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आखिर जागरण मंच की एकता काम आ ही गई (लेख)

Posted On: 24 Jun, 2010 Others,न्यूज़ बर्थ में

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कल का दिन हमारी जिंदगी में एक अलग सा अनुभव लेकर आया…कल जब हमने अपनी पोस्ट पर आई प्रतिक्रियाओं का जवाब देने जागरण मंच का द्वार खोला ही था कि हमारी नजर सीमा जी कि प्रतिक्रिया पर पड़ी….उसे पढ़कर एक पल तो लगा मानो हमारी सांस ही ना रुक गई हो, बात ही कुछ ऐसी थी….सीमा जी ने हमें बताया कि किसी चोर ने हमारी एक रचना चुरा ली और उसे अपने ब्लॉग पर अपने नाम से ज्यों का त्यों पोस्ट कर दी है ….. उन्होंने ब्लॉग का लिंक भी दिया था….

उस लिंक पर क्लिक करते ही हमें लगा मानो हमारी कोई बहुमूल्य चीज गुम हो गई हो… वहां हमने अपनी रचना किसी और के नाम से पोस्ट की हुई देखी…. एक लेखक के लिए उसकी रचना का मोल क्या होता है ये तो सभी ब्लोगर जानते ही हैं…. रचना एक बच्चे की तरह होती है, जिसे हम अपने विचारों से सींच कर पालते-पोसते है और बड़ा करते हैं और जैसे ही ये परिपक्व हो जाती है, उसे इस समाज रूपी मंच पर जीवन की जंग लड़ने भेज देते हैं….अब अगर कोई हमारे बच्चे का अपहरण कर ले तो कैसा लगेगा, ठीक वैसा ही लग रहा था हमें……

हमने और सीमा जी ने उस चोर के ब्लॉग पर कमेन्ट लिखकर उससे कहा भी कि वो हमारी पोस्ट वहां से हटा लें…. पर उसने पोस्ट तो नहीं हटाई, हाँ हमारी कमेंट्स जरुर हटा दी, डिलीट कर दी वहां से….. हमने मेल भी किया पर कोई जवाब नहीं आया…

ये सब देखकर मन बहुत ही बेचैन हो गया था…किसी काम में मन नहीं लग रहा था…इस मंच पर शायद कम लोगो को ही पता होगा कि हमारे घर में किसी को भी नहीं पता है कि हम ब्लॉग लिखते हैं…. और इस मुश्किल की घड़ी में हम काफी परेशान हो गए थे, किसी से कुछ कह भी नहीं पा रहे थे…आखिर रहा नहीं गया तो हमने खोला अपना लैपटॉप और मदद की गुहार लगा दी इस मंच पर….

और जैसा कि हमें उम्मीद ही नहीं, पूरा विश्वास था कि हमें मदद जरुर मिलेगी, हमें मदद मिली भी…. और इतना अच्छा सहयोग मिला कि हमारा दुःख यूँ ही आधा हो गया…सभी ने अपने अपने बहुमूल्य सुझाव दिए…कई लोगों ने उस ब्लॉग पर जाकर उस चोर को लताड़ा भी और कईयों ने मेल पर उसे धमकाया भी….. और ये जंग आधी रात तक यूँ ही चलती रही….. और आखिर में हम सब की एकता की ताकत के आगे बुराई हार ही गई, अरे भाई उस चोर ने आधी रात के बाद अपने ब्लॉग से इस मंच की रचनाएँ हटा ली… तो अब हम खुश हैं और आप सभी भी खुश हो जाइये…..

आखिर जागरण मंच की एकता काम आ ही गई…. आप लोगों को ये जानकर ख़ुशी भी होगी कि उस चोर ने चोरी की तीन रचनाओं में से सिर्फ जागरण मंच की रचनाएँ ही हटाई है, जबकि किसी और ब्लॉग की रचना अभी भी वहां हैं…… जिससे ये भी साबित हो ही गया कि ये अपना जागरण जंक्शन परिवार कमजोर नहीं है….. इस मंच पर यहीं बात तो सबसे अच्छी लगती है कि एक प्रतियोगिता में भाग लेते समय लोग वैसे तो एक दुसरे के प्रतिद्वंदी बन जाते हैं, पर जरुरत में हर कोई साथ होता है….और किसी एक का दुःख सबका होता है….ये मंच एक परिवार ही है….और भगवान से यहीं प्रार्थना है कि सभी के बीच ये स्नेह हमेशा बनाये रखे…

हम आप सभी के बहुत ही शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने हमारी परेशानी को अपनी परेशानी समझ कर साथ दिया और तब तक लड़ते रहे, जब तक कि बुराई हार ना जाये… सबसे पहले हम सीमा सचदेव जी का शुक्रिया अदा करना चाहेंगे, जिन्होंने एक जागरूक ब्लोगर का फ़र्ज़ निभाया….. अगर वो नहीं बताती तो शायद हमें पता भी नहीं चलता इस चोरी के बारे में …… हम चातक जी, राजकमल जी, चाचाजी, निखिल सिंह जी, अजय जी, निखिल झा जी, संतोष जी, आशुतोष जी, दीपक जी तथा अन्य सभी लोगों के तहे-दिल से शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हमारी समस्या के बारे में सोचा और अंत तक लगे रहे, जब तक कि सफलता नहीं मिल गई….

आज तो हम सभी ने अपनी एकता के बल पर ये जंग जीत ही ली…..पर हम सभी को अभी कुछ काम और करने होंगे….हमें इस समस्या का कोई ठोस उपाय सोचना पड़ेगा ताकि भविष्य में इस मंच पर किसी के भी साथ इस घटना की पुनरावृत्ति ना हो और ये समस्या जड़ से ही ख़त्म हो जाये…. तो चलिए मिलजुल कर कुछ सोचे…

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83 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Heaven के द्वारा
May 25, 2011

AKAIK you’ve got the asnwer in one!

praveer के द्वारा
November 25, 2010

कुछ दिनों पहले ही करीब १ महीने बाद मैं अपनी कर्मभूमि में वापस लौटी थी. एक दो दिन बाहर खाना खा कर बोर हो गई तो सोचा बाज़ार जाकर जरुरत का कुछ सामान ले आऊं. जूट की थैली हाथ में लिए, अपनी स्कूटी पर सवार हो निकल पड़ी बाज़ार की ओर. किराने की दुकान में घुसते ही लगा की आज फिर दुकान वाला हमें, हमारे ना चाहते हुए, अपनी लाल, पीली, हरी, नीली पॉलीथीन की थैलियाँ थमा देगा. पर ये क्या, आज तो माहौल कुछ बदला- बदला नजर आ रहा था. दुकान वाला हमे कागज के लिफाफों में सामान दे रहा था. हमें अन्दर से बहुत ख़ुशी हुई, पर दुकान वाले से हमने कुछ पूछा नहीं और आगे बढ़ चले सब्जी मंडी की ओर. यहाँ का दृश्य देखकर तो हमारी हंसी ही छुट गई. कोई अपने बड़े रुमाल में सब्जी ले रहा था, तो कोई अपने आँचल में सब्जी संजो रहा था. दुकान वाले भी हमें कागज की थैलियों में सब्जी दे रहे थे. आखिर हमसे नहीं रहा गया तो हमने एक सब्जी वाले से पूछ ही लिया कि आखिर माजरा क्या है. हमारी बात सुनकर वो हमे यूँ देखने लगा मानो हमने उसकी सारी संपत्ति छीन ली हो और मुहं बनाते हुए बोला कि मैडम जी आपको पता नहीं है नगर पालिका ने पॉलीथीन कि थैलियों को बैन कर दिया है. उसकी बातें सुनकर दिल में आया कि उसे सब्जी के दुगुने पैसे दे दूँ. सोचकर ख़ुशी हुई कि चलो देर से ही सही आखिर हमारे छोटे से नगर के कर्ता-धर्ताओं कि नींद तो खुली और उन्होंने इस पर्यावरण में जहर घोलती पॉलीथीन के उपयोग पर रोक तो लगाई. पर क्या ये सफल हो पायेगा, राम भरोसे है. हम सब की कहानी इंसान ने अपनी सुविधाओं के लिए हमेशा से कई ऐसी चीजे बनाई हैं, जो कुछ सालों बाद उसके ही जी का जंजाल बन गये है, पॉलिथीन की थैलियाँ भी उनमे से ही एक हैं. ये लाल, पीली, हरी, नीली थैलियाँ आपकों हर जगह दिखाई देंगी, चाहे वो किराने वाले की दुकान हो, बड़े-बड़े सुपरबाज़ार हों, सब्जी मंडी हों या छोटा सा पान का ठेला. ये थैलियाँ जहाँ हमारे पर्यावरण के लिए घातक हैं, वही हमारे स्वास्थ्य पर भी इनका बुरा असर पड़ता हैं. आज का पढ़ा लिखा इंसान सब कुछ जानते हुए भी आँख मूंदकर इनका बेहिसाब इस्तेमाल कर रहा है. क्या है पॉलिथीन पॉलीथीन एक पेट्रो-केमिकल उत्पाद है, जिसमें हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल होता है। रंगीन पॉलीथीन मुख्यत: लेड, ब्लैक कार्बन, क्रोमियम, कॉपर आदि के महीन कणों से बनता है, जो जीव-जंतुओं व मनुष्यों सभी के स्वास्थ्य के लिए घातक है। कितनी घातक हैं ये पॉलिथीन की थैलियाँ मिटटी को खतरा ये पॉलिथीन की थैलियाँ जहाँ हमारी मिटटी की उपजाऊ क्षमता को नष्ट कर इसे जहरीला बना रही हैं, वहीँ मिटटी में इनके दबे रहने के कारण मिटटी की पानी सोखने की क्षमता भी कम होती जा रही है, जिससे भूजल के स्तर पर असर पड़ा है. सीवरेज की समस्या सफाई व्यवस्था और सीवरेज व्यवस्था के बिगड़ने का एक कारण ये पॉलीथीन की थैलियाँ हैं जो उड़ कर नालियों और सीवरों को जाम कर रहीं हैं. स्वास्थ्य पर खतरा पॉलीथीन का प्रयोग सांस और त्वचा संबंधी रोगों तथा कैंसर का खतरा बढ़ाता है। इतना ही नहीं, यह गर्भस्थ शिशु के विकास को भी रोक सकता है. पर्यावरण को खतरा प्लास्टिक और पॉलीथीन पुनः चक्रित हो सकते हैं पर इसे पूरी तरह खत्म होने में हज़ारों वर्ष लग जाते हैं. इसी कारण हमारी जमीन और नदियाँ, हमारे द्वारा उपयोग की गई इन पॉलीथीन की थैलियों से अटी पड़ी हैं. जब ये पॉलीथीन कचरे के ढेर के साथ जलाये जाते हैं, तब इनसे जहरीली गैसे निकलती हैं. इतना ही नहीं इनसे निकलने वाला धुआं ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचा रहा है, जो ग्लोबल वार्मिग का बड़ा कारण है. जानवरों को खतरा ये थैलियाँ जहाँ मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेय है, वहीँ थल व जल में रहने वाले जीव-जंतुओं के जीवन को भी खतरे में डाल रहीं है. पशुओं के द्वारा खा लेने पर ये उनके पेट में जमा हो रही हैं और उनकी जान के लिए खतरा बन रही है. हर साल इन थैलियों को खाकर लाखों जानवर मारे जाते हैं। कई जानवरों के पेट से ऑपरेशन कर करीब ५०-१०० किलो तक पॉलिथीन निकाली गई है. कैसे रोके ये खतरा bags # पॉलिथीन की थैलियों की जगह कपडे या जूट की थैलियाँ इस्तेमाल में लायें. # स्थानीय प्रशासन भी पॉलिथीन के उपयोग पर रोक लगायें और इसका कड़ाई से पालन करें. # पॉलिथीन देने वालों और लेने वालों दोनों पर जुर्माना किया जाये, जैसा की कुछ राज्यों में किया भी जा रहा है. नई पहल हिमाचल प्रदेश उत्तरी भारत का पहला राज्य है, जिसने पॉलीथीन कचरे से एक किलोमीटर से अधिक लंबी सड़क को पक्का करने के लिए उपयोग में लाया है. अभी तक हिमाचल प्रदेश में 1,381 क्विंटल पॉलीथीन कचरा एकत्रित किया जा चुका है. इस पॉलीथीन कचरे का उपयोग लगभग 138 किलोमीटर सड़क के निर्माण में किया जाएगा. ये एक बहुत अच्छी पहल है. जहाँ इससे ये पॉलीथीन कचरा उपयोग में आएगा, वहीँ हमारे गांवों को कुछ किलोमीटर सड़क मिल जाएगी. अन्य राज्यों को भी इससे कुछ सीख लेनी चाहियें. कानून बनते हैं और टूटते हैं, लेकिन पर्यावरण को बचाने और उसकी देखभाल का जिम्मा हम सब के ऊपर है। सरकार तब तक बहुत कुछ नहीं कर सकती, जब तक कि हम स्वयं ये दृढ संकल्प न ले ले कि आज से हम पॉलिथीन उपयोग में नहीं लायेंगे. यदि सभी लोग पॉलीथीन के खिलाफ जागरूक होकर अभियान छेड़ दें और इसका इस्तेमाल खुद ही त्याग दें, तो वो दिन भी जरुर आएगा जब किसी भी दुकान पर ये जहरीली थैलिया नहीं दिखाई देंगी. यदि आज हम पर्यावरण की देखभाल नहीं करेंगे तो वह दिन भी दूर नहीं जब इस दुनिया का अंत करीब आ जायेगा और हम सब सिर्फ हाथ मलते रह जायेंगे.

ashutosh के द्वारा
June 30, 2010

सबसे पहले टॉप १० में आने के लियी आपको बहुत – बहुत बधाइयाँ / अदिति जी आरे यार कहा हो /// cheers!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

    razia mirza के द्वारा
    June 30, 2010

    ढेरों बधाईयाँ अदितीजी। कहाँ हो?

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    आशुतोष जी, आपका धन्यवाद… कुछ जरुरी काम से बाहर गए थे….नेट पर नहीं आ पाए… आपके स्नेह के लिए आभार…..

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    रज़िया जी, आपका धन्यवाद और आपको भी बधाइयाँ.… कुछ जरुरी काम से बाहर गए थे….नेट पर नहीं आ पाए इन दिनों.…

विवेक के द्वारा
June 29, 2010

आप बुरा माने या भला । लेकिन मुझे लग रहा है कि चोरी करवाई गई या ऐसा माहौल बनाया गया कि लगे चोरी हुई है । ताकि प्रचार पाया जा सके । इसका कारण ब्‍लॉग स्‍टार कांटेस्‍ट भी हो सकता है । क्‍योंकि तथाकथित चोर महाशय का ब्‍लॉग है ही नहीं । यदि वास्‍तव में वह नौसिखिया ब्‍लॉगर थे तो फिर ब्‍लॉग कैसे हटाया । और यदि महारथी थे तो फिर संभव है किसी के इशारे पर ऐसा किया हो । चोर महाशय इतने ईमानदार है कि आपके ब्‍लॉग पर आकर माफी मॉंगते हैं । लेकिन दूसरे चुराये गए ब्‍लॉगों के लेखकों से नहीं । स्‍पष्‍ट है कि दाल में कुछ काला है । संशय और शक किसी और ही इशारा कर रहे हैं ।

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    विवेक जी, सबसे पहले तो आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार…. जब हमने कोई गलत काम किया ही नहीं तो हमें बुरा क्यों लगेगा…शायद आप इस मंच पर नए हैं, इसलिए आपके मन में इस तरह का सवाल आया…. तो आपको लगता है कि हमने प्रचार पाने के लिए ये चोरी करवाई, तो इसका जवाब है ….. १. प्रचार पाना होता तो ये हम कांटेस्ट ख़त्म होने से पहले करते ना कि बाद में (और आपको पता नहीं है शायद कि कांटेस्ट १५ जून को ही ख़त्म हो गया है)…. २. हमें प्रचार पाने के लिए ऐसे सस्ते हथकंडे अपनाने कि जरुरत नहीं हैं (ये हम समय आने पर बता देंगे कि हमारे पास प्रचार के क्या-क्या साधन उपलब्ध थे और जिनका हमने उपयोग नहीं किया)… ३. अगर वो ब्लॉग नहीं है तो उसने अपना ब्लॉग डिलीट कर दिया होगा, ये बहुत ही आसान होता है… ४. चोर महाशय ने अगर सिर्फ हमारे ब्लॉग पर ही माफ़ी मांगी और अन्य पर नहीं, क्योंकि विरोध भी सिर्फ हमने ही किया था सचिन जी ने नहीं, उन्होंने तो तो अपना ब्लॉग वहां देखा भी नहीं…. आप शायद जानते होंगे माँ भी अपने बेटे को तब तक दूध नहीं पिलाती जब तक उसे भूख से उसके रोने कि आवाज़ नहीं सुनाई देती…. उम्मीद है अब आपको दाल काली नहीं पीली ही दिखाई दे रही होगी…. और अगर इसके बाद भी आपको वर्नान्धता हों तो हम कुछ नहीं कर सकते…

rkpandey के द्वारा
June 29, 2010

नमस्कार अदिति जी, एक ब्लॉग स्टार को मेरी बधाई स्वीकार हो!  मंच के सर्वाधिक सक्रिय ब्लॉगर का अवार्ड भी आपको ही मिलना चाहिए. आप ने अपनी कलम की ताकत से आखिरकार यह मुकाम हासिल कर ही लिया. मुझे आशा है कि भविष्य में भी आपके रोचक, तेजतर्रार और रचनात्मक विचारों से साक्षात्कार होता रहेगा. एक नौसिखुआ लेखक

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    पाण्डेय जी, नमस्कार.. आपकी बधाइयों के लिए आभार…. हम भी अभी सीख ही रहें हैं, इसी मंच से ही अपना लेखन शुरू किया है हमने…. आपने हमें इस काबिल समझा इसके लिए हम आपके पुनः आभारी हैं… आप लोगों का यहीं स्नेह और प्रोत्साहन हमें अच्छा लिखने के लिए प्रेरित करता है…. उम्मीद है भविष्य में भी आपका इसी तरह स्नेह मिलता रहेगा… और हम भविष्य में भी आपकी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे…

sumityadav के द्वारा
June 28, 2010

टॉप-10 में आने के लिए बहुत बहुत बधाई अदितीजी आपकी मेहनत रंग लाई। U DESERVE DAT. CONGRATS

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    सुमित जी, आपके स्नेह और प्रोत्साहन के लिए हम आभारी हैं…… ये आप सभी लोगों के स्नेह का ही फल है….

nikhil के द्वारा
June 28, 2010

अदिति जी टॉप १० में शामिल होने पर हार्दिक बधाई …और शुभकामनाये ….

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    nikhil ji, thank you, very much……

allrounder के द्वारा
June 28, 2010

अदितिजी, NO 1 पर आने के लिए आपको बहुत – बहुत बधाई ! ( टॉप – 10 की लिस्ट मैं आप का नाम सबसे ऊपर जो है ) आपको, और मेरे सभी साथियों को जो, अंतिम १० मैं शामिल किये गए हैं, मेरी तरफ से हार्दिक बधाई, और आगे के लिए Good Luck !

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    सचिन जी, आपकी बधाई के लिए आभार…. चलिए लिस्ट में ही सही हम no 1 तो हैं कहीं…. देर से ही सही, पर आपको भी बधाइयाँ और शुभकामनायें……..

Arvind Pareek के द्वारा
June 28, 2010

सुश्री अदिति जी, इतना कुछ हो गया और मैं कुछ कह व कर ना सका । इसका अफसोस है । लेकिन क्‍या करता जब कुछ समय के लिए इंटरनेट से अवकाश जो लिया हुआ था । खैर परिवार की एकता ने कुछ असर किया यही अच्‍छा है । उससे अच्‍छा है चोर का चोरी के स्‍थान पर लौट कर क्षमा मांगना । लेकिन इससे आपको एक बात तो अवश्‍य सीखने को मिली होगी कि अपने परिवार से कुछ भी ना छिपाए । चाहे वह आपका स्‍वयं का परिवार हो या जागरण ब्‍लॉग का परिवार । अपने स्‍वयं के परिवार का साथ यदि आपको मिलेगा तो निस्‍संदेह आप और उंचाई छ़एंगी । अरविन्‍द पारीक

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    अरविन्द जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार…. हमें पता है आपका स्नेह हमेशा हम सभी के साथ है, इसलिए अफ़सोस की कोई बात नहीं हैं… मैं भी कुछ दिनों से नेट से दूर थी, इसलिए समय पर आपको बधाई नहीं दे पाई, आपको इस प्रतियोगिता में इतना महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करने हेतु बधाइयाँ….. रही परिवार को बताने की बात, तो वो भी हम जल्द ही कर देंगे, सही समय तो आने दीजिये….

http://jarjspjava.jagranjunction.com के द्वारा
June 26, 2010

अदिति जी धन्यवाद एवं लख-लख बधाइयाँ!! -with regards, http://jarjspjava.jagranjunction.com

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    निखिल सिंह जी, आपके स्नेह और प्रोत्साहन के लिए हम आभारी हैं……

blog chor के द्वारा
June 25, 2010

मै पूरे बलाग परिवार से माफी मागता हु मै बहुत शमिदा हू study के साथ ब्लॉग लिखने कि कोशिश की मै नया बलागर हू आखिर गलती तो इन्शान से ही होती हैं मुघे उममिद हैं की नए ब्लॉगर सहायता करेंगें मै भाविस्व मे मै अपनी पोस्ट ही लिखूगा और मै जागरण मंच से जुडना चाहुगा अगर सभी की इजाजत हो तो परतिकिरया इसी comment कालम मे दीजिए please मै बहुत शमिदा हू

    Manoj के द्वारा
    June 25, 2010

    अरे देखिए सुबह का भुला शाम को लौट आया है चलो माफ कर दो जनाब को.आखिर माफ करना ताकतवर का आभूषण होता है.

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    मुकेश जी, इंसान को अगर अपनी गलती समझ आ जाएँ और उसे सुधारने का प्रयास करें, तो उसे गलती नहीं कही जाएगी…… आपका माफ़ी वाला मेल भी मिला…… हमने तो आपको उसी दिन माफ़ कर दिया था जब आपने अपने ब्लॉग से चोरी की पोस्ट हटा ली थीं…. अब बस हम यहीं कहना चाहेंगे कि आगे से इस बात का जरुर ध्यान रखें कि सफलता का कोई शोर्ट कट नहीं होता और इस तरह कि गलती न दोहराएँ… और अपने मन से हीनभावना दूर कर नई शुरुआत करें….

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    मनोज जी, सही कहा आपने, सुबह का भूला शाम को लौट आये तो उसे भूला नहीं कहते…. हमने तो मुकेश जी को कब का माफ़ कर दिया है….

sumityadav के द्वारा
June 24, 2010

अदितीजी, जागरण मंच की एकता ने आपको न्याय दिला ही दिया। वैसे भी जब उसको एक के बाद एक प्रवचन मिले होंगे तो सबक मिल ही गया होगा। मैंने भी उस लिंक पर जाकर देखा तो आपके  दोनों पोस्ट वहां से हटा दिए गए थे। जागरण जंक्शन जिंदाबाद। वैसे एक बात तो तय है कि आपकी रचनाएं तहलका मचा रही है तभी तो लोग उसे चुराने का कुप्रयास कर रहे हैं।

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    सुमित जी, ये बस आप पाठकों का प्यार है…. आपका आभार……

    Hannah के द्वारा
    May 25, 2011

    Thnkas for sharing. What a pleasure to read!

rajkamal के द्वारा
June 24, 2010

mene jo kavita likhi thi ki kar do chahe meri biwi rachna ka khun… wohi baaat apne bhi apne is lekh me kahi hai… ek lekhak apni rachna ka mata +pita dono hi hota hai… churane wale ko asli lekhak ka naam aadar ke saath dena hi chahie.. jiska ki woh haqdaar hai… aapko 786 va comment mene diya hai..me us parvardigar ka shukargujar hu iske liye..aapko bahut badhai… aap asal me hi koi viragna hai.. aapki madad kar ke woh chahe mein hu ya koi aur -har kisi ne ek tarah se indirectly apni madad hi ki hai– aap par kisi ne koi ehsaan nahi kiya hai… khurana ji kal mujhko lage ki woh asal me hi bujurag hai… izzat ke kabil….purania gustakhia maaf… agli walo ke liya advance me maafi.. are bhai jinda hu to likhunga to hi kuch na kuch…

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    राजकमल जी, आपके स्नेह और प्रोत्साहन के लिए शुक्रिया…. 786 वाँ ही नहीं पहला कमेन्ट भी आप ही ने दिया था… और हमें विश्वास है हम जब तक लिखते रहेंगे आपका स्नेह इसी तरह मिलता रहेगा….. रही बात चोरी की तो हम बस यहीं कहना चाहेंगे कि हमने आपसे प्रेरणा ली थी, जिसके लिए अब हम आपका धन्यवाद अदा करते हैं……. आपका पुनः आभार….

    Vinnie के द्वारा
    May 25, 2011

    TYVM you’ve solved all my porblems

Nikhil के द्वारा
June 24, 2010

ये हमारे मंच, जागरण मंच की जीत है….

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    निखिल भाई आजकल आप भी प्रतिक्रिया देने में कंजूसी करने लगे हो…..ईर्ष्या साफ़ झलकने लगी है…..टिप्पणी चाहिए तो दूसरों को भी टिप्पणी देनी पड़ेगी….

    Nikhil के द्वारा
    June 24, 2010

    कौन कहता है मैं प्रतिक्रिया नहीं देता.. जो लेख मुझे पसंद आता है सब पर प्रतिक्रिया देता हूँ… जो नहीं आता उसपर भी देता हूँ.. मैं तो प्रतिक्रिया देने मैं वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के करीब हूँ…

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    हम तो मजाक कर रहे थे…आपने तो दिल पे ले लिया……

    Nikhil के द्वारा
    June 24, 2010

    अरे बहिन कहेगी प्रतिक्रिया नहीं दी तो भाई को बुरा नहीं लगेगा….. हुंह

rajkamal के द्वारा
June 24, 2010

mein aap sabhi ke saath hu..hona bhi chahie … mere से जो भी करने को kaha जायेगा में उसको करने ki puri कोशिश karunga … भगवन न kare ki फिर कभी हम में से किसी को भी इस जेसी किसी बात का सामना करना पड़े… जब मेने यह मंच join kiya tha ..to iske rules को jaan kar mein दर गया था… लेकिन मुझको यह पता था की में कोई चाचा ग़ालिब का भतीजा नहीं हु… और एक to मेरी हर रचना में हमेशा hi sudhar की गुंजाईश rahti hai… दुसरे mera satar aabhi itna ऊँचा नहीं है की कोई मेरा शेयर churae… और agar फिर भी कोई चुरा लेता है तो में iske लिए भी tyaar था… mujko पता है की कभी न कभी तो मेरा स्तर उठेगा .. तब में सभी रचनाओ को सुधर लूँगा… तो इस तरह से में पहले दिन से ही मानसिक रूप से तयार हो कर आया था…

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    राजकमल जी, आपके साथ और सहयोग के लिए आभार…… अगर किसी को किसी की रचना अच्छी लगती है तो वह बेशक उसका प्रचार करें, पर असली लेखक को सम्मान देते हुए….उसे अपनी कहकर छापना तो चोरी ही कही जाएगी…..

subodh kant misra के द्वारा
June 24, 2010

आखिरकार सच की जीत हुई अदिति जी, बधाई स्वीकार करे!

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    सुबोध जी, आपका आभार……. बधाई का असली हकदार तो पूरा जागरण परिवार है…..

    Trish के द्वारा
    May 25, 2011

    Thanks for sharing. Always good to find a real exeprt.

razia mirza के द्वारा
June 24, 2010

अदिती जी बिल्कुल जागरन की एकता ही काम आ गई। आपने और सीमाजी ने सही कदम उठाया। अरे!!! उन लोगों में इतनी भी शर्म बची नहिं की दूसरों की रचनाओं को अपनी बनाने की कोशिश न करें? ये लोग तो जब रचना चूराते हैं तो और भी ना जाने क्या क्या चूरा लेते होंगे? चोर कहींके!!!!!!!!

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    रज़िया जी, आपके साथ और सहयोग का आभार…..

allrounder के द्वारा
June 24, 2010

अदितिजी, आपका बहुत – बहुत धन्यबाद ! आपके दिए हुए लिंक पर जाकर मैंने देखा की आपके साथ – साथ मेरी रचना मोबाइल की महिमा भी उस पोस्ट पर नहीं थी ! चूँकि मैंने अपनी रचना वहां देखि नहीं मगर आपने शायद देखी हो इसलिए आपने मुझे सूचित किया था ! मुझे अभी भी अपनी प्यारी रचना के चोरी होने की चिंता सता रही, आप मुझे confirm करने की कृपा करें की आपके साथ – साथ उस चोर ने मेरे रचना भी हटा दी है की नहीं !

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    सचिन जी, चिंता ना करें, हमारी रचना के साथ-साथ आपकी रचना भी वहां से हटा दी गई है….तो अब आपको भी इस जागरण मंच परिवार का शुक्रिया अदा करना चाहिए….

    allrounder के द्वारा
    June 24, 2010

    अदिति जी आप के कहे बगैर ही मैं सुबह से ही अपने जागरण परिवार का शुक्रिया अदा कर रहा हूँ ! आपके लेख के माध्यम से एक बार आप सभी का धन्यबाद ! रचना चोरी होने का दर्द क्या होता है ये आप समझ सकती हैं !

    rajkamal के द्वारा
    June 24, 2010

    mein aapki rachna ke chori hone aur us ke waha se raat ke ek baje dilite hone ka chasmdid hu … mujhko aapse puri hamdardi hai.. mene uske blog par ek laanat wala comment bhi diya tha.. aap sab ki khushi me hi meri bhi khushi hai… mujhko apne se kabhi bhi alag mat samjhna.. me aap sabhi ke saath हु… kabhi kisi vayang me aapka naam aa jaye to sachin ji bura mat manna.. me uske liye aap se advance me hi maafi maangta हु… aapka dost …aaj ham phir usi mod pe mile hai..jaha pahle mile the….

    allrounder के द्वारा
    June 25, 2010

    भाई राजकमल, आपके सहयोग का बहुत धन्यबाद आप सब लोगों के प्रयास से अदितिजी अपनी रचनाएँ उस साहित्य के बिल लादेन से आज़ाद करने मैं कामयाब रहीं ! इस बहाने मुझ गरीब की अपहृत रचना भी उस अपहरनकर्ता के चंगुल से मुक्त हुई ! रही पुरानी बातों की और मेरा नाम व्यंग में इस्तेमाल करने की तो इसके लिए हमें किसी की इज़ाज़त लेने या माफ़ी मांगने की आवश्यकता नहीं है, मैं और तुम और बाकी साथी सब एक ही परिवार के सदस्य हैं ! परिवार के लोगों मैं कभी – कभी मतभेद तो हो सकते हैं मगर मनभेद कभी नहीं होना चाहिए ! हमें यहाँ पर एक दुसरे पर किये हुए व्यंगों को सद्भावना से देखना चाहिए न की दुर्भावना से ! जहाँ तक प्रश्न मेरा है मेरे मन मैं अपने किसी भी साथी के लिए कोई दुर्भावना नहीं रहती, दूसरों की दूसरा जाने ! मैं जिस पर भी व्यंग करता हूँ, वो यहाँ मेरा मित्र ही है ! और तुम भी उनमें से एक हो ! एक बार फिर आप सभी महानुभावों का धन्यबाद !

    Tracen के द्वारा
    May 25, 2011

    You’re a real deep tihnekr. Thanks for sharing.

R K KHURANA के द्वारा
June 24, 2010

प्रिय अदिति, आपने ने कहा है की एक प्रतियोगिता में भाग लेते समय लोग वैसे तो एक दुसरे के प्रतिद्वंदी बन जाते हैं, पर जरुरत में हर कोई साथ होता है ! यहाँ पर मैं एक बात और कहना चाहूँगा की प्रतियोगिता को भी सभी लेखकों को इर्ष्या के भाव से लेना चाहिए “जलन” के भाव से नहीं ! इर्ष्या इस बात की होनी चाहिए की मैं भी अच्छा से अच्छा लिखूं और आगे बढूँ ! टांग खिचाई नहीं होनी चाहिए ! किसी से द्वेष भाव नहीं होना चाहिए ! यदि किसी की रचना अच्छी है तो उसे अच्छी ही कहा जाना चाहिए ! चाहे वो रचना किसी की भी हो ! बाकी जितने भी महानुभाव इस मचंह पर है सभी समझदार है ! किसी को ज्यादा कहने की आवश्यकता नहीं है ! आशा है मेरी बात को आन्यथा नहीं लेंगे ! धन्यवाद् ! राम कृष्ण खुराना

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    चाचाजी, हमने भी वो बात एक अच्छाई के रूप में ही लिखी थी…..प्रतियोगिता में आप ईर्ष्या रखिये, पर लेखक से नहीं अपितु उसके लेख से…..और फिर देखिये कैसे आपकी कलम भी निखर जाती है…..किसी की व्यक्तिगत टांग खिंचाई नहीं होनी चाहिए….

R K KHURANA के द्वारा
June 24, 2010

प्रिय अदिति बिटिया, आप ने ठीक कहा है की एकता में बल होता है ! पांच उँगलियाँ जब मिल कर एक मुठ्ठी बन जाती हैं तो उस मुष्ट प्रहार से कोइ दगाबाज नहीं बच सकता ! इस जागरण मंच का यही तो लाभ है और यही इसकी मर्यादा है ! यही इसकी ताकत है ! इस कार्य में हम हमेशा सबके साथ है और मिल कर हर समस्या का हल निकालेंगे ! यह हमारा वादा है ! सबके सहयोग से समस्या का समाधान हो गया यह अच्छी बात है ! सबको बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    चाचाजी, सही कहा आपने एकता में ही शक्ति होती है और इसका जीता-जागता नमूना तो हम सब ने कल देख ही लिया है…. आपके सहयोग और साथ के लिए आपका आभार…..

ashutosh के द्वारा
June 24, 2010

अदीति जी जो बल एकता में होता है वो और कहाँ है सभी उजर्स को यूनिटी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    साथ और सहयोग के लिए आपका भी आभार….

Manoj के द्वारा
June 24, 2010

अदिती जी यह जागरण जंक्शन के यूजरस की एकता का परमाण ही है जो कम्पिटीशन के बावजूद एक दूसरे की म्दद करते है. हालांकि आपके ब्ळोग और ऑलराउंडर जी के ब्ळोग की चोरी से कई सवाल खडे हो गए है अब जल्द ही जागरण को कोई उपाय करना चाहिए.

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    सही कहा मनोज जी, हम सभी को मिल कर कुछ सोचना होगा ताकि इस मंच पर इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति ना हो….

Chaatak के द्वारा
June 24, 2010

अदिति जी, आपका लेख जब कापी-कैट के ब्लॉग से नदारद दिखा तो दिली ख़ुशी सारे ही जागरण ब्लोगर परिवार को हुआ | जो एकजुटता देखने को मिली वो बेमिसाल थी | मैंने महसूस किया कि इस एकजुटता में हमने अपने लिए अनजाने में एक नाम खोज लिया ‘जागरण जंक्शन परिवार’ कमी सिर्फ एक बात की रही कि इस परिवार के आधे (मैं उन्हें अभिजात्य सदस्य कहूँगा) यानी जागरण ब्लॉग के सदस्यों की कोई मौजूदगी नहीं रही | सिर्फ रीडर ब्लॉग के सदस्य ही एकजुट थे| खैर कोई बात नहीं ! हम तो संगठित हैं | एक और दोहा याद आ गया | रहा नहीं जा रहा, लिख देता हूँ (व्यंग है कोई इसको सीरियसली मत लीजियेगा)- रहिमन विपदा की भली जो थोड़े दिन होय, हित अनहित या जगत में जान पडत सब कोय |

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    चातक जी, हम सब यहाँ एक परिवार की तरह ही तो हैं, जो अपना सुख-दुःख बांटते हैं ….आपका दोहा बिलकुल ही सटीक है…. आपने ये बात भी सही कही, इस अभिजात्य वर्ग की कमी कई बार खल जाती है…..हमने कल ही जागरण टीम को भी मेल किया था इस सम्बन्ध में, पर उधर से भी कोई जवाब नहीं आया…..कई बार जागरण मंच पर कई नए ब्लोगर की पोस्ट बहुत ही अच्छी होती है, पर ये अभिजात्य वर्ग हमेशा अपनी प्रतिक्रिया देने से कतराता है, जबकि होना ये चाहिए कि वो उभरते रचनाकारों को प्रोत्साहित करें…. एक दूरी सी कायम की गई है दोनों वर्गों के बीच….कई बार तो, या यूँ कहें हमेशा ही, जब उनके पोस्ट पर भी प्रतिक्रिया दें तो भी जवाब नहीं आता है… और फीडबैक पर भी जवाब नहीं मिलता है….बस चल रहा है किसी तरह…

    Luckie के द्वारा
    May 24, 2011

    That’s not just logic. That’s really snebisle.


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