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दो क्षणिकाएं (कविता)

Posted On: 21 Jun, 2010 Others में

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तेरे बिन
मै यहाँ हूँ, दिल वहाँ है
बिखरा बिखरा सा अपना जहां है
सपनों की इस दौड़ में खोये
अपने गुम जाने कहाँ हैं



तेरी याद
तेरी यादों के गुलदस्ते से
नन्ही कली जो
फूल बन मुस्काई
महका मेरा रोम रोम
हर अंग से
तेरी खुश्बू आई


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45 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Kaylea के द्वारा
May 26, 2011

That’s not just the best anewsr. It’s the bestest answer!

Easter के द्वारा
May 25, 2011

I thank you humbly for sahirng your wisdom JJWY

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 16, 2011

अदिति जी, बहुत देर से ब्लॉगर हुआ और इसीलिए बहुत देर से आपका ये लेख देख पाया. पता नहीं मेरी कमेन्ट आ पाए या न आ पाए मगर आपकी कुछेक पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगीं..भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति.. http://kashiwasi.jagranjunction.com

    Kapri के द्वारा
    May 25, 2011

    HHIS I sohlud have thought of that!

    King के द्वारा
    May 25, 2011

    Now I feel stupid. That’s claered it up for me

anamika के द्वारा
July 10, 2010

क्या बात है क्षण भर में भावुक बना दिया………..

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    स्नेह और प्रोत्साहन के लिए आभार…

rajkamal के द्वारा
June 22, 2010

काश की में शायर न हो कर कोई कवि होता …..

    aditi kailash के द्वारा
    June 24, 2010

    कोशिश करिए, आप भी लिख सकते हैं…..

parveensharma के द्वारा
June 21, 2010

too good… nice…. beautifull composition

    aditi kailash के द्वारा
    June 22, 2010

    Thank u very much for ur encouragement…….

manav के द्वारा
June 21, 2010

चार पंक्तियों में ही आपने सब कुछ कह दिया. सपनों के पीछे पागल हो कर इंसान अपनों से दूर होता जा रहा है. मानव

    aditi kailash के द्वारा
    June 22, 2010

    सही कहा आपने, ना ख़त्म होने वाली लालसाओं के जाल में फंसकर इंसान अपनों से दूर होता जा रहा है…… प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार…….

    Mande के द्वारा
    May 25, 2011

    That’s way more clever than I was expecting. Takhns!

manav के द्वारा
June 21, 2010

महका मेरा रोम रोम हर अंग से तेरी खुश्बू आई . बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ. आपको बधाई. मानव

    aditi kailash के द्वारा
    June 22, 2010

    मानव जी, ये उनकी यादों का असर है… आपका आभार….

vijai kaushal के द्वारा
June 21, 2010

very good! yaad ka bada kamal hai.

    aditi kailash के द्वारा
    June 22, 2010

    कौशल जी, आपका आभार…… इसीलिए तो कहते हैं उनसे अच्छी तो उनकी यादें हैं, जो जब चाहो तब आ जाती है…….

Chaatak के द्वारा
June 21, 2010

Nice composition !

    aditi kailash के द्वारा
    June 22, 2010

    Thanks for ur encouragement…..

    Randhil के द्वारा
    May 25, 2011

    Great cmoomn sense here. Wish I’d thought of that.

    Nibby के द्वारा
    May 25, 2011

    AKAIK you’ve got the asnewr in one!

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
June 21, 2010

good one…

    aditi kailash के द्वारा
    June 22, 2010

    Thanks for ur encouragement……

    Steffi के द्वारा
    May 25, 2011

    I’m not wrothy to be in the same forum. ROTFL

allrounder के द्वारा
June 21, 2010

अच्छी अभिव्यक्ति …………….. बधाई !

    aditi kailash के द्वारा
    June 22, 2010

    आपका आभार…..


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