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मैं और मेरा चाँद (कविता)

Posted On: 7 Jul, 2010 Others में

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chand 1मैं और मेरा चाँद
अक्सर अँधेरी रातों में
चाय की प्यालियों में डूबकर
जागा करते हैं रात भर

कभी तोड़ते हैं खुशियों का गुल्लक
बाँट लेते हैं खुशियाँ आधी-आधी
और अश्क़ों की बारिश में कभी
भिगो देते हैं गम के तकियों को

हँसते हैं, गाते हैं और गुनगुनाते हैं
और कभी-कभी शरमाते भी हैं
बिता देते हैं हम सारी रात
यूँ ही एक दूजे की बातों में
दुश्मन है मेरी सुबह की किरणें
कर देती है हम दोनों को जुदा
फिर रात मिलन का वादा लेकर
मेरा चाँद छुप जाता है कहीं बादलों में


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93 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Yashi के द्वारा
August 30, 2011

आप सच में भुत अच लिखती है मई तो आपकी फेन हो गयी हु येसब आप बनती केसे है और लोग चाहे जो बोले बत मेरा मन्ना है ये है आज भी सचाई जिन्दा है लोहो मई आज भी लोग फीलिंग शेर करते है आपसी तरह लिखते रहो बस आपकी कविता मुझे भुत पसंद आई.

Wilma के द्वारा
May 25, 2011

That’s more than snebisle! That’s a great post!

sandeepkaushik के द्वारा
April 21, 2011

Hi Aditi Ji, Its a mind blowing creation. So touchy it is…!! Thank u very much.

vipul के द्वारा
July 14, 2010

Aditi ji, I think \"मैं और मेरा चाँद\", u have written for me only. it\’s quite similer to my daily life-style. again thanks for giving words to my thoughts.

    aditi kailash के द्वारा
    July 15, 2010

    Vipul ji, Thanks for ur encouragement…. I think this post is not only related to ur way of life, but this post is about the life style of all those people who r nocturnals…..

    Cheyanna के द्वारा
    May 25, 2011

    Thnkas for sharing. What a pleasure to read!

PARUL AZAD के द्वारा
July 13, 2010

good thought ,i like it.

    aditi kailash के द्वारा
    July 15, 2010

    Parul ji, Thanks for ur encouragement….

rajkamal के द्वारा
July 12, 2010

अदिति जी ऐसा लगता है की आप भी मेरी तरह बिना रचना पड़े टिपण्णी देती है शायद कभी-२… मेरी रचना ” मैं यहाँ रहू की चला जाऊँ…” में ही तो मेने अपने उस दोस्त के बारे में बताया था … खैर रब्ब करे की जिन-२ का आप भला करवाना चाहती है कम से कम उनका तो हो ही जाये ….

    aditi kailash के द्वारा
    July 13, 2010

    ऐसी बात नहीं हैं… शब्दों का फेर है, अर्थ का अनर्थ बनते देर नहीं लगती…. हमें याद है आपने उस पोस्ट में व्यंग्य के रूप में अपने किसी दोस्त का जिक्र किया था, पर वह पोस्ट सभी के लिए थी, इसलिए आपका ये कहना कि सिर्फ हमें और चाचाजी को पता है कि आपका ऐसा कोई दोस्त है हमें अच्छा नहीं लगा… आपने ये बात सिर्फ मजाक में कहीं, ये हम जानते हैं, पर इससे लोगों में एक गलत सन्देश ही जाता है…. और हम हमेशा ही पोस्ट को पढ़कर प्रतिक्रिया देते हैं…. आपका आभार….

soni garg के द्वारा
July 12, 2010

Very well written ………..it’s really Good and touchy …………

    aditi kailash के द्वारा
    July 12, 2010

    सोनी जी, आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर मन बहुत खुश हुआ…. ये मेरे ब्लॉग पर आपकी पहली प्रतिक्रिया है, अच्छा लगा पढ़कर…. आपका आभार….

    Soni garg के द्वारा
    July 13, 2010

    आपके ब्लॉग पर ये वास्तव में मेरी पहली प्रतिक्रिया है ये तो खुद मुझे भी नहीं पता लेकिन आपके कई ब्लॉग पढ़े है ! आपके बाउंसर और आपकी नारी आधारित कविता भी पढ़ी थी गलती से कमेन्ट करना भूल गई होंगी उसके लिए में माफ़ी मांगती हूँ ! दरअसल दिन भर में कुछ १५ से २० ब्लॉग पढने की आदत लग चुकी है कई बार पढ़ते पढ़ते ध्यान नहीं रहता की किस पर कमेन्ट किया और किस पर नहीं बल्कि एक बार तो किसी और का कमेन्ट किसी और के ब्लॉग पर कर दिया ! लेकिन अब अपनी इन आदतों को सुधारते हुए यहाँ कमेन्ट करना शुरू किया है शुरुआत सचिन जी के ब्लॉग से हुई है उनके एक महीने पहले डाले गए बाउंसर का जवाब अब दिया है वैसे आपके पिछले पढ़े हुए ब्लॉग पर ज़ल्द ही कमेन्ट करुँगी ! आपके कमेन्ट तो मुझे मिलते ही रहते है ! उसके लिए आपका आभार ! and all the best for the final result

    aditi kailash के द्वारा
    July 13, 2010

    सोनी जी, लगता है आज आपने हमारे रचनाओं पर अपनी कृपादृष्टि डाली है…. एक के बाद एक आपकी प्रतिक्रियाएं मिल रहीं हैं… आपने हमारे पोस्ट पढ़े और सराहा आपका आभार….. यार ये माफ़ी-वाफी मांगकर हमें बार-बार शर्मिंदा ना किया करो… हम भी आपके लेखनी के कायल हैं, पर आप आजकल पहले जैसे सक्रिय नहीं दिख रहीं है लिखने के मामले में, काफी अन्तराल के बाद आपको पढने मिल रहा है, कोई खास बात….

    soni garg के द्वारा
    July 14, 2010

    बिलकुल सही कहा आपने लिखने में मेरी सक्रियता थोड़ी कम हुई है लेकिन मैं पढने में बहुत सक्रीय थी और दरअसल में अपने ब्लोग्गर अकाउंट पर ज्यादा व्यस्त थी http://www.soni-teekhablo.blogspot.com बस इसलिए यहाँ समय थोडा कम दे पाई लेकिन अब दोनों जगह बेलेंस करने की कोशिश कर रही हूँ !

    soni garg के द्वारा
    July 14, 2010
    aditi kailash के द्वारा
    July 16, 2010

    अच्छा लगा जानकर कि आपने आजकल पढने के साथ-साथ फिर से लिखना भी शुरू कर दिया है…

    aditi kailash के द्वारा
    July 16, 2010

    आपकी साईट पर भी जरुर आयेंगे कभी…. इसी तरह लिखते रहिये….

subhash के द्वारा
July 11, 2010

kavita tarife kabil hai meri ekmatar shanka yahi hai ki jab aasman main chand ho to raat andheri nahin hoti

    aditi kailash के द्वारा
    July 11, 2010

    सुभाष जी, प्रोत्साहन के लिए शुक्रिया… आपने सही कहा जब आसमान में चाँद हों तो रात अँधेरी नहीं होती, पर यहाँ अँधेरी रात का तात्पर्य तन्हा रात से है….

rajkamal के द्वारा
July 11, 2010

ऐसा lagta ha ki nayika ki आँखों ki may me koi asar nahi hai … tabhi तो चाय की प्याली ka sahara lena pada …

    aditi kailash के द्वारा
    July 11, 2010

    लगता है इतने दिनों की सारी टिप्पणी आज ही लिख दी आपने….

rajkamal के द्वारा
July 11, 2010

खुद पे मत इतराना जब चाँद तुम्हे देख-२ शर्माए …. न होगी जब यह surat tab bhi हो ऐसी sirat की tab भी चाँद तुम्हे देख -२ कर शर्माए .. woh sadio से शर्माता है तुम बरसो तक इतराओगे …

    aditi kailash के द्वारा
    July 11, 2010

    बहुत अच्छे ख्यालात…. सूरत का क्या है, हमेशा तो एक जैसी नहीं रहती, सीरत ही है जो मायने रखती है… आदमी को अपनी सीरत नहीं बदलनी चाहिए….

    Biana के द्वारा
    May 25, 2011

    THX that’s a great aswenr!

    Makaela के द्वारा
    May 25, 2011

    With the bases loaded you struck us out with that anwser!

rajkamal के द्वारा
July 11, 2010

aap ko टॉप तें me aane ki tahedil se बधाई … यह सफ़र ऐसे ही जारी रहे … और करवा ऐसे ही चलता रहे …. वेसे में देरी se badhai देने के लिए sabhi se maafi mangta हु… aankh जब खुले तभी सवेरा होता hai …. कोई रौशनी की उम्र नहीं पूछता जब दूर अँधेरा होता है …

    aditi kailash के द्वारा
    July 11, 2010

    आपका आभार…. ये आप सभी पाठकों का स्नेह और प्रोत्साहन का ही नतीजा है….

    Ellen के द्वारा
    May 25, 2011

    What a joy to find such clear thinking. Thakns for posting!

rajkamal के द्वारा
July 11, 2010

mene वेसे तो कुछ काम की वजह से बाद में आना था …. जो की अभी तक भी ख़तम नहीं है हुआ … lekin आप और खुराना अंकल तो जानते है की मेरा एक दोस्त है … jo की मेरे लिए पैसे लेकर likhta है … to मेरे उस दोस्त के जागरण की टीम में संपर्क है …. उसी ne mujhe bataya की जागरण वाले मेरे बधाई sandesh के इंतज़ार में sabhi जितने वालोकी लिस्ट ko final karne se bethe है … तो इसलिए मुझको samay se pahle aana pada …

    aditi kailash के द्वारा
    July 11, 2010

    हमें तो उसके बारे में आपने कभी नहीं बताया…. आपने ये खबर पहले बताई होती, कुछ लोगों का तो भला हो जाता….

rajkamal के द्वारा
July 11, 2010

mein तो यह समझा था की आप अब नहीं आएँगी …. लेकिन आप न केवल आई … बल्कि पहले से भी ज्यादा chai .. हमारी तरफ से भी बधाई …

    aditi kailash के द्वारा
    July 11, 2010

    आपका आभार…. हम क्यों नहीं आते…. पता नहीं लोगों को ऐसा क्यों लगा….

anamika के द्वारा
July 10, 2010

जितनी भी तारीफ़ की जाय कम है ……..शब्दों की गहराई देखते बनता hai

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    आपके प्रोत्साहन से मन खुश हो गया…. इसी तरह अपना स्नेह बनाये रखिये… आपका आभार…

    Rangle के द्वारा
    May 25, 2011

    I feel so much happier now I udnrestand all this. Thanks!

rkpandey के द्वारा
July 9, 2010

लाजवाब कविता! तारीफ क्या करूं पहले ही लोगों ने कर रखी है.

    aditi kailash के द्वारा
    July 9, 2010

    पाण्डेय जी, आपका आभार…. औरों ने अपने शब्दों में की है, आप अपनी भावनाएं अपने शब्दों में व्यक्त कर ही सकते है… अच्छा लगेगा आपके विचार जानकर….

allrounder के द्वारा
July 9, 2010

मैं तुमसे कहूँगा इस बात को अगर तुम, जरा घुमा फिरा के कहती, जरा और सजा के कहती तो अच्छा होता !

    ilovepoetry के द्वारा
    July 9, 2010

    Aditi ji, Your “post your comment” option is not working, so i am writing here. Very nice poem, contains both happy as well as sad feelings. congratulations to you for making a berth in Top Ten and i am sure you are only the blog star, so congrats in advance.

    aditi kailash के द्वारा
    July 9, 2010

    तो मै भी कहूँगी सीधी बात में जो मजा है क्लिष्ट शब्दों में कहाँ हैं तो कैसा होगा

    aditi kailash के द्वारा
    July 9, 2010

    Dear sir/mam Thanks for ur encouragement…. really it means a lot to me… Thanks also due for ur good wishes …..

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
July 9, 2010

सुन्दर अभिव्यक्ति अदिति जी ………… // पर चाय की प्याली डूबकर किसे नीद आएगी, कृपया अन्यथा न लें…. //

    aditi kailash के द्वारा
    July 9, 2010

    शैलेश जी, आपका आभार…. सही समझा आपने, तभी तो हम रात भर जागा करते हैं….

vats के द्वारा
July 8, 2010

खूबसूरत अंदाज ………….मन और चित्त दोनों को मदहोश करने वाली रचना. वाकई स्टार कहना गलत नहीं होगा आपको.

    aditi kailash के द्वारा
    July 8, 2010

    वत्स जी, धन्यवाद… आपको हमारा अंदाज और रचना पसंद आई….. ये आपका बड़प्पन है, वरना स्टार तो यहाँ सभी हैं….

nitin sinha के द्वारा
July 8, 2010

अदिति जी! बहुत ही खुबसूरत अंदाज से आप ने रात और अपने चाँद के बारे में लिखा है| ये आप दोनों का साथ अच्छा लगा| बेहद खुबसूरत पंक्तिया|

    aditi kailash के द्वारा
    July 8, 2010

    नितिन जी, आपके स्नेह और प्रोत्साहन के लिए आभार…. आपको कविता अच्छी लगी, जानकर ख़ुशी हुई की हमारी मेहनत सफल हुई…

sumityadav के द्वारा
July 8, 2010

बहुत सुंदर कविता अदितीजी। रात के साथी चांद और उसके साथ बीतने वाले पलों का खूबसूरत तरीके से वर्णन किया। हम भी इस चांद के साथ बहुत खूबसूरत पल बिताते हैं लेकिन शब्दों में बयां नहीं कर पाते। लगता है आज रातभर फिर इस चांद को एकटक निहारना पड़ेगा। शायद मुझे भी कुछ सूझे।

    aditi kailash के द्वारा
    July 8, 2010

    अपने और चाँद के रिश्तों को बयां करने की बस हमारी एक छोटी सी कोशिश थी ये…. आप भी कोशिश कीजिये…. रातभर चाँद को एकटक निहारते हुए देखिएगा कहीं चाँद शरमा ना जाये…

राजेश, भागलपुर के द्वारा
July 8, 2010

दुश्मन है मेरी सुबह की किरणें कर देती है हम दोनों को जुदा फिर रात मिलन का वादा लेकर मेरा चाँद छुप जाता है कहीं बादलों में व़ाह ! क्‍या बात ! क्‍या बात ! क्‍या बात !  अच्‍छी कविता लिखी है आपने गुनगुनाने लायक।

    aditi kailash के द्वारा
    July 8, 2010

    राजेश जी, आपके स्नेह और प्रोत्साहन के लिए आपका आभार…

Ramesh bajpai के द्वारा
July 8, 2010

हँसते हैं, गाते हैं और गुनगुनाते हैं और कभी-कभी शरमाते भी हैं बिता देते हैं हम सारी रात यूँ ही एक दूजे की बातों में……    अदिति जी सुंदर अभिव्यक्ति

    aditi kailash के द्वारा
    July 8, 2010

    रमेश जी, आपके स्नेह और प्रोत्साहन के लिए आभार…..

Tufail A. Siddequi के द्वारा
July 8, 2010

सुन्दर कविता.

    aditi kailash के द्वारा
    July 8, 2010

    आपको कविता पसंद आई, आपका आभार सिद्दकी जी…

kmmishra के द्वारा
July 8, 2010

कविता तो बेहद खूबसूरत है लेकिन जरा इनसे पूछिये कि ये कृष्ण पक्ष में कहा तफरी करते रहते हैं । आभार ।

    aditi kailash के द्वारा
    July 8, 2010

    मोहन जी, कविता पसंद आई, आपका आभार… कृष्ण पक्ष में, मैं और मेरा चाँद, फ़ोन और चैटिंग से ही काम चला लेते हैं… नए ज़माने लोग हैं हम दोनों…

    Cheyanne के द्वारा
    May 25, 2011

    Cool! That’s a cleevr way of looking at it!

Deepak Jain के द्वारा
July 8, 2010

बेहतरीन कविता

    aditi kailash के द्वारा
    July 8, 2010

    आपके स्नेह और प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद् दीपक जी ….

chaatak के द्वारा
July 7, 2010

आपके ‘अंदाज़’, आप की ‘बातें’ और ‘चाँद’ के साथ आपका ये प्रेम, सोचता हूँ क्या कहूँ, ‘शायरा’, ‘अदिति’ या फिर ‘चकोरी’ || बेहतरीन कविता, खूबसूरत अंदाज़, बधाई हो ! (मेरी मिठाई भूल न जाना ?)

    aditi kailash के द्वारा
    July 8, 2010

    चातक जी, आपने जो ‘शायराना अंदाज’, ‘अदिति की बातें’ और ‘चाँद की चकोरी’ की बात कहीं, बहुत अच्छी लगी, वैसे आपके ‘शायराना अंदाज’ भी कुछ कम नहीं हैं….. आपको हमारी चाँद से बातें पसंद आई, आपका आभार…. (कौन सी मिठाई की बात कर रहे हैं आप?)

    chaatak के द्वारा
    July 8, 2010

    जी मैं आपके ब्लॉग-स्टार बनने की मिठाई की बात कह रहा हूँ शायद आपने मेरी कविता पर दिए गए अपने कमेन्ट का जवाब नहीं पढ़ा | मैं यहीं पे अपना पता लिख दूंगा और साथ में तारीख भी डालूँगा फिर ब्लॉग भी लिखूंगा कि बेचारा एक पक्षी मिठाई मांगते-मागते थक गया फिर भी नहीं मिली |

    aditi kailash के द्वारा
    July 8, 2010

    चातक जी, ये तो आपका स्नेह है जो आप हमें ब्लॉग-स्टार के रूप में देखते हैं, पर अन्य उम्मीदवार भी किसी से कम नहीं है…. रिज़ल्ट तो आने दीजिये, फिर मिठाई भी मिल जाएगी, हमसे नहीं तो किसी और से….. वैसे चलिए चाहे कोई भी जीते हम आपको मिठाई जरुर खिलाएंगे… अपना नाम पता जरुर भेज दीजिये…

Nikhil के द्वारा
July 7, 2010

अछि कविता, प्रेम और विरह दोनों का बहुत सुन्दर चित्रण किया है आपने. बधाई.

    aditi kailash के द्वारा
    July 8, 2010

    आपको कविता पसंद आई, धन्यवाद निखिल जी….

R K KHURANA के द्वारा
July 7, 2010

प्रिय अदिति, विरहन मन की एक अच्छी प्रस्तुती ! हाँ मैं एक बात पूछना चाहता था की आपके ब्लाग पर यह रंग बिरंगा फाँट कैसे आ जाता है ! तथा फाँट का साईज भी बड़ा हो जाताहै ! इसका क्या तरीका है ? धन्यवाद् राम कृष्ण खुराना

    aditi kailash के द्वारा
    July 7, 2010

    चाचाजी, प्रतिक्रिया के लिए आभार… तरीका ये है कि आप अपनी रचना टाइप कर visual, जो कि HTML के साथ ही है, क्लिक करें, वहां text कलर का आप्शन है…. फ़ॉन्ट साइज़ वहीँ है, हमने उसमें कोई बदलाव नहीं किया है…. उम्मीद है इस जानकारी से आपकी जिज्ञासा समाप्त हुई होगी और आपकी परेशानी का हल मिल गया होगा….


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