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गुम होता बचपन (कविता)

पोस्टेड ओन: 11 Jun, 2010 जनरल डब्बा में

child1मैंने भी देखा है बचपन
कचरे के डिब्बों में
पॉलीथीन की थैलियाँ ढूंढते हुए
तो कभी कबाड़ के ढेर में
अपनी पहचान खोते हुए I

कभी रेहड़ियों पर तो
कभी ढाबे, पानठेलों पर
पेट के इस दर्द को मिटाने
अपने भाग्य को मिटाते हुए I

स्कूल, खेल, खिलौने, साथी
इनकी किस्मत में ये सब कहाँ
इनके लिए तो बस है यहाँ
हर दम काम और उस पर
ढेरों गालियों का इनाम I
दो वक्त की रोटी की भूख
छीन लेती है इनसे इनका आज
और इन्हें खुद भी नहीं पता चलता
दारु, गुटका और बीड़ी में
अपना दर्द छुपाते छुपाते
कब रूठ जाता है इनसे
इनका बचपन सदा के लिए I
और समय से पहले ही
बना देता हैं इन्हें बड़ा
और गरीब भी I



Tags: बचपन  कविता  aditi kailash  बाल श्रम  बाल मजदूरी  बच्चे  Hindi poem  

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

soni garg के द्वारा
July 26, 2010

अरे रहने दो सब समझ आ गया अभी-अभी तारीख देखि ये पोस्ट तो आपकी जून में आई थी चलिए सिल्वर जुबली की ना सही गोल्डन जुबली की मुबारक बाद दे देती हूँ वर्ना फिर से देर हो जाएगी जल्द ही आप गोल्डन जुबली मानाने वाली है और इस बार में लेट नहीं हूँ infact अडवांस में विश कर रही हूँ !

soni garg के द्वारा
July 26, 2010

आज वास्तव में ये बचपन अपना दम तोड़ रहा है, बेशक हमारे संविधान में शिक्षा बच्चो का अधिकार है लेकिन फिर भी ये बच्चे अपने इस अधिकार से वंचित है ! और इसकी कई वजह है पहले तो इनके माता पिता जो खुद इन्हें ये अधिकार नहीं देते क्योकि उनके अनुसार अगर उनका छोटू कमायेगा नहीं तो घर कैसे चलेगा ! अदिति जी एक बात पूछनी है ये पोस्ट तो आपकी 42 वीं है तो फिर ये 25 वीं पोस्ट का मतलब समझ नहीं आया ! दरअसल आप तो जानती है मैं यहाँ हमेशा लेट हो जाती हूँ तो अब आप समझाईये की मैंने क्या मिस कर दिया !

DR.SHALINIAGAM के द्वारा
June 16, 2010

अरे पांच बच्चे तो पहले से हैं ? और अब तू फिर से उम्मीद से???????? इनका पिता दूसरी को लेकर भाग गया इतने सारे बच्चों को अकेले कैसे पालेगी??? जब दो थे मैंने तभी मना किया था की बस दो बच्चे ही अच्छे ,पर तुम लोगों की समझ क्यों नहीं आता.आये दिन घर में खाने को नहीं है का रोना जबकि तू खुद ही कहती है कि बीबीजी, “हमारे घर राशन का खर्च आप लोगों से कई गुना ज्यादा है, कामवाली तुनक कर बोली ‘जिस उपरवाले ने मुह दिया है वो खाने को भी देगा , आप नजर न लगाओ ,हम तो एसे ही भले”. मैं अवाक् उसको देखती रह गयी …………… ‘

    aditi kailash के द्वारा
    June 16, 2010

    आपने गरीबी की कहानी, चंद पंक्तियों में बहुत ही अच्छे से बयां कर दी…..आपका आभार……

rajkamal के द्वारा
June 14, 2010

छोटू कमा कर लायेगा तभी तो घर में एक और आने वाले का खर्चा चल पायेगा- नहीं तो बाप बेचारा ‘अकेला’ कहा से इतने सारे बच्चो का बोझ उठा पायेगा….

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    बहुत गहरी बात कही आपने……..गरीबी का सबसे बड़ा कारण इनकी बढती जनसँख्या ही है….. प्रतिक्रिया के लिए आभार……..

rajkamal के द्वारा
June 14, 2010

हम लफ्जों से नहीं दिल से दुआ देते है.. सुना है की दिल की दुआ कभी खली नहीं जाती… यह वोह दुआ है जो हर किसी को दी नहीं जाती-

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    बहुत खूब कहा आपने …….. आप पाठकों की दुआ ही हैं जो हमेशा हमारे साथ हैं…….

aruna के द्वारा
June 12, 2010

बाल श्रम की समस्या दर्शाती एक अच्छी रचना. आपने उनके जीवन के अँधेरे पहलु को भी दिखाने का प्रयास किया है. आपको बधाई.

    aditi kailash के द्वारा
    June 12, 2010

    अरुणा जी, आपको हमारी रचना “गम होता बचपन” पसंद आई………..आपका आभार…….

R K Khurana के द्वारा
June 11, 2010

प्रिय बिटिया रानी, “सिल्वर जुबली पोस्ट” के लिए मुबारकबाद ! इश्वर करे तुम आसमान की ऊंचाईयों को चूम लो ! तुम्हारें जीवन में कभी कोइ गम न आये ! सदा खुश रहो ! मेरा आशीर्वाद ! राम कृष्ण खुराना

    aditi kailash के द्वारा
    June 11, 2010

    चाचाजी, आपके आशीर्वाद के लिए धन्यवाद्…….ये सब आप बड़ों का आशीर्वाद और स्नेह है…….और हमें पता है हमेशा रहेगा……..

aditi kailash के द्वारा
June 11, 2010

ये हमारी २५ वीं पोस्ट है……….सोचकर ही बहुत अच्छा लग रहा है…….हमने पहले कभी सोचा नहीं था की हम भी कभी कुछ लिख पाएंगे……पर हम जागरण टीम के शुक्रगुजार हैं की उन्होंने इतना अच्छा मंच दिया, जहाँ हम अपने विचारों को व्यक्त कर पा रहे हैं…….. साथ ही हम अपने सभी पाठकों और साथी ब्लोगर्स के भी शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने समय-समय पर अपना स्नेह दे कर हमें और लिखने के लिए प्रोत्साहित किया………आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद्…… हम आज जो भी हैं सब आप लोगों की बदौलत ही हैं……..उम्मीद ही नहीं, विश्वास है कि आगे भी इसी तरह हौसला मिलता रहेगा…..दिल से आभार….

    http://jarjspjava.jagranjunction.com के द्वारा
    June 11, 2010

    So many Congrats! Aditi ji, may God you come on the top position in the final chart@jj.com. All the best! -with regards, Nikhil singh

    aditi kailash के द्वारा
    June 12, 2010

    Nikhil Singh ji, Thanks for ur good wishes…..




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