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तो बहु कहाँ से लाओगे?????? (कविता)

Posted On: 11 Jun, 2010 Others में

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girlदिनों-दिन बढती कन्या भ्रूण हत्या एक बहुत बड़ी समस्या का रूप लेने की ओर अग्रसर है………..देखिये ये कहीं नासूर ना बन जाये…….२००१ की जनगणना के अनुसार आने वाले समय में हर १० में से १ आदमी को कुंवारा रहना पड़ेगा……..और CIA की २००६ की रिपोर्ट के अनुसार हर ५ आदमी में से १ को कुंवारा रहना पड़ेगा………यानि की ५ साल में कुंवारों की संख्या दुगुनी हो गई………बहुत जल्दी ही २०११ की जनगणना आने वाली है, सोचिये उसमें क्या पता चलने वाला है?? अभी भी समय है, संभल जाओ कन्या भ्रूण हत्यारों, वरना कल अपने प्यारे बेटे की शादी के लिए आपको कौन-कौन से पापड़ बेलने पड़ेंगे , वो आप सोच भी नहीं सकते……….

gender aनन्ही सी एक कली हूँ मैं
कल मैं भी तो इक फूल बनूँगी
महका दूंगी दो घर आँगन
खिलकर जब मैं यूँ निखरुंगी

ना कुचलो अपने कदमों से
यूँ मुझको इक फल की चाहत में
फल कहाँ कभी बागबां का हुआ है
गिरता अक्सर गैरों की छत पे

girl1उम्र की ढलती शाम में जब
ना होगा साथ कोई साया
याद आयेगा ये अंश तुम्हारा
जिसको तुमने खुद ही है बुझाया


क्या इन फलों से ही है माली
तेरी इस बगिया की पहचान
गुल भी तो बढ़ाते है खिलकर
तेरी इस गुलिस्तां की शान

gender5बोलो फूल ही ना होंगे तो
तुम फल कहाँ से पाओगे
बेटी जो ना होगी किसी की
तो बहु कहाँ से लाओगे?


तो बहु कहाँ से लाओगे??????

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38 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
July 16, 2012

बोलो फूल ही ना होंगे तो तुम फल कहाँ से पाओगे बेटी जो ना होगी किसी की तो बहु कहाँ से लाओगे? डॉ अदिति कैलाश जी बहुत सुन्दर सन्देश देती ये प्यारी रचना मन को छू गयी …मूर्ख हैं वे लोग जो इन फूलों की कदर नहीं करते जो अंत तक दुःख दर्द में भागी दौड़ी आ साथ निभाती प्यार बरसाती हैं ….बधाई ..जय श्री राधे भ्रमर ५

drsinwer के द्वारा
May 23, 2011

अदिति जी , नमस्कार . आपने एक बहुत अछि कविता लिखी हे इसकेलिए आपको बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूँ और यही आज की सच्चाई हे अब बेटियां हेही कंहा देखना कुछ दिनों के बाद १०० में से ३० कुंवारे ही रह जायेंगे , एक बार फिर आपको बधाई

anamika के द्वारा
July 10, 2010

बस्तों के बोझ तले दबा हुआ बचपन अपनों से ही पीड़ित है ये बचपन

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    आपका आभार…

Sumit Chamria के द्वारा
July 2, 2010

aaditi ji aapki lekhni ne bahut hi samyik prashna uthaya hai, badhai…!

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    sumit chamria ji, thanks u very much for ur encouragement …….

Deepak jain के द्वारा
June 19, 2010

अदिति जी बहुत खूब आपकी इस कविता को पढ़कर शायद कुछ लोगों को अक्ल आ जाये आपके ब्लॉग पढ़कर तो उन कवियों की याद आ जाती है जिन्होंने स्वतंत्रा संग्राम के समय अपनी कविताओं द्वारा जनता को जागृत किया था आपके ब्लॉग भी आज सोये हुए समाज को जगाने का काम कर रहे हैं हमारी तरफ से आपको ढेरों शुभकामनायें बस आप ऐसे ही लिखते रहो ताकि हम भी अपनी प्रतिक्रियां देते रहें दीपक जैन

    aditi kailash के द्वारा
    June 20, 2010

    दीपक जी, बस आप लोगों का प्यार ही है, जो हमें लिखने के लिए प्रेरित करता है…..आपने तो बहुत बड़ी बात कह दी……ये तो बस हमारी एक छोटी सी कोशिश है, अपने विचारों को अभिव्यक्त करने की…..आप लोगों के प्रोत्साहन से आगे भी इसी तरह कोशिश जारी रहेगी……

Shanu के द्वारा
June 15, 2010

Shaandar lekhan ke liya dhanyavad.

    aditi kailash के द्वारा
    June 15, 2010

    शानू जी, आपका आभार……..हमारी अन्य पोस्ट भी पढ़कर देखे, शायद आपको पसंद आयें…….

rajkamal के द्वारा
June 14, 2010

युवी ने एक बार कहा था की हम सब “सचिन सर के रेकार्ड्स की पार्टिया मनाते -२ थक चुके है”– कुछ न समझे खुदा करे कोई-

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    पर आपने तो ४-५ दिन से कोई पार्टी नहीं की है ना……उम्मीद है मज़ा आया होगा…….. अभी तो सचिन जी को बहुत से रिकार्ड बनाने हैं……..

    rajkamal के द्वारा
    June 14, 2010

    सही कहा है आपने- अभी तो सचिन जी को बहुत से रिकार्ड बनाने हैं…….. वोह बात असल में यह है की रचना जी आजकल फिर से उ….. से है-तो ऐसी हालत में मेरा उनके पास होना बहुत ज़रूरी था- सिर्फ में ही नहीं बल्कि सभी अड़ोसी-पडोसी भी कहते है की इस बार जरुर कुछ अनूठा होगा-यह आप रचना जी सिरीस -४ में पढ़ पाएंगी -

    aditi kailash के द्वारा
    June 15, 2010

    ये अच्छी खबर है….आपको बधाई……..

rajkamal के द्वारा
June 14, 2010

बेटिंआ कम् है इस समाज में शायद इसीलिए अब तक हम कुंवारे है- इक हम ही नहीं हुए है इस मर्ज़ के शिकार और भी है लाखो जो इस गंम के मारे है-

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    राजकमल जी, बहुत दिन बाद आपकी शायरी सुनाई दी…. बिलकुल सही कहा…….लाखों नहीं कुछ दिन में करोडो हो जायेंगे………..

subhash के द्वारा
June 14, 2010

kavita ke liye sadhuvad bahu nahin hogi to kam se kam aabadi to rukegi

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    सुभाष जी, प्रतिक्रिया के लिए आभार…….. देखिये कहीं आबादी ख़त्म ही ना हो जाये…..

Kriti के द्वारा
June 13, 2010

i was following your blog for few days. it has all the shades and its totally diversified. keep it up. my best wishes for you.

    aditi kailash के द्वारा
    June 13, 2010

    Thanks Kriti ! It really make me feel happy that u r regularly reading my blog and enjoying it…….readers appreciation always encourage writers to try to write more and even better…… Thanks again !

kaushalvijai के द्वारा
June 12, 2010

अदिति जी., मेरी कविता पर आपके सुनहरे-विचारों की अभिव्यक्ति , उस घने नीरद की भांति है,जो मेरे सूखे मरू में पानी बरसा गयी. आपको ह्रदय से कोटि-कोटि धन्यवाद. kaushalvijai.jagranjunction.com

    aditi kailash के द्वारा
    June 12, 2010

    अभी मरुस्थल सूखा कहाँ रहा है……आजकल तो राजस्थान में बाढ़ आई हुई है…….. आपका भी आभार….

aruna के द्वारा
June 12, 2010

फल और फूल के द्वारा आपने लड़के और लड़कियों में होने वाले भेदभाव को बखूबी बताया है. एक बहुत ही अच्छी रचना. एक-एक शब्द का अपना एक खास मतलब है यहाँ. वाकई आप बधाई की पात्र है.

    aditi kailash के द्वारा
    June 12, 2010

    अरुणा जी, आपको हमारी रचना “तो बहु कहाँ से लाओगे” पसंद आई आपका धन्यवाद्……बस ये हमारी तरफ से एक छोटी सी कोशिश है………

sumityadav के द्वारा
June 12, 2010

बहुत खूब अदितीजी, यह रचना समाज के पुरुषवादी रवैये पर करारा प्रहार है जो हमेशा से महिलाओं को दोयम दर्जे का  मानता आया है। एक पुरुष कैसे यह भूल सकता है कि उसे जन्म देने वाली भी एक महिला ही थी। अगर वो ही न होती तो उसका जन्म कैसे होता? पता नहीं कुछ लोग इतने निष्ठुर कैसे हो जाते हैं जो अपने ही अंश को मारने पर उतारू हो जाते हैं। वैसे पहले के मुकाबले इसमें कमी आई है पर अभी भी पिछड़े इलाकों में कहीं-कहीं संभ्रांत परिवारों में भी कन्या भ्रूण हत्या जारी है। आशा करता हूं इन सबमें इंसानियत जगे।

    aditi kailash के द्वारा
    June 12, 2010

    सुमित जी, आप गलत सोचते है गांवों में अभी भी लिंगानुपात शहरों के मुकाबले बहुत ही अच्छा है…….कुछ विकसित राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा में तो स्तिथि बदतर है……अभी भी समय है हमें जाग जाना चाहिए….. आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार……..

kmmishra के द्वारा
June 12, 2010

दिलो दिमाग, आत्मा को झिंझोड़ती कविता । मैंने कुछ समय पहले कन्या भ्रूण हत्या पर एक फिल्म देखी थी ‘मात्रभूमि’ । वह फिल्म मेरी अब तक की सबसे डरावनी फिल्म है । इसको देखकर मैं कई दिन तक सो नहीं पाया था ।

    aditi kailash के द्वारा
    June 12, 2010

    मोहन जी, सच कहा आपने…कन्या भ्रूण हत्या अभी समस्या बनने की और अग्रसर है……..अभी इसके दुष्परिणाम लोगों को दिखने चालू नहीं हुए है……अभी भी समय है लोग संभल सकते हैं, नहीं तो बाद में पछतावे के सिवाय कुछ भी हाथ नहीं आएगा….. प्रतिक्रिया के लिए आभार…..

    harnam के द्वारा
    May 13, 2011

    हाँ आपकी बात भी सही है अदिति जी मैं आपसे सहमत हूँ लेकिन कुछ दिनों की ही बात है की मेरे घर के सामने रहने वाली एक औरत गर्भवती थी और उसने लिंग परिक्षण टेस्ट करवाया जिससे पता चला की लड़की है उसके ससुराल वालों ने गर्भपात की सलाह दी लेकिन वेह यह नहीं चाहती थी और उन्होंने उसे इतना मजबूर किया की उसने ज़हर खाकर अपनी जान दे दी….

R K Khurana के द्वारा
June 11, 2010

लगता है आप 15 जून तक बहुत व्यस्त रहेंगी ! सब कुछ जल्दी जल्दी निबटा लेना चाहती है ! फिर ताज पहनने के लिए तयारी भी तो करनी है ! मेरी शुभकामनाये ! खुराना

    aditi kailash के द्वारा
    June 11, 2010

    चाचाजी ऐसी कोई बात नहीं है…….बस हमारे कुछ शैक्षणिक कार्य भी हैं….हमने आपको जवाब दिया था, शायद आपने मेल पढ़ा नहीं…….. पढियेगा…..

Nikhil के द्वारा
June 11, 2010

अछि रचना. आभार, निखिल झा

    aditi kailash के द्वारा
    June 11, 2010

    निखिल झा जी, आपको हमारी रचना “तो बहु कहाँ से लाओगे?” पसंद आई….आपका आभार……

rita के द्वारा
June 11, 2010

सुन्दरअभिव्यक्ति के साथ यह कविता लिखने के लिए आपको बधाई इ .

    aditi kailash के द्वारा
    June 11, 2010

    रीता जी, आपको हमारी रचना “तो बहु कहाँ से लाओगे?” पसंद आई….आपका आभार………

    drsinwer के द्वारा
    July 3, 2010

    कन्या भूर्ण हत्या मे माता और पिता दोनों की इच्छा से ही होती है शायद आपकी कविता [ अगर पड़ते] है तो कुछ तो समज आयगी की हम हमारे लड़के के लिये बहु कंहा से आयगी और आपको बहुत बहुत धन्यवाद् की आप जनता को सही रास्ते पर लाने की कोशिस कर रही हो i dhanaramsinwer@ymail.com

    aditi kailash के द्वारा
    July 5, 2010

    D R Sinwer ji, अगर इस कविता को पढ़कर एक परिवार भी जागता है और एक कन्या भ्रूण हत्या भी रूकती है, तो लगेगा हमारा प्रयास सफल हुआ…..


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