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नेट की लत मोहे ऐसी लागी...... हो गई मैं दीवानी (हास्य-व्यंग्य)

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net1क्या करूं ये इन्टरनेट की आदत ही ऐसी होती है….. एक बार अगर किसी को लग गई तो फिर आसानी से पीछा नहीं छोड़ती हैं…. और अगर आप किसी बड़े संस्थान में पढाई कर रहे हो, जहाँ चौबीसों घंटे नेट फ्री है और वहां आप को ये लत लग जाये, तो समझिये हो गई आपकी डिग्री…. हम भी ऐसे ही एक नामी संस्थान में पढाई कर रहे हैं …. लोगों का कहना है कि कुछ ही दिनों में हमारे नाम के आगे डॉक्टर जुड़ जायेगा…. लोग ऐसा क्यों कहते हैं, ये आज ही हमें समझ आया…. असल में हम अपने हॉस्टल के कमरे से बहुत कम बाहर निकलते हैं …. या यूँ कहे कि नेट की लत हमें बाहर निकलने नहीं देती तो सही होगा….. और लोगों को भ्रम होता है कि हम कमरे में दिन-रात रिसर्च कर रहे हैं… अब हम उन्हें कैसे समझाएं कि ये इन्टरनेट की लत हमारा दामन ही नहीं छोड़ती है…..

net 16हमने कई बार कोशिश की कि इस लत से पीछा छुट जाये…. क्या क्या न किया….पर कुछ भी काम नहीं आया……. और तो और इस लत के कारण गुमशुदा व्यक्ति कि तलाश में हमारा विज्ञापन भी आ गया है….. हुआ यूँ कि इस लत के चक्कर में हम रात भर जागते रहें और दिन भर सोते……(दिन में स्पीड स्लो जो होती है)…… ये क्रम कई दिनों तक चलता रहा ….. .इस चक्कर में हम ५ दिनों तक अपने गाइड से भी नहीं मिल पाए और ना ही अपना मोबाइल चार्ज कर पाए….. गाइड मोबाइल ट्राई करते रहे और जब ५ दिनों तक मोबाइल नहीं मिला तो संस्थान कि वेबसाइट के खोया-पाया (lost & found) कॉलम में हमारा नाम लिखवा दिया गया…… मिलने पर गाइड से हमें इतनी डांट पड़ी कि हम बता नहीं सकते हैं…… और गाइड से कैसे बचे हैं, ये तो हम ही जानते हैं……

net7इस घटना के बाद तो हमने कान पकड़ लिया कि अब नेट पर नहीं बैठेंगे……पर ये दिल है कि मानता नहीं….. नेट की खुमारी क्या होती है दिमाग जानता ही नहीं……दो दिन तक तो कठोर व्रत चला……पर तीसरे दिन ही दिल कुलबुलाने लगा……उंगलियाँ थिरकने लगी…… दिमाग को मनाकर सोचा सिर्फ और सिर्फ ई मेल ही चेक करेंगे……क्या पता किसी रिसर्च पेपर पर कमेन्ट ना आ गया हो (जो हमने बड़ी मेहनत से इधर-उधर से कॉपी-पेस्ट कर के बनाये थे, अब असली रिसर्च आजकल कौन करता है)….. फिर लगा, क्या पता कोई जरूरी ई मेल ना आ गया हो (जबकि हमें पता है कि ज्यादातर spam e-mail से ही अकाउंट भरा होता है)….. किसी तरह मन को मनाया और आ गए फिर से नेट की बांहों में …. पर आप ही बताइए नेट पर क्या कोई सिर्फ ई मेल चेक करता है…..५ घंटे कैसे बीत गए पता ही नहीं चला……

net18होश तो तब आया, जब याद आया कि कल हमें एक जरुरी प्रोजेक्ट जमा करना हैं…….. मरता क्या ना करता, रात भर उल्लू की तरह जागकर किसी तरह कामचलाऊ रिपोर्ट तैयार की……… सुबह गाइड कि गाली सुनी वो अलग…….. गाइड की डांट ने हमें अन्दर तक झकझोर कर रख दिया था…..अब तो हद हो गई थी…..आखिर हमारी भी कोई इज्जत है कि नहीं….बस फिर क्या था सोशल नेटवर्किंग कि साईट खोली और लगे पासवर्ड चेंज करने…. कोई भी १५-२० नम्बर और लेटर कुंजियाँ दबाई और एक कागज पर लिखकर फ़ेंक दिया अलमारी के ऊपर…..सोचा चलो बला टली……पर ये बला इतनी आसानी से कहाँ टलने वाली थी…….

net2दो दिन तो आराम से बीते…….तीसरे दिन श्रुति आ गई और लगी बताने कि सोशल नेटवर्किंग साईट पर क्या क्या नौटंकी चल रही है……किसने आज कौन से कपडे पहने……कौन आज किसके साथ घूमने गया……कौन कितने दिन से नहीं नहाया हैं…….और ना जाने क्या-क्या……उसकी बातें सुनकर हमें लगा, पता नहीं हम शायद चौदहवीं सदी में रह रहे हैं….. वो अपनी बकवास किये जा रही थी, पर सुन कौन रहा था…. मन में तो बस यहीं चल रहा था, कब वो जाये और कब हम नेट के जादू में खो जाएँ……. जैसे ही वो गई, हमने दरवाजा बंद किया और मेज़ पर चढ़कर लगे खोजने पासवर्ड वाला कागज………बड़ी मुश्किल से हमें वो कागज मिला…….उसे पाकर हमें लगा मानो दुनिया भर की ख़ुशी मिल गई हो…….

फिर नेट पर वही २-३ साईट का चक्कर लगाते लगाते ६ घंटे कैसे बीते पता ही नहीं चला…….. आँखे तो तब खुली जब कल होने वाले टेस्ट की याद आई……. अब इतने कम समय में इतनी सारी पढ़ाई कैसे करेंगे ये सोचते ही सारा गुस्सा उस पासवर्ड वाले कागज़ पर निकाला और उसके पच्चासों टुकडे कर फिर से फ़ेंक दिया अलमारी के ऊपर……….

net8रात भर आँखे जलाते हुए पढाई की और किसी तरह d ग्रेड से ही संतुष्ट होना पड़ा……. d ग्रेड के गम में ३-४ दिन किसी तरह मन को मारते हुए बिना नेट के हमने निकाल ही लिए…….. पर जैसे ही पता चला कि गाइड अगले १० दिन के लिए किसी कोंफ्रेंस में चीन जा रहें हैं, हमारी तो मानो बांछे ही खिल गई और हमारा सोया हुआ नेट प्रेम फिर से जाग उठा…..और मन गुनगुनाने लगा…. चले गए थानेदार, रे अब डर काहे का……. चले गए थानेदार, रे अब डर काहे का…..

net12ख़ुशी में गुब्बारे की तरह फूलते हुए हमने गूगल क्रोम पर क्लिक किया और खोल ली अपनी फेवरेट साईट…. पर ये क्या, पासवर्ड तो हमने बदल दिया था………पर हम भी इतनी आसानी से हार मानने वालों में से थोड़ी थे, नेट के पुराने खिलाडी जो ठहरे……. हमने पासवर्ड गुम हो गया विकल्प पर क्लिक किया….. जवाब आया- आप अपना सिक्यूरिटी प्रश्न और जवाब टाइप करें…… पर हाय रे हमारी फूटी किस्मत……. हम रजिस्टर करते समय सिक्यूरिटी प्रश्न पर क्लिक करना तो भूल ही गए थे……..अब क्या करते…. .करना क्या था….. फिर से चढ़ गए मेज़ पर और लगे कागज़ के टुकडे जमा करने……. १-१ टुकड़ा हमें १-१ तोले सोने से भी कीमती लग रहा था…. बड़ी मुश्किल से १ घंटे की मेहनत के बाद जैसे-तैसे सारे टुकडे मिले…….. पेपर और गोंद लेकर लगे अब जोड़ने एक-एक टुकडे………. और इस तरह बड़ी मुश्किल से ४ घंटे की मेहनत के बाद हमें हमारा पासवर्ड वापस मिला…………

net3अब जैसे दिन भी नेट का और रातें भी नेट की…….. इन दस दिनों में हमने दिन और रात एक करके अपने संस्थान के फ्री नेट का भरपूर उपयोग किया….. अब इतनी फीस देते हैं तो हमारा भी तो कोई फ़र्ज़ है कि नहीं…….हमें लग रहा था अगर इसी तरह हम अपनी किताबों में रूचि दिखाते तो एक आध स्वर्ण पदक तो हाथ लग ही जाता……. पर कहते हैं ना किसी भी चीज़ की अति अच्छी नहीं होती…… .हमें भी पता चलना था और चल गया…… हमारी प्यारी-प्यारी कत्थई आँखे सूज कर अंगारे सी लाल हो गई और हम नेट तो क्या आईने में अपना चेहरा भी देखने लायक नहीं बचे….. बिना चश्में के अब कुछ भी दिखाई जो नहीं दे रहा था…… और हमारे कंधे और गले में इतना दर्द हो गया कि हमसे हिला भी नहीं जा रहा था…… .डॉक्टर ने कुत्ते का पट्टा बांधने दे दिया वो अलग……शर्म के मारे १५ दिन तक रूम से बाहर नहीं निकले और १५ दिन की छात्रवृत्ति से भी हाथ धो बैठे…… वो महिना कडकी में कैसे निकला है, ये हम ही जानते हैं……

net5किसी तरह महीने-डेढ़ महीने बिना नेट के निकाल ही लिए……. अब कुत्ते के पट्टे का भी तो ख्याल रखना था ना हमें……. और जैसे जैसे हालत सुधरी हम फिर से आ गए नेट सुंदरी की गोद में…….. और लगे करने फिर से नेट की जादुई दुनिया में विचरण…….. अब जैसे जैसे end term पास आने लगा हमारे दिमाग की घंटी बजने लगी …… टन टन टन टन …… हमारे दिल और दिमाग में रोज इस बात पर लड़ाई होने लगी कि अब तो पढाई करो…….पर ये नेट की लत ऐसे कैसे छूटती…… आखिर दिमाग में एक और धांसू आईडिया आ ही गया…… और हमने खोली free greetings की साईट…… अरे वहीँ 123greetings.com…….. और एक कार्ड पर पासवर्ड लिखकर अपने ही ई मेल पर भेज दिया ……अब आप सोच रहे होंगे ऐसे कैसे मैंने छुटकारा पा लिया??????? बहुत कम सोचते हैं आप लोग…… अरे भाई मैंने कार्ड पर पाने की तारीख तो दो महीने बाद की डाली थी ना………

इस तरह एक महिना तो अभी शांति से बीता है……. उम्मीद कीजिये कि अगला महिना भी शांति से निकल जाये…… अब एक महीने बाद फिर इससे छुटकारा पाने का उपाय सोचना पड़ेगा……. अब आप क्यों शांत बैठे है, आप भी मेरी कुछ मदद कीजिये ना……..

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63 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Soni garg के द्वारा
July 13, 2010

सॉरी डिअर, आप मुझसे बढ़ी नेट की लती तो ही नहीं सकती ! Hey,ye cute pic kis kid ki hai ………?????

    aditi kailash के द्वारा
    July 13, 2010

    इस लत ने तो हमारा जीना मुश्किल कर दिया है, आपका हाल भी लगता है कुछ ऐसा है…. this cute baby is Atharv, my nephew…. my sister’s son….

deepaksrivastava के द्वारा
June 25, 2010

आपकी ये रचना सामने आ गयी तो मैंने सोचा कि इसे अवश्य पढना चाहिए और पढ़कर लगा कि ये इतनी सुंदर है कि आज लगता उस चोर का कुसूर नहीं है, जब कुछ इतना खुबसूरत हो तो कुछ लोगों को काबू रखना आसान नहीं होता. वाकई सुंदर लेख. बधाई.

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    दीपक जी, प्रतिक्रिया के लिए आभार…. नेट की लत, जिसने आजकल सभी को अपने काबू में कर रखा है, पर लिखने की कोशिश की है… आपको पढ़कर अच्छा लगा, पढ़कर हमें भी लगा कि हमारी मेहनत सफल हो गई….

राजीव तनेजा के द्वारा
June 25, 2010

बहुत ही बढ़िया…प्रवाहमयी किस्सागोई पढकर मज़ा आ गया…

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    राजीव जी, आपका आभार……

aditi kailash के द्वारा
June 23, 2010

मैं इस मंच पर अन्य लोगों से भी जानना चाहूंगी, अगर कोई हमारी पोस्ट हमसे बिना पूछे कॉपी कर अपने नाम से पोस्ट कर दे तो हम क्या कर सकते हैं…..कृपया मेरी मदद करें……..

seema के द्वारा
June 23, 2010

आज आपकी यह पोस्ट यहाँ भी पढी , क्या वहां भी आप ही हैं |

    aditi kailash के द्वारा
    June 23, 2010

    सीमा जी, आपका बहुत बहुत आभार……आपने हमें इसकी जानकारी दी…….वो हमारा ब्लॉग नहीं हैं, किसी ने हमारी पोस्ट वहां कॉपी कर के पोस्ट कर दी है…… क्या आपको कुछ जानकारी है अगर कोई हमारी जानकारी के बिना इस तरह की चोरी करता है तो हम क्या कर सकते हैं…….

    seema के द्वारा
    June 23, 2010

    अदिती जी मुझे लगा तो यही था नाम देखकर की किसी ने आपकी पोस्ट ज्यों की त्यों चाप दी है , इसीलिए आपसे भी और उन महाशय से भी हमने पूछा था की क्या यह पोस्ट आपकी है ? मुझे लगता है आप उसके ब्लॉग पर टिप्पणी करके या फिर उसे ई-मेल के माध्यम से पहले सूचित करें | शायद वो ब्लॉग की दुनिया में नए है और मुझे लगता है उनको इसकी ज्यादा समझ नहीं होगी | आप उसे लिखेंगी तो निश्चय ही वो अपनी गलती स्वीकार करेंगे और बाकी भी जो उनकी दो पोस्ट है , चोरी की ही है | उनको भी वहां जाकर उसे आगे से ऐसा न करने से रोकना चाहिए | आप फ़िक्र मत कीजिए यह पोस्ट आपकी है और बहुत पहले से पब्लिश है | बस उसे आपको सम्मान देते हुए आपका लेख पोस्ट करना चाहिए था | वैसे आप बधाई की पात्र है | वो लेखक ही क्या जिसकी पोस्ट चोरी न हो , तो यह है आपकी पहली सफलता | हमारी बधाई स्वीकारें :)

    aditi kailash के द्वारा
    June 23, 2010

    सीमा जी, हम तहे दिल से आपके शुक्रगुजार हैं…. वो आप ही थी, जिसके कारण हमें इस चोरी का पता चल गया….. आपका पुनः आभार…. आपने सही कहा कि हो सकता है वो ब्लॉग की दुनिया में नए हों…..आपकी प्रतिक्रिया पढ़ते ही हमने उस ब्लॉग पर visit किया और उन्हें वहाँ टिप्पणी भी लिख दी की ये हमारी पोस्ट हैं, आप इसे delete कर दे…. हमने उनके मेल id पर मेल भी कर दिया है…. देखे क्या जवाब आता है… आपकी बधाई के लिए धन्यवाद्…. ये सब इस मंच और पाठकों का प्यार है…

    aditi kailash के द्वारा
    June 22, 2010

    दिवाकर जी, आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर बहुत ही मजा आया….. लगता है आपकी भी कहानी हमारे जैसी ही है….वैसे ये कहानी बहुत से लोगों की है…… अरे आप कहा चुपचाप खिसकने की कोशिश कर रहे थे, फिर हमें आपकी व्यथा कौन सुनाता…. पढ़कर अच्छा लगता है हम अकेले नहीं हैं, और भी लोग हैं हम जैसे….. आप तो लगता हैं हमसे से भी बड़े भुक्तभोगी हैं…. बिना वेतन के over time कर रहे हैं… और भाभीजी बेचारी को इंतजार कराते हैं सो अलग….

allrounder के द्वारा
June 17, 2010

बड़ा मुसीबत मैं डाल दिया आपने ! चलिए सोच कर बताते हैं !

    rajkamal के द्वारा
    June 17, 2010

    सर- में ही नहीं और भी बहुत से लोग यहाँ पर इपकी बहुत इज्ज़त करते है… टाप २०-२० की लिस्ट के बाद मेने आपको बधाई का सन्देश भी भेजा था …. लेकिन में यह देख कर हैरान हो रहा हु की आप जैसा इतना काबिल आदमी अपने टलेंट का क्या कर रहा है.?… १५ तारीख तक हमने आपकी सब बातो ka बहुत आनंद लिया … लेकिन अब यह सब बेमतलब और बेमानी सा लगने लगा है…. बहुत ही बेहूदा और फूहड़…. में आप से छोटा हु.. अगर मेरी बात बुरी लगी हो तो माफ़ कर देना… jab आप अपनी सोच दिशा बदलेंगे तो और भी निखर कर सामने आयेंगे… में उम्मीद करता हु की शायद आप नंबर २ पर आये… गुस्ताखी माफ़….

    allrounder के द्वारा
    June 18, 2010

    भाई राजकमल, मुझे आपकी बात बिलकुल समझ मैं नहीं आई आप किस सन्दर्भ मैं ये बात कह रहे हैं ! सर्वप्रथम तो ये कि यदि आपको मुझ तक कोई सन्देश पहुँचाना है तो मेरे किसी लेख पर प्रतिक्रिया देकर पहुंचाएं ताकि मैं समझ सकूं कि आप किस ओर इशारा कर रहे हैं ! आप दूसरे कि पोस्ट पर मुझे कमेन्ट मार रहे हैं वो तो इत्तेफाक से मेरी नज़र इस पर पड़ गई, और मैं इसका जबाव दे रहा हूँ ! भाई तुमने मेरे टलेंट को सराहा धन्यबाद ! मैं अपने बारे मैं थोडा बताना चाहता हूँ भाई मैं कोई बहुत बड़ा लेखक या समाज सुधारक नहीं हूँ ! हाँ मैं एक fun loving व्यक्ति हूँ ! और अपने मित्रों के साथ मौज मस्ती करना मेरा स्वभाव है ! और यहाँ मैं सबको अपना मित्र मानता हूँ ! मैं बस उसी नाते एक दूसरे से जुड़ना चाहता था ! और शायद मैं अपनी कोशिश मैं कामयाब भी रहा ! आपने कुछ शब्द लिखे हैं बेहूदा…… फूहड़ कृपया ये किस सन्दर्भ मैं कहे ये समझाने कि जेहमत करें जिससे मैं अपना उत्तर दे सकूं !

allrounder के द्वारा
June 17, 2010

चलिए आपने इतनी जानकारी दी उसके लिए धन्यबाद ! और आपके सुनहरे भविष्य के लिए आपके इस बिल्लेन दोस्त की तरफ से ढेरों शुभकामनायें !

    aditi kailash के द्वारा
    June 17, 2010

    शुभकामनाओं के लिए आपका आभार……. अब आप ये डिसाइड कर लें की आप दोस्त हैं या विलेन क्योंकि हमारे लिए एक ही व्यक्ति ये दोनों नहीं हो सकता……

allrounder के द्वारा
June 17, 2010

अबे यार गुड्डू ये अदितिजी कह रही हैं वो कितावों की डॉक्टर बनने वाली हैं, पापा कसम गुड्डू हम १५ साल से डीपली घुसके ला कर रहे हैं मगर अभी तक नहीं समझ पाए अदितिजी कौन शहर मैं रहती हैं, राजनीति फिलम क्यों नहीं देख पा रही हैं ? हमारे लापतागंज मैं फ्री इलाज़ करने वाला कौन है वे ! गुरु इससे पहले की हम तुम मैं लप्पड़ मारे तुम सारी जानकारी लेकर आओ ! वर्ना लापतागंज मैं न घुसना बताये देते हैं तुम्हें ! आखिर हमें भी तो पता चले वे ये किस्से पंगा हो गया !

    aditi kailash के द्वारा
    June 17, 2010

    सचिन जी, अभी हम ph d कर रहे है…. हम किस शहर के हैं, तो इसका जवाब होगा, पूरा भारत हमारा है…..क्योंकि पैदा होने के बाद अब तक हम ७ राज्यों में रह चुके हैं और सभी से हमारा गहरा रिश्ता है……अभी हम जहाँ रह रहे हैं…वहां एक छोटा सा थियेटर है जिस में फिल्म कम अँधेरा ज्यादा दिखाई देता है और आवाज़ कम फुसफुसाहट ज्यादा सुनाई देती है………वैसे हमारा गृह शहर बहुत ही बड़ा शहर है और कई मल्टीप्लेक्स भी हैं वहां….अगली बार जब भी जायेंगे राजनीति जरुर देखेंगे…

allrounder के द्वारा
June 17, 2010

अबे ये क्या तुम डॉक्टर बनने बाली हो ? पापा कसम ये हमसे क्या होगया बे गुड्डू ! एक डॉक्टर से दुश्मनी कर ली यार ! पहले ये लेख पढ़ लिए होते तो आप से दोस्ती कर लेते ! कम से कम फ्री मैं लापतागंज वालों का इलाज़ तो हो जाता वे !

    aditi kailash के द्वारा
    June 17, 2010

    घबराओं नहीं गुड्डू, हम दवाइयों वाले डॉक्टर नहीं, किताबों वाले डॉक्टर बनने वाले हैं……वैसे फ्री में लापतागंज वालों का इलाज़ करवाने दवाई वाले एक डॉक्टर हैं तो आपके पास…..

Shanu के द्वारा
June 15, 2010

Achha hai! keep going.

    aditi kailash के द्वारा
    June 15, 2010

    thanks shanu ji….

shafique के द्वारा
June 15, 2010

परेशानियां जिंदगी का हिस्सा हैं। इसके लिए दूसरों या खुद को कोसने की बजाए इसका हल तलाशें। नकारात्मक सोच जिंदगी की दिशा और दशा दोनों बदल देती हैं। अपनी सोच सकारात्मक रखें।…

    aditi kailash के द्वारा
    June 15, 2010

    shafique ji, मैंने तो व्यंग्य लिखने की कोशिश की थी, आपने शायद इसे सिरिअसली ले लिया….वैसे मेरी सोच काफी सकारात्मक है…….परेशानियों के लिए मैं ना तो अपने को कोसती हूँ और ना ही दूसरों को….ये तो समय की बात होती है…….हर रात के बाद सुबह आती है तो बुरे समय के बाद अच्छा समय भी जरुर आता है…… आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार……

subhash के द्वारा
June 14, 2010

sabko pta hai log kaam ki baate chhodkar youtube dekhte hai

    aditi kailash के द्वारा
    June 15, 2010

    आप क्या देखते हैं और क्या नहीं ये तो आपको ही ज्यादा अच्छे से पता होगा……. प्रतिक्रिया के लिए आभार……..

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
June 14, 2010

हा हा हा हा ….बहुत सुंदर ब्लॉग, आपने नेट के लतियों के दिल की बात बोल दी है… अपना भी कुछ ऐसा ही हाल है…लेकिन मैंने नेट वोर्किंग sites से अपना मेल अकाउंट ही डिलीट कर छुट्टी पाई है ..हा हा हा हा … लेकिन अब blogers की दुनिया अच्छी लगने लगी है…. देखते हैं इससे कब छुट्टी मिलती है

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    शिवेंद्र जी, प्रतिक्रिया पढ़ कर लग रहा है आपने लेख बहुत एन्जॉय किया…….आपका आभार…..आपकी हंसी पढ़कर मुझे भी हंसी आ रही है……..

    शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
    June 15, 2010

    बिलकुल ठीक फ़रमाया आपने मैंने लेख को बहुत एन्जॉय किया….आपका बहुत बहुत धन्यवाद इस लेख के लिए…

    aditi kailash के द्वारा
    June 15, 2010

    शिवेद्र जी, पुनः धन्यवाद्…….बहुत अच्छा लगा…..अभी भी आपकी हंसी पढ़कर हंसी आ रही है……

rani के द्वारा
June 14, 2010

बहुत अच्छी रचना. हम सब की कहानी बयान करती हुई.

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    रानी जी, आभार…..आपने रचना पढ़ी और आपको पसंद आई…..

mohit के द्वारा
June 14, 2010

From where u got all these good ideas. mohit.

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    from our daily life itself……

mohit के द्वारा
June 14, 2010

Its very very funny. I really enjoyed it. Congratulations. Mohit.

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    Thanks for ur response………

rajkamal के द्वारा
June 14, 2010

aapne उपाय pucha hai.. chaliye lage haath bata dete hai… lekin aa geaur kisi ko mat batana.. jis tarah ham paise dekar likhwa kar usko apne naam sea chapwate hai… aap bhi kuch isi ki taraz par…………………. aap samajh hi gai hongi ki mein kya kahna chahta hu… lekin har koi mere jese jigar wala bhi to nahi hota… jo ki ghate ka sodda kare….

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    राजकमल जी, उपाय सुझाने के लिए आभार, पर हम कुछ समझे नहीं आप क्या लिखना चाहते थे………

    rajkamal के द्वारा
    June 14, 2010

    आप की कोई सहेली नहीं है क्या – में तो समझा था की आप बहुत ही समझदार है- वोह तो फ्री में ही आप की मदद कर देगी- या फिर आप भी मेरी तरह यहाँ पर ब्लॉग लिखने की बात किसी को बताती नहीं है- लेकिन कब्ब तक…………

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    जान-पहचान तो बहुतों से है, पर हमराज कोई नहीं……. सही समझा आपने, हम ब्लॉग लिखते हैं ये हमारे घर में भी किसी को नहीं पता है और ना ही हमारे जान-पहचान में……

kmmishra के द्वारा
June 13, 2010

अदिति जी डरनके की कोई बात नहीं है । शुरू शुरू में ऐसा ही होता है । हिन्दी ब्लाग जगत के सबसे बड़े और महान ब्लागर श्री ज्ञानदत्त जी को पिछले महीने इसी ब्लागिंग के चक्कर में दिमाग में सूजन हो गयी थी ओर एक हाथ ढीला पड़ गया था । मुझे भी रीढ़ की हड्डी में दर्द शुरू हो चुका है । इतनी कसरत के बाद नतीजा सिर्फ परिवार के कोप का भाजन बनने के सिवाय कुछ नहीं मिलेगा ।ब्लागिंग से समाज में कोई क्रांति तो होने से रही ।

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    मोहन जी, आप मुझे डरा रहे है या हौसला बंधा रहे हैं……..अभी तक तो मैं नहीं डरी थी पर आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर लगा किसी हॉरर फिल्म का स्क्रिप्ट पढ़ रही हूँ……वो भी राम गोपाल वर्मा की नहीं, जिससे डरता कोई नहीं है, बस अपनी किस्मत पे रोता है कि कहाँ ये फिल्म देखने आ गया…….

Chaatak के द्वारा
June 13, 2010

अदिति जी, नेट सिकनेस पर बेहतरीन लेख के लिए बधाइयाँ आशा है कि रोगियों को इस रोग से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी. लेख वाकई कमाल का है. हलके फुल्के शब्दों में किया गया व्यंग भी अच्छा लगा.

    aditi kailash के द्वारा
    June 13, 2010

    आपको हमारी नेट की दीवानगी पसंद आई, इसके लिए चातक जी आपका आभार……..अब बाकियों का पता नहीं, पर हम इस नेट सिकनेस से बहुत परेशान हैं……..कुछ उपाय हो तो जरुर बताएं…..

Kriti के द्वारा
June 13, 2010

mind blowing!!!!!!!!

    aditi kailash के द्वारा
    June 13, 2010

    Thanks kriti !!!!!!!!

Rajesh Tiwari के द्वारा
June 13, 2010

बहुत ही अच्छा व्यंग्य, साथ ही सीख भी. आपको छुटकारा पाने क्या उपाय बताये, मै खुद परेशान हूँ. अगर आपको कोई उपाय मिल जाएँ तो जरुर बताइयेगा.

    aditi kailash के द्वारा
    June 13, 2010

    राजेश जी, फिर भी सोचियेगा……..शायद कुछ उपाय निकल ही आये…..हमें कुछ पता चलेगा तो हम भी बाँटेंगे सब के बीच…..ज्ञान तो बांटने से ही बढ़ता है ना…….. प्रतिक्रिया के लिए आभार…….

YOGENDRA YADAV के द्वारा
June 13, 2010

अदिति जी आपका ब्लॉग पढ़कर ऐसा लगा जैसे अपने बारे में पढ़ रहा हु. २० जून से मेरे एक्साम होने है और नेट का नशा ऐसे लगा है की छुटता ही नहीं. टाइम नहीं है पर फिर भी मै आपका ब्लॉग पढना नहीं भूलता

    aditi kailash के द्वारा
    June 13, 2010

    योगेन्द्र जी, धन्यवाद……ये हम सभी की कहानी है……ये आप जैसे पाठकों का स्नेह ही है जो और लिखने के लिए प्रेरित करता है……आपकी परीक्षा सिर पर है तो आप अपने पढाई पर भी ध्यान दीजिये…..आप परीक्षा में अच्छा करें, हमारी शुभकामनायें आपके साथ हैं….

rudra के द्वारा
June 13, 2010

अदिति जी, आपकी ये रचना मेरी व्यथा सी भी प्रतीति होती है. मैं अब इस रोग से मुक्त नहीं हो सकता. — रूद्र

    aditi kailash के द्वारा
    June 13, 2010

    रूद्र जी, ये सिर्फ आपकी या मेरी नहीं, बल्कि आजकल के हर युवा की व्यथा है……..नेट ने अपने मायाजाल में इस तरह फंसा लिया है कि निकलना मुश्किल हो गया है….. रचना पढने के लिए आभार……..

    rudra के द्वारा
    June 13, 2010

    सही बात कही है, मैने अपने एक ब्लॉग मैं आपके ब्लॉग का उल्लेख किया है. पसंद आये तो सूचित जरूर करियेगा. नहीं पसंद आये तो माफ़ करियेगा. अभी मैं आपसे ही सिखा रहा हूँ. ;)

    aditi kailash के द्वारा
    June 13, 2010

    रूद्र जी, हमने आपकी पहली पोस्ट “अब हिंदी कौन पढता है” पढ़ी और प्रतिक्रिया देने की कोशिश भी की, पर शायद आपने प्रतिक्रिया का आप्शन बंद किया है……पोस्ट काफी अच्छी लगी और वास्तविकता बयान करती है…… दूसरी अभी पढ़ी नहीं है…..देखे क्या लिखा है आपने…..

    rudra के द्वारा
    June 13, 2010

    अदिति जी, असुविधा के लिए खेद है . प्रतिक्रिया का आप्शन के बताने के लिए धन्यवाद. जागरण पर मैं अभी नया हूँ और ब्लॉग के भी. ” अब हिंदी कौन पढता है” को पसंद करने के लिए धन्यवाद.

    aditi kailash के द्वारा
    June 13, 2010

    हम भी ब्लोगिंग में ज्यादा पुराने नहीं है……..नए-नए में ऐसा होता है……आपको ब्लोगिंग से सम्बंधित कोई भी परेशानी हो तो आप बेझिझक पूछ सकते हैं……

    rudra के द्वारा
    June 13, 2010

    हाँ क्यूँ नहीं अदिति जी,

parveensharma के द्वारा
June 13, 2010

अदिति जी. लीक से हटकर नया लिखने के लिए बधाई. नेट की दीवानगी ने तो हम पर भी कहर बरपाया है. वो तो शुक्र है की जिस organization में हम काम करते हैं, वहां नेट फ्री है. वरना तो भगवान् ही हमारा मालिक होता.

    aditi kailash के द्वारा
    June 13, 2010

    प्रवीण जी, फ्री होने के कारण ही तो ज्यादा परेशानी है…….जब देखो तब बैठ जाते हैं नेट पे…..अगर कैफे में जा कर इतना नेट उपयोग किया होता तो आज दिवाला ही निकल गया होता….. प्रतिक्रिया के लिए आभार…

विनीत तोमर के द्वारा
June 13, 2010

आपका लेख पढकर मज़ा आ गया और बिलकुल सही कहा आपने यही होता हे इस से बहुत सीख मिली उस पैर धियान करना चाहीये, और में इस पैर बिलकुल अमल करूंगी सही दिशा के लिए धन्यबाद.

    aditi kailash के द्वारा
    June 13, 2010

    विनीत जी, आपको हमारी नेट की दीवानगी पसंद आई आभार……अच्छा लगा कि आपने इससे कुछ सीख ली…. प्रतिक्रिया के लिए आभार…..


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