमें मकान मालिक से पूछना पडता, यहाँ तक कि किस समय घर आना है और कब बाहर जाना है ये भी मकान मालिक की मर्जी पर निर्भर करता था। कुछ दिनों तक तो ये बन्दिशें सहते रहे, पर आज़ाद पंछी कब तक पिंजरे में बन्द रहता, चाहे पिंजरा सोने का ही क्यों ना हो।


आखिर एक दिन हिम्मत जुटा ही लिये और किराये का पिंजरा तोड़ कर रुख कर लिये अपने घर की ओर। पता नहीं उस दिन कहाँ से इतनी हिम्मत आ गई थी, लग रहा था आज कितनी ही बड़ी मुसीबत क्यों ना आ जाये सभी से टकरा जायेंगे, कोई चाहे कितना ही बुरा भला क्यों ना कहे पर आज अपने घर पहुँच कर ही दम लेंगे। ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, माँ-पिताजी अन्दर घुसने नहीं देंगे, भाई-बहन नज़र फेर लेंगे, भाभीयाँ पहचानेंगी नहीं, पर मैं सब को मना लूंगी। आखिर अपनों से भी कोई कब तक नाराज़ रह सकता है। खून का रिश्ता, प्यार का सम्बन्ध भी तो कुछ होता है।


आखिर हिम्मत जुटा कर निकल ही पड़े हम अपने घर की ओर। और इस तरह हो ही गई हमारी घर वापसी, हमारे अपने जागरण मंच पर। वापसी उसी घर पर जहाँ हमें इतना प्यार मिला जिसे हम शब्दों में बयाँ नहीं कर सकते। इसी घर में हम पैदा हुए और पले-बढे। यही हमें कई दोस्त मिले और बहुत से नये रिश्ते भी बने। यही वो घर था जिसने हमें एक नई पहचान दिलाई। इसी घर में हमने जीवन के बहुत सारे सबक सीखे। इस घर को और हमारे सारे परिवार को हम तहे दिल से धन्यवाद देना चाहते हैं, उनका ये निस्वार्थ प्यार ही हमें यहाँ खींच लाया और हो ही गई हमारी घर वापसी।

डॉ. अदिति कैलाश




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47 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
July 24, 2012

डॉ. अदिति जी, सादर नमस्कार ! लेख के शुरु में तो हमें कुछ और ही लगा परन्तु आपने अन्त में कहानी को एक नया मोड़ दे दिया है , बहुत अच्छा और सुखद अंत रहा आपके लेख का !

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 26, 2012

    योगी जी, बहुत बहुत आभार……..आप सभी के प्रोत्साहन से ही हमें लिखने की प्रेरणा मिलती है…….

ajay के द्वारा
July 23, 2012

बहुत ही सुन्दर एवम भावनात्मक रचना, बधाइयाँ!

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 23, 2012

    धन्यवाद अजय जी..

Mohinder Kumar के द्वारा
July 18, 2012

अदिति जी, लेख के शुरु में तो हमें कुछ और ही लोचा लगा परन्तु आपने अन्त में कहानी को एक नया टविस्ट दिया तो पता चला कि हम तो गलत डारेक्शन में पतंग उडा रहे थे…बात तो कुछ और ही थी…. आपका एक वार फ़िर से स्वागत है इस मंच पर…. लिखते रहिये.

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 22, 2012

    मोहिन्दर जी, लेख पढने के लिये धन्यवाद…. असल में ये हमारी आप-बीती है, जिसे हमने प्रतीकात्मक रुप में व्यक्त किया है, अंत में जाकर आप समझ पाये जांकर अच्छा लगा….. आपका पुन: धन्यवाद…….

rajkamal के द्वारा
July 17, 2012

आदरणीय डाक्टर साहिबा ….. सादर अभिवादन ! मैं गुनाहगार हूँ आपका इसलिए क्षमा मांगता हूँ की मेरी एक लाइन की प्रतिकिर्या आपको बुरी लगी …. शायद आपको बुरा लगा होगा की इस मंच पर मैंने आपका स्वागत नहीं किया ….. आपकी पिछली पोस्ट पर प्रतिकिर्या पोस्ट ना होने के कारण आपके मेल खाते में मुबारकबाद भेज दी थी …. उसकी भरपाई के लिए आपके उपर लिखा लेख “अदिति जी बनाम बाकि सभी ब्लागर्स” पोस्ट किया तो साथी पूछने लगे की यह अदिति जी कौन है ?…. इसलिए उसको वापिस लेना पड़ गया ….. मेल वाले शब्द दुबारा से पोस्ट कर रहा हूँ WELCOME + CONGRATULATIONS+THANKS + WELCOME GOOD WISHES FOR PRACTICE

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 22, 2012

    धन्यवाद राजकमल जी, क्षमा मांगने की जरुरत नही है, हम भी कई बार इस परेशानी से दो चार हो चुके हैं, कई बार प्रतिक्रिया तकनीकी कारणों से पोस्ट नही हो पाती है…… आपका लेख “अदिति जी बनाम बाकि सभी ब्लागर्स” तो हमने पढा नही, वैसे ऐसा क्या लिख दिया था आपने कि पोस्ट वापस लेनी पडी, अरे हाँ आपने लिखा है कि ‘साथी पूछने लगे की यह अदिति जी कौन है ?’ अब दो साल दूर रहने पर ये सवाल उठना लाज़मी है…… आपके स्नेह, प्रोत्साहन, शुभकामनाओं के लिये धन्यवाद…..

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 22, 2012

    राजकमल जी, हम एक बात लिखना भूल गये, हम मेडिकल वाले डाँक्टर नही, बल्कि पी एच डी वाले डाँक्टर हैं……..

nikhilbs09 के द्वारा
July 17, 2012

नमस्कार अदिति जी, सुस्वागतम व् हार्दिक बधाइयाँ ! :)

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 22, 2012

    धन्यवाद निखिल जी……

div81 के द्वारा
July 17, 2012

डॉ अदिति जी सबसे पहले तो आप को बधाई उसके बाद आप का स्वागत है मंच पर जब आप मंच से दूर हुई तभी हमारा आना हुआ था | आप के बारे में बहुत सुना है और पढ़ा भी आप के जाने के बाद राजकमल भाई और सचिन जी से आपके विषय में जानने को मिला | बहुत अच्छी वापसी करी आपने मंच में अब उम्मीद है आप का लिखा पढने को मिलता रहेगा |

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 22, 2012

    दिव्या जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…..ये आप सभी का प्यार है, जो हमारी रचनाओं को हमेशा मिलता रह्ता है, और इसी प्यार के कारण और अच्छा लिखने की प्रेरणा मिलती है…….

narayanimaya के द्वारा
July 17, 2012

नमस्कार अदिति जी बहुत बहुत स्वागत आपका. दूर रहने से घटता नही प्यार , लौट आने पर महसूस होता जैसे सावन की पहली फुहार . धन्यवाद नारायणी

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 22, 2012

    नारायणी जी, धन्यवाद आपका……बिल्कुल सही कहा आपने, दूर रहने से प्यार घटता नही है,………

yamunapathak के द्वारा
July 17, 2012

“आप आये बहार आयी”

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 22, 2012

    धन्यवाद यमुना जी…..यहाँ बहार तो सभी से है….

Chandan rai के द्वारा
July 16, 2012

डाक्टर साहिबा जी , आपकी इस घर वापसी में हम जैसे कुछ नए सदस्य भी आपसे रूबरू हुए , आपकी घर वापसी से घर में और बहार है !

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 16, 2012

    चन्दन जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद………आप से मिलकर हमें भी अच्छा लगा…….इस घर में बहार तो सभी से है, सभी अपनी-अपनी लेखनी की खुश्बू से इस घर को महका रहे हैं…….

allrounder के द्वारा
July 16, 2012

नमस्कार अदिति जी, तो आखिर आपने अपने दो साल के अज्ञातवास का निचोड़ निकाल ही दिया अपने कुशल लेखन से ! किराए का मकान , घर का मकान , यहाँ -वहां से गुगली मारकर ! पर अच्छा लगा की वक्त की दीमक ने आपकी कलम की धार को कम नहीं किया :) ! और आखिर आप अपने परिवार मैं सम्मिलित हो ही गईं, जबकि इस परिवार के कुछ शैतान बच्चे ये सोच कर चिंतित थे की कहीं, उनकी शैतानियों की वजह से उनके परिवार का इतना महत्वपूर्ण सदस्य सदा के लिए तो ये घर परिवार ही नहीं मोहल्ला छोड़ कर ही तो नहीं चला गया :) खैर होते हैं, परिवार मैं कुछ बच्चे शैतान भी होते हैं :) और वे भी अपने साथी को दोबारा यहाँ पाकर बेहद खुश हैं ! पुन: आपका हार्दिक स्वागत है डोक्टर अदिति जी …. आप और अच्छे से अच्छा लिखें और इस मंच को सुशोभित करें यही शुभकामनाये हैं आपके लिए ! धन्यवाद !

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 16, 2012

    सचिन जी, परिवार का मोह एक ऐसा मोह हैं जो चाह कर भी कम नहीं होता है…. लेख में जो 2-4 चिट्ठियों की बात की गई है उसमें से कुछ आपकी भी थी, हम माफ़ी चाहते हैं कि हम उस समय जवाब नहीं दे पाए…..रही बात शैतान बच्चों की तो आप ही बताइए बच्चे शैतान नहीं होंगे तो कौन होगा…..वैसे भी बचपन की शैतानियों का अपना ही मजा होता है…..हम किसी से खफा हो कर नहीं बल्कि जरुरी काम की वजह से मंच से दूर थे……हमें भी आप सभी की कमी बहुत महसूस हुई……..पर अब अपने मंच पर, अपने परिवार में आकर बहुत खुश हैं…..और ये इस परिवार का प्यार ही है जो हमें यहाँ वापस खींच लाया…..आपकी शुभकामनायों के लिए आभार……

    rajkamal के द्वारा
    July 16, 2012

    मुझको खेद सहित कहना पड़ रहा है की आप दोनों के बीच भविष्य में होने जा रहे सभी TEST MATCH T20-20 AND ONE DAYS मुझको फिक्स होते दिख रहे है ….. एक बात का ध्यान रहे दोनों ही प्रतियोगियो को की पिछली बार अगर मैं अदिति जी के साथ था तो इस बार सचिन भाजी के साथ हूँ और निष्पक्ष भी रह सकता हूँ (जनता का एक नुमाइंदा -मैच फिक्सिंग का विरोधी )

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 16, 2012

    राजकमल जी, हा हा हा…… ये है असली राजकमल इस्टाइल……..आप बिलकुल भी नहीं बदले…..अभी भी जनता का झंडा आपके ही हाथों में है….. वैसे यहाँ कोई भी मैच फिक्सिंग नहीं हो रही है…..आप बेफिक्र रहिये……

    allrounder के द्वारा
    July 17, 2012

    नमस्कार भाई राजकमल जी, आखिर आज आपने ये मान ही लिया की आप अदिति जी के साथ थे, पिछले वर्ल्ड कप मैं :) और भाई ये फिक्सिंग का आरोप क्यों लगा दिया आपने हम लोगों पर ! मैदान मैं अदितिजी के साथ हमारे जितने भी मुकाबले हुए हैं वनडे, ट्वेंटी – ट्वेंटी चाहे टेस्ट मैच सब अंतर्राष्ट्रीय मानक के अनुसार ही थे, और आगे भी यदि कभी मुकाबला हुआ ( जिसकी गुंजाईश कम है ) तो यकीं जानिए मैच पूरी सिद्दत के साथ ही खेला जायेगा फिक्सिंग के साथ नहीं :) क्यूंकि अबकी बार आपने ये भी घोषणा कर दी है की आप हमारे साथ हो, और साथ नहीं भी हो तो कम से कम न्यूट्रल तो ही हो ! और ये बात हमारी टीम के फेवर मैं जायेगी ! और हाँ अदिति जी भी फाइटर हैं, हमारी तरह तो फिक्सिंग का तो सवाल ही नहीं उठता क्यों अदिति जी ? इसी बात पर एक शेर अर्ज है मुलाहिजा फरमाएं ” I am fighter not a fixer dos’nt matter who is the bowler tried to hit a sixer ” अंग्रेजी मैं है उर्दू मैं थोडा हाथ तंग है अपना :)

    rajkamal के द्वारा
    July 17, 2012

     अदिति जी ….. नमस्कारम ! आपने फरमाया है की आप पूर्ण रूप से इस मंच से दूर रही थी …. लेकिन मेरा ई स्टाइल तो आपके जाने के बाद ही बना और डिवेलप हुआ इसलिए आपका उसके बारे में जानना सवाल खड़े करता है खैर जो होगा अच्छा ही होगा

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 23, 2012

    राजकमल जी, सवाल खड़े करना छोडिये……. वैसे नहीं छोड़ सकते, इसी इस्टाइल की बात तो हम कह रहे थे, आपको किसी भी चीज के बारे में जो भी लगता है, चाहे वो अच्छा हो या बुरा आप खुले शब्दों में कहते है.

akraktale के द्वारा
July 16, 2012

अदिति जी सादर नमस्कार, पिछले दिनों भी आपकी कोई रचना इस मंच पर देखि थी आपका नाम डॉ. कैलाश द्विवेदी जी से मिलता जुलता होने के कारण ध्यान गया किन्तु पिछले दिनों नए ब्लोगर्स के साथ के अनुभव कुछ अच्छे ना होने से कोई प्रतिक्रिया दिए बिना निकल गया. आज पढ़कर ज्ञात हुआ की आप काफी समय से अनुपस्थित थीं. मुझे ख़ुशी है आपकी वापसी की, आपकी कलम से भी कुछ अच्छी रचनाएं पढने को मिलेंगी.शुभकामनाएं.

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 16, 2012

    Akraktale जी, सबसे पहले माफ़ी चाहते हैं कि आपका नाम नहीं समझ पाए…..अगली बार जब भी आप इस ब्लॉग पर आये तो जरुर बताइयेगा…… आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद…..आपके साथ क्या घटित हुआ ये तो मुझे पता नहीं, पर आपसे कहना चाहूंगी कि ये मंच एक परिवार कि तरह है और परिवार में दो-दो बातें तो हो ही जाती हैं….हमें ध्यान नहीं देना चाहिए….

rajnithakur के द्वारा
July 16, 2012

तहे दिल से स्वागत है आपका अदिति जी. ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ.

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 16, 2012

    रजनी जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

Alka Gupta के द्वारा
July 15, 2012

घर वापसी पर आपका हार्दिक अभिनन्दन अदिति जी

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 16, 2012

    अलका जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

R K KHURANA के द्वारा
July 15, 2012

प्रिय अदिति बिटिया, आपको दोबारा यहाँ देख कर अच्छा लगा ! राम कृष्ण खुराना

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 16, 2012

    चाचाजी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…. मुझे भी आपको देखकर बहुत ख़ुशी हुई ……..

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
July 15, 2012

अदिति जी नमस्कार हम तो यहाँ के नए वाशिंदे हैं..सो आपको ना हम ही सही से जानते हैं और ना ही आप हमें…चलिए धीरे-धीरे जान ही जाएंगे. पुनः इस मंच पर आपका आगमन हुआ …स्वागत है…अभिनन्दन…है… आशा करता हूँ, आपका मार्गदर्शन सतत मिलता रहेगा…..

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 16, 2012

    अजय जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…. सही कहाँ आपने धीरे-धीरे और वक़्त के साथ-साथ हम सभी एक दूसरे को जान जायेंगे……..रही बात मार्गदर्शन की तो ये मंच ही है सिखने -सिखाने के लिए….कुछ हम भी आप से सीख लेंगे……

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 15, 2012

IN A CLASS OF ITS OWN

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 15, 2012

    राजकमल जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…. इतनी छोटी टिप्पणी से काम नहीं चलेगा……आप तो ऐसे नहीं थे……

shashibhushan1959 के द्वारा
July 15, 2012

आदरणीय अदिति जी, सादर ! आपकी रचना ने इस बात को और सुपुष्ट किया कि “अपना घर तो अपना घर है ” मैं भी इस विशाल घर का एक किंचित नया और छोटा सा सदस्य हूँ और आपकी वापसी पर आपका स्वागत करता हूँ और आप वरिष्ठों के स्नेह का आकांक्षी हूँ ! सादर !

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 15, 2012

    शशिभूषण जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…. यही तो इस घर की खास बात है कि यहाँ कोई भी छोटा-बड़ा या नया-पुराना नहीं है, यहाँ सभी लोग आपस में जुड़े हुए हैं….एक माला की तरह…..सुख-दुःख में साथ-साथ…..

nishamittal के द्वारा
July 15, 2012

स्वागत अदिति जी,शुभकामनाएं

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 15, 2012

    निशाजी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….

dineshaastik के द्वारा
July 15, 2012

अदिति मंच पर आपके पुनः आगमन पर आपका बहुत बहुत स्वागत। प्रेम और लहू का रिस्ता कभी नहीं टूटता….

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 15, 2012

    दिनेश जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….सही कहा आपने प्यार और खून का रिश्ता कभी नहीं टूटता है, और ये रिश्ता ही तो है जो हम सभी को आपस में बाँधे है…..

Ramesh Bajpai के द्वारा
July 15, 2012

प्रिय बिटिया अदिति जी आपको यहाँ देख कर एकदम से तो विश्वास ही नहीं हुआ की यह आप ही है | आज के लिए हम सब के लिए इस से बढ़ कर कोई उपहार हो ही नहीं सकता | “खून का रिश्ता, प्यार का सम्बन्ध भी तो कुछ होता है।” आपको शायद ही कोई भूला हो | हार्दिक मंगल कामनाओ सहित आपका स्वागत है | आशीर्वाद है आपने यहाँ आकर हमें उपकृत किया है | मै अपने भावो को हर्षातिरेक बस शब्द नहीं दे पा रहा |

    rameshbajpai के द्वारा
    July 15, 2012

    आपकी व्यस्तता का आभाष हम सब को था | बड़े भाई आदरणीय श्री खुराना जी से ही आपके बारे में कोई सुचना मिल पाती थी | इश्वर की कृपा से आपका वह कार्य पूर्ण हो गया | उम्मीद है मंच के वे पुराने दिन फिर लौट आयेगे |

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 15, 2012

    रमेश जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद……आप सभी बड़ों का आशीर्वाद और प्यार ही है जिससे हमारी वापसी हो पाई अपने घर में……मेरे लिए भी आप सभी का साथ एक सुखद अनुभव है, आप उपकृत शब्द लिखकर मुझे शर्मिंदा ना करें…….उम्मीद है कि भविष्य में भी इसी तरह आप सभी का आशीर्वाद मिलता रहेगा….


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