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कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती (कविता)

Posted On: 16 Jun, 2010 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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बहुत दिनों से चाह रही थी कि आप लोगों को एक ऐसी रचना से रूबरू करवाऊं जो कि मेरे दिल के काफी करीब हैं और जिसे पढ़कर मुझे बहुत ही प्रेरणा मिलती है…… जब भी कोई काम मुझे बहुत मुश्किल लगता है या जिसे करने से पहले ही मन में एक डर सा रहता कि पता नहीं मै सफल हो पाऊँगी या नहीं….. मैं इस रचना की गोद में आ जाती हूँ….. इस रचना को पढ़कर मुझे इतना हौसला मिलता है कि मेरा सारा डर कहाँ जा कर छुप जाता है, पता ही नहीं चलता……

चूँकि ये रचना मेरे द्वारा रचित नहीं हैं, तो इसका क्रेडिट लेने का हक भी मेरा नहीं बनता है……एक अच्छे ब्लोगर होने के नाते मैं चाहूंगी कि सबसे पहले मैं आपको उस रचनाकार से मिलवाऊं …. ये रचना है हिंदी कविता के महान छायावादी कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की…..

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, जयशंकर प्रसाद और महादेवी वर्मा के साथ हिन्दी साहित्य में छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं…… उन्होंने कहानियाँ उपन्यास और निबंध भी लिखे हैं किन्तु उनकी ख्याति विशेषरुप से कविता के कारण ही है……..अपने समकालीन अन्य कवियों से अलग उन्होंने कविता में कल्पना का सहारा बहुत कम लिया है और यथार्थ को प्रमुखता से चित्रित किया है……….. वे हिन्दी में मुक्तछंद के प्रवर्तक भी माने जाते हैं…….. परिमल, गीतिका, द्वितीय अनामिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, बेला, नये पत्ते, अर्चना, आराधना, गीत कुंज और सांध्य काकली निराला जी के प्रमुख काव्यसंग्रह हैं……

मेरी पसंदीदा रचनाओं में से एक “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” निराला जी की एक बहुत ही सुन्दर और प्रेरणादायक रचना है……. शायद आप में से कई लोगों ने इसे पहले भी पढ़ा हो….और जिन्होंने नहीं पढ़ा है मैं चाहूंगी कि जरुर पढ़े…..जब भी भविष्य को लेकर मन में उहापोह की स्थिति होती है और मन बहुत विचलित होता है, ये कविता ही है जो मुझे हौसला देती है……और कार्य करने के लिए प्रेरित करती है…. आप भी पढ़िए और बताइयेगा जरुर की आपको ये रचना आपको कैसी लगी…..

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।

fire_ants02नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है ।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है ।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।


डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है ।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में ।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।

असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो ।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम ।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।

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40 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अमिताभ बच्चन के द्वारा
December 7, 2015

FB 1169 -एक बात आज स्पष्ट हो गयी ये जो कविता है ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ‘ ये कविता बाबूजी की लिखित नहीं है इस के रचयिता हैं सोहन लाल द्विवेदी …. कृपया इस कविता को बाबूजी, डॉ हरिवंश राय बच्चन के नाम पे न दें … ये उन्होंने नहीं लिखी है -अमिताभ बच्चन

अतुल त्रिवेदी के द्वारा
September 9, 2012

इस रचना का स्त्रोत देने का कष्ट करें सन्दर्भों के साथ तो आभारी होऊंगा

Gertrude के द्वारा
May 24, 2011

IMHO you’ve got the right awsenr!

aditi kailash के द्वारा
July 10, 2010

अनामिका जी, आपका आभार… समय मिलने पर आपके ब्लॉग पर भी आयेंगे…

    Melloney के द्वारा
    May 25, 2011

    Wow! That’s a really neat anwesr!

anamika के द्वारा
July 10, 2010

बहुत अच्छा लिखा है आपने ….मेरे ब्लॉग पर विसित करे….http//:anasameeksha.blogspot.com

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा के द्वारा
June 20, 2010

जिन्दा लोगों की तलाश! मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!! काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा। =0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0= सच में इस देश को जिन्दा लोगों की तलाश है। सागर की तलाश में हम सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे। हमें ऐसे जिन्दा लोगों की तलाश हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो, लेकिन इस जज्बे की आग से अपने आपको जलने से बचाने की समझ भी हो, क्योंकि जोश में भगत सिंह ने यही नासमझी की थी। जिसका दुःख आने वाली पीढियों को सदैव सताता रहेगा। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है। इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है। अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं। आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल- सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! अब हम स्वयं से पूछें कि-हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे? जो भी व्यक्ति इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :- (सीधे नहीं जुड़ सकने वाले मित्रजन भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से बचाव तथा निवारण हेतु उपयोगी कानूनी जानकारी/सुझाव भेज कर सहयोग कर सकते हैं) डॉ. पुरुषोत्तम मीणा राष्ट्रीय अध्यक्ष भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय 7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान) फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666 E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

seema के द्वारा
June 17, 2010

निराला जी की इस प्रेरणादायक कविता के लिए आभार

    aditi kailash के द्वारा
    June 17, 2010

    आपका आभार…

rajkamal के द्वारा
June 17, 2010

आपको मेरा लेख पड़ कर इतने दिनों के बाद एक पहेली का हल मिल गया…. अब एक और पहेली…आगे भी हमें इसी तरह अच्छी -२ रचनाओ का दर्शन करवाते रहे… जिस तरह इस बार लिखने वाले का नाम दिया है… अगली बार भी… एक और भावपूरण रचना का इंतज़ार रहेगा……

    aditi kailash के द्वारा
    June 17, 2010

    राजकमल जी, आभार….. आपकी पहेली का जवाब है कि अभी तक हमने अपनी ही लिखी रचना आप लोगो के सामने रखी है…. अब वहां अपनी तारीफ तो हम कर नहीं सकते थे ना…… ये पहली बार है और आगे भी अगर हम किसी और की रचना प्रस्तुत करेंगे तो जरुर आपको उसके बारे में बताएँगे…

MANOJ SINGH के द्वारा
June 17, 2010

KAVITA JI, THANK U VERY MUCH,I LOVE THIS POEM TOO MUCH.I WILL BE VERY GRATEFUL TO YOU .

    aditi kailash के द्वारा
    June 17, 2010

    मनोज जी, आपका आभार……आपने तो हमें कविता बना दिया…….खैर नाम में क्या रखा है….

rajkamal के द्वारा
June 16, 2010

आज मुझको जागरण की टीम की तरफ से मेरे द्वारा दिए गये असाधारन सहयोग के लिए मेरा धन्य वाद किया गया है…. अगर आपको भी आया हो तो बताना…. वेसे अगर और किसी को नहीं आया हो तो यह आप सब के लिए बहुत ही अच्छा होगा…. क्योंकि अगर आप सब में से किसी एक ने भी कह दिया की उसको भी मेल आया है तो में सारी मिठाई का ऑर्डर रद्द करवा दूंगा…..

    aditi kailash के द्वारा
    June 16, 2010

    हमने आज अपना मेल चेक नहीं किया है……..देखेंगे तब बताएँगे…अच्छा हमारी मिठाई कहाँ है…….

    Jeana के द्वारा
    May 25, 2011

    Kudos! What a neat way of tihnking about it.

kmmishra के द्वारा
June 16, 2010

जीवन का सत्य बताती है यह कविता । आभार ।

    aditi kailash के द्वारा
    June 16, 2010

    आपका आभार……..

allrounder के द्वारा
June 16, 2010

जिन्दगी के हर कदम पर प्रेरणा देती इस कविता को पुन्स्मरण कराने के लिए आप बधाई की पात्र हैं !

    aditi kailash के द्वारा
    June 16, 2010

    आपका आभार….

    Betsey के द्वारा
    May 25, 2011

    Now I feel sutipd. That’s cleared it up for me

Chaatak के द्वारा
June 16, 2010

इसमें कोई संदेह नहीं की निराला जी सचमुच निराले हैं, जरूरत है उन्हें गहराई से समझने की. निराला जी की इतनी प्रेरणादायक कविता जागरण पटल पर रखने का शुक्रिया.

    aditi kailash के द्वारा
    June 16, 2010

    चातक जी, आपका आभार……

Nikhil के द्वारा
June 16, 2010

निराला, दिनकर, मैथिलि शरण गुप्त जैसे कवी तो वर्णनातीत हैं. मैं भी अपने पसंदीदा कवी की कविता की चार पंक्तियों के साथ इस विषय पर आपकी आवाज़ मैं आवाज़ मिलाता हूँ. धरकर चरण विजित श्रृंगों पर झंडा वही उड़ाते हैं, अपनी ऊँगली पर जो खंजर के जंग छुडाते हैं. पड़ा समय से होड़, खिंच मत तलवों से कांटे रुक कर, फूंक-फूंक चलती न जवानी चोटों से बचकर, झुककर. आभार, निखिल झा

    aditi kailash के द्वारा
    June 16, 2010

    निखिल झा जी, काफी अच्छी पंक्तियाँ लिखी आपने…. आपका आभार….

    Sanne के द्वारा
    May 25, 2011

    At last, seomone comes up with the “right” answer!

    Robbie के द्वारा
    May 25, 2011

    IMHO you’ve got the right anewsr!


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