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अक्सर याद बहुत तुम आती हो (कविता)

Posted On: 6 Jun, 2010 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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payal1

यादों में जब तुम आती हो
रुनझुन पायल छनकाती हो
खुशियों का मन गूंजे नगमा
हाथों कंगना खनकाती हो

याद जो आये घड़ी मिलन की
मेहंदी रंग सजाती हो
आहिस्ता आगोश में भरकर
चुनरी में शरमाती हो

स्याह, अँधेरी, धुंध अमावस
बिंदिया सी चमकाती हो
दिल के बंजर सूनेपन में
काजल बन बह जाती हो

ज़िक्र जो आये नूर का तेरे
लाली सी छा जाती हो
भीड़ भरी इस तन्हाई में
आँचल बन लहराती हो

अक्सर याद बहुत तुम आती हो
मीठा सा दर्द जगाती हो

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54 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Kristy के द्वारा
May 25, 2011

I bow down humbly in the peresnce of such greatness.

Pramila के द्वारा
February 12, 2011

Its very romantic and full of feelings…….Really beautiful

    Kert के द्वारा
    May 25, 2011

    You’ve got it in one. Cuoldn’t have put it better.

mohit के द्वारा
June 14, 2010

Very much romantic. Mohit.

    aditi kailash के द्वारा
    June 14, 2010

    Thanks Mohit…..

babali के द्वारा
June 8, 2010

very sweet poem. keep writing.

    aditi kailash के द्वारा
    June 8, 2010

    Thank you babali ji for ur sweet response…..

ritik के द्वारा
June 8, 2010

अक्सर याद बहुत तुम आती हो मीठा सा दर्द जगाती हो . बिलकुल सही लिखा आपने प्यार का दर्द मीठा ही होता है.एक अच्छी कविता के लिए बधाई.

    aditi kailash के द्वारा
    June 8, 2010

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्……

rajesh के द्वारा
June 8, 2010

बहुत ही प्यारी रचना……..दिल के एक दम पास……

    aditi kailash के द्वारा
    June 8, 2010

    आपका आभार….

R K Khurana के द्वारा
June 7, 2010

बहुत सुंदर कविता खुराना

    aditi kailash के द्वारा
    June 7, 2010

    चाचाजी, आप बड़ों का आशीर्वाद है………

neha के द्वारा
June 6, 2010

मैंने आपकी दोनों कवितायेँ पढ़ी, दोनों अपने आप में एक मिसाल है………एक ही व्यक्ति दो अलग-अलग लिंगों की भावनाओं को इतने अच्छे से भी व्यक्त कर सकता है, जानकर बहुत ख़ुशी हुई………आप सचमुच बधाई की पात्र हैं………

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    नेहा जी, आपका आभार…….आप लोगों का प्यार है जो हमें अच्छा लिखने के लिए प्रेरित करता है………

    aditi kailash के द्वारा
    June 7, 2010

    नेहा जी, पहले मैंने आपकी बात को गंभीरता पूर्वक नहीं लिया था…..पर अब जैसे-जैसे अन्य पाठकों की प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, महसूस हुआ आपने कितनी बड़ी बात कह दी…….आपने मुझे इस काबिल समझा, मैं हमेशा इससे आगे बढने की प्रेरणा लूंगी…… आपका पुनः आभार………

sameer के द्वारा
June 6, 2010

एक प्यार भरी रचना………..बहुत खूब…….

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    समीर जी, धन्यवाद……

    Lele के द्वारा
    May 25, 2011

    Stands back from the keyboard in amazement! Tahnks!

nikhilbs09 के द्वारा
June 6, 2010

आप तो ग्रेट lekhak हैं.. कविता लिखने के सच्चे अर्थ को व्यक्त क्र दिया है… धन्यवाद.. -निखिल सिंह http://jarjspjava.jagranjunction.com

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    निखिल जी, आपका आभार……..पर मैं आपकी बात समझ नहीं पाई………

    nikhilbs09 के द्वारा
    June 7, 2010

    कुछ विशेष नही कहा है..क्युकी में कोई लेखक अथवा कवि नहीं हू … lekin phir bhi थोडा बहुत पढने का शौक है… और ऐसे ही मैंने एक बार kisi mahaan कवि का interview पढ़ा था जिसमे लिखा था कि एक कवि वो होता है जो अपने आप से परे कि सिथ्थियों को चित्रित करne मै सख्षम होता है.. एवं neha jee bhi apki issi khoobi par mohit hain.. :) एक बार phir से apko dhanywaad.

    nikhilbs09 के द्वारा
    June 7, 2010

    कुछ विशेष नही कहा है..क्युकी में कोई लेखक अथवा कवि नहीं हू … lekin phir bhi थोडा बहुत पढने का शौक है… और ऐसे ही मैंने एक बार kisi mahaan कवि का interview पढ़ा था जिसमे लिखा था कि एक कवि वो होता है जो अपने आप से परे कि सिथ्थियों को चित्रित करne मै सख्षम होता है.. एवं neha jee bhi apki issi khoobi par mohit hain.. :) एक बार phir से apko dhanywaad va बहुत सारी badhaeeyan uttaam रचनाओ क लिए..

    aditi kailash के द्वारा
    June 7, 2010

    निखिल सिंह जी, आपके स्नेह के लिए आपका बहुत धन्यवाद……..हम अपने आप को बहुत बड़ा रचनाकार नहीं मानते… बस जो भी विचार मन में आते हैं उन्हें व्यक्त कर देते हैं…….हमें अभी बहुत कुछ सीखना हैं…….बस अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते हैं……… आपके इस प्रोत्साहन के लिए हम आपके आभारी हैं………

rajkamal के द्वारा
June 6, 2010

दरअसल में लेडीस के पायल पहनने के हक में नहीं हूँ क्योंकि- उनके आने की आहट से पहले ही उनकी पायल की झंनकार चली आती है- वोह जिनको नहीं पता लगना चाहिए उनको भी खबर हो जाती है

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    राजकमल जी, आपने क्या बात पकड़ी है…….सही कहा तेरे आने से पहले ही आ जाती है सनम तेरी पायल की आवाज़ और जान जाती है ये दुनिया हम दोनों की मुलाकातों का राज

    rajkamal के द्वारा
    June 6, 2010

    में हमेशा से ही बीच वाली दो लाइन लिखता रहा हूँ-जिसके उप्पर और नीचे और कुछ भी लिखने की ज़रूरत महसूस न हो-लेकिन आज aap ने मेरे वाला काम कर दिया-बहुत अच्छे से सुधार किया है- लेकिन बाद वाली लाइन इस तरह है- हम भी कहाँ चाहते है की चुप्पचाप वोह रास्ते से गुजर जाये- लेकिन हमें तो हवाओं से ही उनके आने की खबर हो जाती है- में नेहा जी की बात से सहमत हूँ-

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    राजकमल जी, आपका आभार……. ये सब आप लोगों के प्रोत्साहन का ही नतीजा है कि हम और लिखने कि कोशिश कर रहे हैं………… अच्छा लिखा है आपने भी ………

Rajesh Tiwari के द्वारा
June 6, 2010

Dear Aditi ji, After reading your poem I am remembering the year of 1992 when I was newly married and left me newly married wife in search of a job for New Delhi .I remember that month was June and I was struggling day and night of a job. Your poem was integral part of my emotion of every day and night when ever I was remembering of my wife during that period………………….

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    Rajesh ji, Thanks for ur encouragement…….its really mean a lot for me………..i really feel very happy that my poem took u to ur golden period of life………18 years back……..and u felt emotionally attach with it……..please also read the another one “Tum bin kab tak rahun adhuri” and u will come to know the feelings of ur wife at that time……..thanks again………

    Tory के द्वारा
    May 25, 2011

    Your answer was just what I nedeed. It’s made my day!

rajkamal के द्वारा
June 6, 2010

यह आप की एक बहुत ही विलक्षन कविता है- कयोकि आप जो है नही उसको महसूस करके लिखा है-

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    राजकमल जी, हमने कोशिश की है कि लिख सकें कि हमारी नायिका का नायक क्या महसूस कर रहा होगा उससे दूर रहकर …….. प्रतिक्रिया से लगता है हमारी कोशिश सफल हुई……..आपका पुनः आभार………

    Daisy के द्वारा
    May 24, 2011

    That’s the best ansewr of all time! JMHO


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