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क्या फल और सब्जियां भी इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं (व्यंग्य/लेख)

Posted On: 10 Jul, 2010 Others,न्यूज़ बर्थ में

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laukiआज अख़बार के पन्ने पलटते-पलटते एक खबर पर ज्यों ही नजर पड़ी, तो नजर हट नहीं पाई…. अरे अरे ज्यादा खुश मत होइए, हमारी नजर जीरो फिगर वाली लोलो की फोटो पर नहीं अटकी थी… खबर ही कुछ ऐसी थी कि आपकी सांस भी कुछ देर के लिए तो आराम फरमा ही लेगी…. लिखा था “लौकी का जूस पीकर एक व्यक्ति की मौत और पत्नी अस्पताल में”…. और मरने वाला भी कोई आम आदमी नहीं, एक वैज्ञानिक…… खबर ने हमें सोचने पर विवश कर दिया… अब लौकी के जूस पीने से भी क्या किसी की मौत होती है…. अरे भाई बाबाजी तो रोज ही कहते हैं लौकी के जूस पीने से आदमी की उम्र बढ़ती है… बात हमारी उलटी खोपडिया में घुस नहीं पा रही थी…

सोचते-सोचते सोच ही गए कि क्यों नहीं हो सकती है मौत लौकी के जूस से…. अब आजकल साग-सब्जियों में पहले वाली बात कहाँ रही… ना तो वो स्वाद रहा और ना ही वो रंगत… बैंगन की सब्जी बैगन जैसी नहीं लगती और मेथी की खुश्बू ने भी दम तोड़ दिया है… पहले तो रसोई से आती खुश्बू से ही पता चल जाता था आज कौन सी सब्जी बन रही है… आजकल खाकर भी नहीं समझ पाते कि ये सब्जी कौन सी है…

यूँ तो आजकल सभी सब्जियां साल भर मिलने लगी हैं… पर अब वो स्वाद कहाँ… पहले जो गोभी सिर्फ ठण्ड में ही मिला करती थी आजकल जून की भरी गर्मी में भी बसियाती हुई मिल जाती है, जिसे खाओ तो लगता है मुंह का स्वाद ही बिगड़ गया हो …. सालों पहले दादी-नानी के द्वारा सुखा कर रखी जाने वाली मौसमी सब्जियों का भी स्वाद इससे ज्यादा अच्छा होता था…

पर इसमें सब्जियों का दोष नहीं है… अब जब किसान जरुरत से ज्यादा रसायनों का उपयोग करेंगे तो उसका असर स्वाद पर तो होगा ही ना… किसान जैविक खेती को छोड़, रासायनिक उर्वरकों के पीछे अंधे होकर भाग रहे हैं…. जरुरत ना होने पर भी कीटनाशी रसायनों से फसलों को तर किया जा रहा है… कहीं लौकी-कद्दू में हार्मोन्स की सुइयां टोची जा रहीं हैं… अब इन सब जहर का असर सब्जियों पर तो होगा ही ना…

juicesऔर तो और लोगों का दिमाग भी कम खुरापाती नहीं है…. अब बाबाजी ने कह दिया कि लौकी का जूस पीने से उम्र बढ़ती है तो इसका मतलब ये नहीं कि आप नाश्ते, लंच और डिनर में सिर्फ और सिर्फ लौकी ही खाए और लौकी ही पीयें… हमारे एक मित्र हैं, दोनों ही मियां-बीवी दिनभर में करीब ६-७ तरह के फलों/ सब्जियों के रस पीते ही रहते हैं… ८ बजे त्रिफला, १० बजे एलोवेरा, १२ बजे आंवला, २ बजे बेल, ४ बजे करेला और ना जाने क्या-क्या…. वो भी बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के… दिन में एक टाइम तो वो इस तरह के रसों से ही अपना पेट भरते हैं…

पर किसी भी चीज़ की अति अच्छी नहीं होती है… प्राकृतिक चीजों का उपयोग करें, पर अंधे होकर नहीं… किसी भी प्राकृतिक चीज़ों के प्रयोग से पहले किसी विशेषज्ञ से पूरी जानकारी अवश्य लें कि इस्तेमाल की विधि क्या है और कितनी मात्रा में इस्तेमाल करना लाभदायक होगा… और सबसे खास उपयोग के समय क्या-क्या निषेध हैं….

वैज्ञानिकों के अनुसार कुछ सब्जियों और फलों, खासकर कद्दू वर्गीय (जिसमें कद्दू, लौकी, तरोई, करेला, खीर, ककड़ी आदि आते हैं) और कड़वे स्वाद वाली सब्जियों में (करेला छोड़कर, करेला तो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक होता है), थोड़ी मात्रा में टॉक्सिन होता है, जो कि जहरीला होता है… इसकी थोड़ी मात्रा शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती है… पर टॉक्सिन की ज्यादा मात्रा शरीर के लिए जानलेवा साबित हो सकती है… इसलिए अब अगली बार जब भी फलों और सब्जियों का उपभोग करें तो इन छोटी-छोटी बातों का जरुर ध्यान रखें, आखिर ये आपकी सेहत का सवाल है…

किसी भी सब्जी या फल को उपयोग से पहले अच्छी तरह धोये.

बिना धुली हुई सब्जी या फल ना खाएं.

अगर नमक मिले पानी से धोयेंगे तो टॉक्सिन का खतरा कम हो जायेगा.

कच्ची सब्जियों जैसे सलाद और फलों पर नमक डाल कर ही खाए.

कड़वे स्वाद वाली सब्जी जैसे खीरा को छीलकर ही खाए, इनके छिलकों में कड़वापन टॉक्सिन के कारण ही होता है..

अगर छीलने के बाद भी खीरा या लौकी कड़वी लगे तो उपयोग में ना लाये.

जहाँ तक हो सके बिन मौसम की सब्जियां और फलों का उपयोग ना करें.

डिब्बाबंद सब्जियों और जूस से जितना हो सके परहेज करें, बेहतर होगा ताजे फल और सब्जियां ही उपयोग में लायें.

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72 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bubbie के द्वारा
May 25, 2011

Hey, sbtule must be your middle name. Great post!

Rahul के द्वारा
July 13, 2010

I must say, a nice post. Helpful for all. Keep it up.

    aditi kailash के द्वारा
    July 13, 2010

    Rahul ji, Thanks for ur encouragement…..

y dubey के द्वारा
July 12, 2010

अदिति जी , आपने व्यंग /लेख के माध्यम से जिस तरह तथ्यपरख जानकारिया उपलब्ध कराई ,सचमुच प्रसंशनीय हैं ! जब तक हम जागरूक नहीं होंगे यू ही असमय कालकवलित होते रहेंगे !आशा करते है भविष्य में भी आप हमें इसी तरह अनुग्रहित करती रहेंगी.

    aditi kailash के द्वारा
    July 12, 2010

    दुबे जी, आपके स्नेह और प्रोत्साहन के लिए आभार…. हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि जो भी उपयोगी जानकारी हमारे पास हो वो आप सब के बीच बाँट सकें…

Rajesh Tiwari के द्वारा
July 12, 2010

Aditi ji, “Aap ko Bahoot Sari Badhai for becoming number one blogger of Jagaran” .really you are a fantastic writer, poet and have very thorough knowledge of every subject which you want to present by your pen. Aditi ji I want to share one of my true dream stories with you, because you can better present this by your pen than me, the name of this story is “Jivan ka Safar” Regards Rajesh

    aditi kailash के द्वारा
    July 12, 2010

    Rajesh ji, Thanks for ur encouragement…. really it means a lot for me….. still the final result of the contest does not declare, so plz don’t tell me the number one blogger, I am same as others…. Its ur greatness that u find me suitable for telling ur dream story…. plz share ur story with me through my mail, I will try to do my best…. Thanks again….

Deepak Jain के द्वारा
July 12, 2010

अदिति जी सारा खेल पैसों का है आज किसी को किसी से कोई लेना देना नही अभी ३ दिन पहले ही न्यूज़ पे ४९००० नकली घी पकड़ने की खबर देखकर तो हमारा दिमाग ही ख़राब हो गया अब बेचारे किसान भी क्यूँ पीछे रहें दीपक जैन

    aditi kailash के द्वारा
    July 12, 2010

    दीपक जी, नकली घी की खबर पढ़कर तो अब हमने घी खाना ही छोड़ दिया है…. और तो और दूध भी नकली बनने लगे हैं…. यूरिया का प्रयोग कर लोग नकली दूध बना रहे हैं…. समझ नहीं आता किस पर विश्वास करें, किस पर नहीं…. और तो और खाद्य विभाग सबकुछ जानकर भी सोया हुआ है….

    Tike के द्वारा
    May 25, 2011

    Now I feel suptid. That’s cleared it up for me

    Gildas के द्वारा
    May 25, 2011

    You’re a real deep tihkenr. Thanks for sharing.

june के द्वारा
July 11, 2010

फल और सब्जी ही क्यों मिलावट तो दवाइयों तक में हैं , इंसान मजबूर है उसके पास विकल्प नहीं है और मेरा मानना है ऐसी सभी मुसीबतों के जनक हम खुद हैं

    aditi kailash के द्वारा
    July 11, 2010

    सही कहा, सभी मुसीबतों के जनक हम इंसान ही हैं… अपने थोड़े से फायदे के लिए हम दूसरों की जान जोखिम में डालने से भी नहीं चुकते… पर सावधानी भी हमें ही रखनी होगी….

rajkamal के द्वारा
July 11, 2010

आजकल ki bahuy kaha itna dhyaan रखती है की … हर phal और sabzi ko achi tarah dho kar istemaal करे… kher isme saare hi pariwaar ka भी तो भला है .. और उस से भी बढकर khud का भी …

    aditi kailash के द्वारा
    July 11, 2010

    ख्याल तो हम सभी को रखना होगा, इससे हम सभी का भला होगा….

    Milly के द्वारा
    May 25, 2011

    This forum needed shkaing up and you’ve just done that. Great post!

    Ally के द्वारा
    May 25, 2011

    I thank you humbly for sarinhg your wisdom JJWY

Prabhakar के द्वारा
July 10, 2010

I acquiesce, would like to add few points: Did you know that just washing vegetables with soap and water does not take the toxins off? If not washed properly you could be consuming toxins from the pesticides, herbasides and other chemicals our farmers put on our produce. There are some products on the market to remove toxins from fruits and veggies, but they tend to be expensive. Here is a low cost effective way to be sure your produce is clean and toxin free. VEGTABLE WASH 1 CUP WATER 1 CUP WHITE VINEGAR 1 TBS BAKING SODA 10 DROPS GRAPE SEED EXTRACT PUT IN A SPRAY BOTTLE, SPRAY VEGTABLES AND LEAVE ON FOR 5 MINUTES. WASH AS USUAL. ENJOY THE PRODUCE. YUM!

    aditi kailash के द्वारा
    July 11, 2010

    Prabhakar ji, Nice supplement of knowledge… Thanks for providing this valuable knowledge… this will also definitely help the people….

राजीव तनेजा के द्वारा
July 10, 2010

बढ़िया जानकारी भरा आलेख… 

    aditi kailash के द्वारा
    July 11, 2010

    आपका आभार…

    Adelaide के द्वारा
    May 25, 2011

    You’re the grteaest! JMHO

Nikhil के द्वारा
July 10, 2010

अदिति बहिन, फलों और सब्जियों के कारन न जाने कितने लोग आज बीमार पर रहे हैं. बिना सोचे बिना समझे हम बस पैसे खर्च करते और सोचते हैं बस काम हो गया. आपके इस लेख से बुत कुछ सिखाने को मिलता है, लेकिन हम कितनी भी कोशिश कर लें अब स्वस्थ खाओ तन मन जगाओ नहीं हो सकता.

    aditi kailash के द्वारा
    July 11, 2010

    निखिल जी, आपका आभार… आजकल के एक-दुसरे को लूटो वाली संस्कृति में अपने स्वास्थ्य का ख्याल हमें खुद ही रखना पड़ेगा… फिर कहा भी गया है.. Prevention is better than cure…

    Eloise के द्वारा
    May 25, 2011

    You’re the one with the branis here. I’m watching for your posts.

विनीत तोमर के द्वारा
July 10, 2010

अत हर चीज की बुरी होती हे, अगर आदमी से कहें के रिश्वत मत लेना तो नहीं मानेगा, दुसरे की मदद करनी चाहीये नहीं करेगा, और दुसरे को दोषी कहेगा,मतलब के लिए कुछ भी करेगा चाहे नुकसान अपना ही क्यों न हो, यही हमारी फितरत हे.

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    विनीत जी, आपने बिलकुल सही कहा… किसी भी चीज़ की अति अच्छी नहीं होती…. दवाई भी अगर ज्यादा मात्रा में ले ली जाये तो वह जहर का ही काम करती है….

chaatak के द्वारा
July 10, 2010

अदिति जी, आपकी पोस्ट शहरी नागरिकों के लिए एक अच्छी समझ और तमाम से कीटनाशक जनित रोगों से सावधान होने की राह तो देता ही है साथ ही ग्रामीण भाइयों और किसानो को भी ज्यादा उत्पादन के लालच में कीटनाशको का अंधाधुंध प्रयोग न करने की हिदायत भी देता है| लोगों के स्वास्थय हित में लिखकर आपने स्वस्थ भारत बनाने की दिशा में एक योगदान दिया| पोस्ट में लिखी शब्दावली वनस्पति शास्त्र में आपकी रूचि प्रदर्शित करती है | कहीं आप इसी विषय पर तो शोध नहीं कर रही ? अच्छी पोस्ट पर बधाई !

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    चटक जी आपके प्रोत्साहन के लिए आभार…. अगर हम छोटी छोटी बातों का ध्यान रखें तो अच्छा स्वास्थ्य हमारे हाथों में ही है… किसी भी चीज़ का अँधा अनुकरण नहीं करना चाहिए… आपने वनस्पति शास्त्र में रूचि के बारे में पूछा है, हमें कृषि और किसानों से सम्बंधित विषयों में काफी रूचि है…. हमने २-३ बार इस पर लिखा भी पर इस मंच पर लोगों की रूचि इस विषय में नहीं दिखाई दी….. हम ph d तो management में कर रहे हैं….

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    देखिये आपका नाम फिर से चटक गया….

    Marni के द्वारा
    May 25, 2011

    Your answer was just what I ndeeed. It’s made my day!

kmmishra के द्वारा
July 10, 2010

सत्य वचन अदिति जी । बेमौसम और रसायनों से तैयार तैयार करी गयी सब्जियों फलों से बचना चाहिये । और अगर घर में थोड़ी सी भी जगह हो तो लौकी, नेनुआ, करेला, भिंडी घर पर ही उगा सकते हैं । मैं तो घर की छत पर उगा लेता हूं । अब कोई सड़ी लौकी का जूस पी कर मर गया तो इसमें रामदेवजी क्या कर सकते हैं । बहुत सुंदर जानकारी । आभार ।

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    मोहन जी, अच्छा लगा जानकार कि आप भी अपनी छत का सदुपयोग कर रहे हैं… हमने भी अपनी छत पर करेला, लौकी, तरोई, पालक, मेथी आदि का सफल उत्पादन किया है… प्रोत्साहन के लिए आपका आभार….

Ramesh bajpai के द्वारा
July 10, 2010

अदिति जी सच कहा आपने ” सालों पहले दादी-नानी के द्वारा सुखा कर रखी जाने वाली मौसमी सब्जियों का भी स्वाद इससे ज्यादा अच्छा होता था…” पर अब तो सब कुछ बदल गया है इतनी अच्छी जानकारी का शुक्रिया

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    रमेश जी, सहमती के लिए आभार… हम धीरे-धीरे अपने पूर्वजों के द्वारा दी गई धरोहरों और ज्ञान को भूलते जा रहे है, ये एक सोचनीय विषय है…

parveensharma के द्वारा
July 10, 2010

सही कहा आपने केमिकल से पकाए आम, केले, ओक्सिटोसीन से भरपूर लौकी, तौरी खाकर तो अच्छे-अच्छों का स्वास्थ्य बिगड़ जाये. अभी एक चैनल बाबा रामदेव को वैज्ञानिक की मौत का जिम्मेदार बता रहा है…अरे भाई जब मिलावटी चीज पेट में जाएगी तो गड़बड़ ही करेगी न… इसमें बाबा रामदेव क्या करे….एक बात और….ब्लॉग में फोंट्स का साइज़ कैसे बढ़ाएं और उन्हें विभिन्न रंगों में कैसे ढालें…इसके बारे में बताएं.

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    लोग किसी भी गलती के लिए किसी और को जिम्मेदार ठहराने से नहीं चुकते… आपकी सहमती के लिए आभार… फ़ॉन्ट साइज़ बढ़ाने और टेक्स्ट कलर के लिए आप visual आप्शन चुने, वहां पर फ़ॉर्मेटिंग से सम्बंधित अलग -अलग कई आप्शन दिए हुए है…

allrounder के द्वारा
July 10, 2010

लौकी , सब्जियों फलों पर Ph D कर रही हो क्या ? इतने फल खाने के लिए पैसे कहाँ से आयेंगे ? अच्छी जानकारियाँ दीं धन्यबाद!

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    कुछ ऐसा ही समझ लीजिये…… फल खाने के लिए पैसों की क्यों जरुरत है… घर के आगे और पीछे आँगन में फल और सब्जियां उगाइये और साल भर ताज़ी-ताज़ी सब्जियों और फलों का मजा लीजिये… और अपनी मेहनत के फल का स्वाद मीठा भी होता है…. आपका आभार…

    allrounder के द्वारा
    July 10, 2010

    चलो आपसे सारे साथी मिठाई मांग रहे हैं, हमें आप एक टोकरी अपने बगीचे के कुदरती फल भेज देना !

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    मिठाई खिलाने वालों की लाइन में तो आप भी खड़े हैं…

    allrounder के द्वारा
    July 12, 2010

    ये मेरे सभी Bouncer का Bouncer है, आपको शायद नहीं मालूम jagranjunction वालों ने टॉप -१० की लिस्ट मैं आपको No 1 और मुझे No 10 पर ही स्थान दिया है, वो एकदम सही है ! हाँ No 1 पर आने से पहले मुझे आपसे एक वचन चाहिए यदि आप दें तो मैं No 1 बन्ने के बाद आपसे मांग सकता हूँ !

    aditi kailash के द्वारा
    July 12, 2010

    आपने शायद लिस्ट अच्छे से नहीं देखी है… वहां मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा है… Not in fixed order, in alphabetical order only….. अब हमारा नाम अ से आता है तो हम पहले नंबर पर है और आपका स से तो आप दसवें नंबर पर…. आप घबराते क्यों हों, पूरी पिक्चर तो अभी बाकी है…. क्या पता आप पहले और हम दसवें पर पहुँच जाएँ…. आपके वचन की बात सुनकर रामायण की याद आ गई… वचन तो हम भी मांग सकते हैं….. ये तो रिज़ल्ट ही बताएगा कि वचन हम मांगे या आप…. आपको शुभकामनायें…

    allrounder के द्वारा
    July 13, 2010

    लगता है ये तो आप हमारा दिल रखने और वचन देने मैं टाल – मटोल के लिए कह रही! लेकिन लेकिन घबराओ नहीं, वचन मैं २ चीज़ें बिलकुल नहीं मांगूंगा पहला जीता हुआ LAPTOP और दूसरा उसे चलाने वाला——-, इसलिए घबराओ नहीं बिंदास वचन दे डालो !

    aditi kailash के द्वारा
    July 13, 2010

    हमारी इतनी औकात (क्षमता, जैसा की दिग्विजय जी ने बताया था) कहाँ कि किसी को कुछ दे सकें, फिर भी आपको ऐसा लगता है कि हम कुछ दे सकते हैं तो बाद में क्यों अभी मांग लीजिये…. अगर हमारे लिए मुमकिन होगा तो कोशिश करेंगे…. और अब पहेलियाँ ना बुझायें और बात बता ही दें…

    allrounder के द्वारा
    July 13, 2010

    अरे यार हो गया न पंगा ! अदितिजी की बातों से मुझे गुस्से की बू आ रही है, इसलिए मैं अपनी पहेलियाँ – बहेलियन छोड़ कर सीधे मुद्दे पर आता हूँ ! अदिति जी क्या है कि बचपन से मुझे लोगों के Interview लेने का बड़ा शौक है, और मैं अपने कल्पलिक S D चैनल पर झूठे interview छापता रहता हूँ, जैसा कि Breaking News मैं आपका भी प्रकाशित किया था, किन्तु मैं चाहता हूँ कि जब आप No 1 बने तो मैं आपका असली Interview अपने इस काल्पनिक चैनल पर प्रकाशित करूँ, Interview सिर्फ इस मंच से सम्बंधित होगा, अगर कहीं भी आपको कुछ व्यक्तिगत लगे तो आप उस प्रश्न का जवाव न देने के लिए स्वतंत्र है ! और ये बिलकुल गंभीरता से लिया जायेगा मजाकिया नहीं ! अगर आप No बनी तो क्या आप हमारे चैनल को Interview देंगी ! अगर इस लिए लगा दिया कि मैच अभी ख़तम नहीं हुआ ! तुम्हारे कछुआ चाचा अभी दौड़ मैं हैं ! धन्यबाद !

    aditi kailash के द्वारा
    July 13, 2010

    सचिन जी, हम गुस्सा कतई नहीं हुए… हमें गुस्सा इतनी आसानी से नहीं आता, गुस्सा तो तब आता है जब लोग जानबूझ कर हमारी छवि बिगाड़ने की कोशिश करते हैं…. और हमें सीधी-सीधी बात पसंद है, ये पीठ-पीछे का वार हम पसंद नहीं करते…. वैसे रज़िया दीदी ने सही कहा था यहाँ जो दिखता है वो है नहीं, कोई किसी का नहीं है…. रही interview की बात, अरे भाई हम इतने बड़े कहाँ बन गए कि हमारे बारे में कोई लिखना चाहता है और लोग पढना चाहते हैं….


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