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तुम मुझसे क्यूं रूठी हो

Posted On: 5 Jul, 2012 Others में

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हर साल तो इस समय तक तुम आ ही जाती थी, पता नहीं इस साल क्या हो गया है तुम्हें। तुम्हें तो पता ही है कि मुझे हर साल तुम्हारा कितना इंतज़ार रहता है, फिर भी कुछ सालों से तुम, तुमसे मिलने की मेरी बेचैनी को नज़रअंदाज करती आ रही हो। पहले तो तुम गर्मी की छुट्टियाँ खत्म होने से पहले ही आ जाती थी और हम कितना मजा किया करते थे। तुम्हारे आते ही सारा का सारा घर एक सौंधी-सौंधी खुश्बु से महकने लगता था। और मैं ही क्या, आस पडोस के लोग भी तुम्हारी खुश्बु से बहकने लगते थे। तुम्हारी आवाज़ में भी एक अजीब सी कशिश थी, तुम बोलती तो यूँ लगता मानो संगीत बज रहा हो। मुझे आज भी याद है तुम्हारे साथ बिताये वो हसीन पल। तुम्हारे आते ही छाता लेकर निकल पड्ता था मैं, और हम दोनो साथ-साथ ना जाने कितनी दूर तक निकल जाते थे। कई बार तो तुम्हारे प्यार में पूरी तरह भीग जाता था मैं। इसी तरह तुम्हारे साथ नाचते-गाते, उछलते-कूदते पता ही नहीं चलता था कि हम कितनी दूर पहुँच चुके हैं। फिर जब थककर चूर हो जाते तो चाचा की टपरी पर बैठकर गरमागरम चाय और पकौडे खाते थे। तुम्हारे साथ गरमागरम चाय और पकौडे का मज़ा ही कुछ और होता था।


तुम्हें भी शायद याद होगा कि कितनी ही बार मैंने तुम्हारे साथ सतरंगी सपने बुने थे, लाल, हरे, नीले और ना जाने कौन-कौन से रंगों के। पर अब तुम्हारे बिना सपने भी नहीं आते। तुम्हें शायद ये भी याद हो कि वापसी में जब तुम थककर बैठ जाती थी, तो तुम्हारा मन बहलाने के लिये मैं क्या-क्या नहीं करता था। ढेरों कागज की कश्तियाँ बनाकर कभी तुम्हारे हाथों में, कभी पाँव पर गुद-गुदी किया करता था। पहले तो तुम मेरी गुश्ताखियों को नज़रअंदाज कर देती थी, पर यदि ज्यादा थक जाती तो सारी की सारी कश्तियों को उठा कर एक किनारे फेंक देती थी।


तुम्हें भी तो मेरा साथ अच्छा लगता था, फिर इस साल ऐसा क्या हो गया कि अब तक तुम्हारी कोई खबर नहीं है। कितनी ही बार तुम्हारा फोन आया कि मैं कल आ रही हूँ, और मैं कितने ही दिन इसी तरह इंतज़ार करता रह गया पर तुम नहीं आई। अब तो गरमी की छुट्टियाँ भी खत्म हो गई और बच्चों के स्कूल भी खुल गये, पर तुम अभी तक नहीं आई।


कभी-कभी सोचता हूँ कि मुझसे ऐसी क्या गलती हो गई कि जिसकी मुझे इतनी बड़ी सजा मिल रही है। पर मन शांत करके सोचता हुँ तो लगता है गलती मेरी ही है। मैने ही कुछ सालों से तुम्हारा अच्छे से सत्कार नहीं किया। मुझे पता है कि तुम्हें हरियाली बहुत पसंद है, पर ना मैंने तुम्हारे लिये हरे-भरे पेड लगाये और ना ही तुम्हारे आने पर तुम्हारे रहने का अच्छा इंतज़ाम किया। और तो और पिछले कुछ सालों में मैंने शहर में इतना प्रदूषण फैलाया कि अब यह शहर शायद तुम्हारे रहने लायक ही नहीं रहा। पर अब मुझे मेरी गलती का एहसास हो गया है। मैं प्रण लेता हूँ कि आज से ही तुम्हारी पसंद-नापसंद का पूरा ध्यान रखूंगा।


उम्मीद करता हूँ कि मेरा ये पत्र पढ़कर तुम मेरी बेचैनी अच्छी तरह समझ सकोगी। मुझे भरोसा ही नहीं पूरा विश्वास है कि मेघा अब तुम मुझसे ज्यादा दिन रूठी नहीं रहोगी और जल्दी ही बारिश की फुहार लेकर मेरे तन-मन और घर-आँगन को भीगो दोगी। तुम्हारे आने के इंतज़ार में।

डॉ. अदिति कैलाश


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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshbajpai के द्वारा
July 15, 2012

अदिति बिटिया कहते है बहुत ज्यादा खुश होने पर बहुत सी चीजो पर नजर ही नहीं पड़ती | मै” घर वापसी ” को ही पुनरागमन पोस्ट समझ रहा था , पर आप देर सही पर दुरुस्त आई | रूठी ,बेटी ,रूठे मानसून को मन कर साथ लायी | चलिए अंत भला तो सब भला आपका स्वागत ,शुभकानाए ,बधाई , व आशीर्वाद यही से दिए देता हु |

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 16, 2012

    चाचाजी, कोई बात नहीं, चलिए इसी बहाने हमें आपका आशीर्वाद दो बार मिल गया……वैसे “घर वापसी ” ही हमारी पुनरागमन पोस्ट होने वाली थी, पर पूरी नहीं होने के कारण या यूँ कहूँ की रचना के लिए उचित शब्द नहीं मिल पाने के कारण वो बाद में पोस्ट की गई…..वैसे भी हम इस मंच से और ज्यादा दूर नहीं रह पा रहे थे….. आपकी शुभकानाए ,बधाई व आशीर्वाद के लिए धन्यवाद…..

allrounder के द्वारा
July 9, 2012

नमस्कार अदिति जी, सर्वप्रथम तो मंच पर पुन: आगमन पर हार्दिक स्वागत आपका ! दूसरा आपके नाम के आगे डॉ. जुड़ने की हार्दिक बधाई आपको, और अंत मैं आपका हार्दिक धन्यवाद आपके इस लेख मानसून को लिखने का, क्यूंकि आपने पांच जुलाई को ये आलेख लिखा और हमारे शहर मैं छ: जुलाई से बारिश शुरू हो गई, शायद बारिश को भी आपके लेख का इन्तजार था …..

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    सचिन जी, आपका बहुत-बहुत-बहुत धन्यवाद……तो मेघा आपके शहर में ही रुक गई, जरा उनसे कहिये यहाँ हम भी पलकों को बिछाए उनका इन्तजार कर रहे हैं……..जल्दी आयें, कहीं ज्यादा देर ना हो जाये………..

roshni के द्वारा
July 8, 2012

नमस्कार अदिति जी काफी दिनों बाद आपका आना हुआ … मंच पर स्वागत है आपका … सुंदर लेख आभार

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    रोशनी जी, आपका धन्यवाद……..आप सभी का प्यार ही है जो हमें यहाँ खींच लाया………..

pritish1 के द्वारा
July 8, 2012

हम आपसे रूठे हैं………….कारण बहुत से हैं…….आज प्रकृति रूठी है……….कारण बहुत से हैं………किन्तु प्रश्न इतना है………. क्यों बनाया हमने ऐसा समाज……….? http://pritish1.jagranjunction.com/2012/07/07/kyun-banaya-hamne-aisa-samaj/

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    प्रितीश जी, माफ़ करने वाला सबसे बड़ा होता है………उम्मीद करते हैं की हमारी गलती के लिए आप और प्रकृति दोनों ही हमें माफ़ कर देंगे……. धन्यवाद आपका……..

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
July 7, 2012

अदिती जी, प्रकृति और उसको हो रहे नुकसान की चिंता के साथ ही उसके नैसर्गिक स्वरूप का उत्कृष्ट मानवीकृत पक्ष आपने प्रस्तुत किया है। साथ ही इसे पढ़कर कुछ पुरानी यादें भी ताजा हो गईं।

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    सिंह जी, धन्यवाद आपका……पढ़कर अच्छा लगा कि हमारे लेख ने आपको आपका बचपन याद दिला दिया……वैसे बचपन का अपना ही मजा होता है…….काश वो दिन फिर से वापस आ जायें……

nishamittal के द्वारा
July 7, 2012

बहुत सुन्दर भाव पर्यावरण का संतुलन बिगड़ने को हम ही दोषी हैं.स्वागत आपका.

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    निशा जी, धन्यवाद आपका…….उम्मीद है आपका प्यार इसी तरह मिलता रहेगा……..

Chandan rai के द्वारा
July 7, 2012

अदिति जी , आपको पहली बार पढ़ा , आपने बेहद अच्छा आलेख लिखा !

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    चन्दन जी, आपने हमारा लेख पढ़ा, आपका धन्यवाद…….उम्मीद करते हैं आपका प्रोत्साहन पुनः इसी तरह मिलता रहेगा……….

chaatak के द्वारा
July 7, 2012

डॉ. अदिति का मंच पर हार्दिक स्वागत है|

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    चातक जी, धन्यवाद………..

shashibhushan1959 के द्वारा
July 6, 2012

आदरणीय अदिति जी, सादर ! बारिश के बहाने बचपन की यादें, प्रदुषण से होनेवाले नुकसान की चेतावनी, वृक्षारोपण का सन्देश ! बहुत सुन्दर ! एक तीर – कई शिकार ! प्रवाहमय रचना ! बधाई !

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    शशिभूषण जी, इस प्यारी टिप्पणी के लिये आपका धन्यवाद…..चार वाक्यों में ही आपने हमारे पूरे लेख का सार बता दिया……पुनः धन्यवाद…

rita singh 'sarjana' के द्वारा
July 6, 2012

अदिति जी , काफी अंतराल बाद पुन इस मंच पर आपको देखकर बहुत ख़ुशी हुई l मंच से यकायक आपका गायब हो जाना अन्दर-ही-अन्दर काफी खलता रहा, कई-कई बार तो ये आँखे आपको तलाशती रही ,याद करती रही , आपकी लेखनी से मैं तो पहले ही कायल थी , आज भी आपने अपनी कल्पनाओ को शब्दों से तराशती हुई झुलसाती गर्मी पर सुन्दर लेख लिखा ,बधाई आपको साथ ही डॉ.बन्ने के लिए भी हार्दिक बधाई l कुछ दिन पहले खुराना अंकल मेरा मतलब चाचा जी ने भी मंच पर वापसी किया हैं , आपको देखकर उन्हें भी बहुत ख़ुशी होगी l

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    रीता जी, सच कहे तो हमें भी आप सभी की बहुत याद आई और इस मंच की भी, पर क्या करें कुछ मज़बूरी ही ऐसी थी कि इतने दिनों दूर रहना पड़ा……….आप की बधाइयों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, इसी तरह आप लोगों का प्यार मिलता रहा तो और भी अच्छा लिखने की कोशिश रहेगी……

seemakanwal के द्वारा
July 6, 2012

अदिति जी लो तुमने इतना मुझे पुकारा की मुझे आना ही पड़ा चलो अब आओ भी भीगने .बहुत प्यारा ख़त है . अदिति जी बधाई .

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    सीमा जी, धन्यवाद आपका कि आप हमारी एक ही आवाज़ पर दौड़ी चली आई……वैसे साथ भीगने में बहुत मजा आएगा……….

yamunapathak के द्वारा
July 6, 2012

बहुत सुन्दर और व्यग्र प्रतीक्षा की अभिव्यक्ति है अदितिजी.

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    धन्यवाद यमुना जी!

Manoj के द्वारा
July 6, 2012

डॉ. अदिति कैलाश… पूरे एक साल पहले जब आप जागरण जंक्शन मंच को छोड़कर गई थी तो आप मात्र अदिति कैलास थी और अब डा. अदिति कैलाश.. बधाई. जागरण जंक्शन के मंच पर आपको दुबारा से स्वागत है. इस मंच पर आपको एक लंबे समय से ना देख पाने का मलाल रहेगा लेकिन उम्मीद है आपके ब्लॉग से एक बार फिर काफी कुछ सीखने को मिलेगा. स्वागत है आपका एक बार फिर जागरण जंक्शन के ब्लॉगरों के बीच. http://manojkumarsah.jagranjunction.com/

    Dr. Aditi Kailash के द्वारा
    July 9, 2012

    मनोज जी, आप जैसे ब्लॉगर मित्रों का प्यार ही है जो हमें यहाँ वापस ले आया…. हमें भी इस मंच की बहुत याद आई…आप की बधाइयों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद…..उम्मीद करती हूँ आप सभी का प्रोत्साहन भविष्य में भी इसी तरह मिलता रहेगा……


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