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अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस-आओ इस बार कुछ नया करें (लेख)

Posted On: 5 Jun, 2010 Others में

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1लीजिये हर साल की तरह एक और पर्यावरण दिवस आ गया…….हर साल की तरह इस साल भी हर जगह बस २४ घंटों के लिए पर्यावरण और उसकी सुरक्षा की बात की जाएगी……..रात बीतने के साथ ही पर्यावरण दिवस भी बीत जायेगा और लोगों को दूसरी सुबह याद भी नहीं रहेगा कि कल क्या था………कहीं भाषण बोले जायेंगे……… कही कवितायेँ कहीं जाएँगी……… कहीं चित्र उकेरे जायेंगे……….कहीं वृक्ष लगाते हुए फोटो खिंचवाए जायेंगे………और पता नहीं क्या-क्या किया जायेगा….. पर असल में कुछ नहीं किया जायेगा……. क्या सिर्फ बातें करने से ही हमारा पर्यावरण सुधर जायेगा?…… क्या साल के ८७६० घंटों में से सिर्फ २४ घंटे हमारा अपने पर्यावरण के बारे में सोचना काफी है?……..क्या हम वास्तव में पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर हैं?………..यदि हाँ तो साल में एक दिन इस बारे में सोचकर हम साल भर क्यों चुप बैठ जाते हैं?………वातावरण को सही और सुंदर रखना हमारा कर्त्तव्य है…….तो चलिए इस बार कुछ अलग करते है ताकि आयोजन पुरे वर्ष भर चलते रहे और हमारे लिए प्रत्येक दिन पर्यावरण दिवस हो………

4हमारा पर्यावरण मिट्टी, जल, वायु, अग्नि और आकाश से बना है……. पर इस पर्यावरण के सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं हम, स्वयं इंसान…… आज विकास का काला चश्मा पहनकर यहीं इंसान इस पर्यावरण में जहर घोल रहा है…… कुल्हाडियों से अंधाधुंध जंगल के जंगल कट रहे है…..वन्य जीवों का, सिर्फ कुछ पैसों के लालच में, शिकार कर रहा है ये इंसान………बड़े बड़े उद्योगों की ऊंची चिमनियों, मोटर गाड़ियों से निकलते धुए शहरों के वातावरण में दिन-प्रतिदिन जहर घोल रहे हैं……… और तो और इन बड़े बड़े उद्योगों से निकल रहे गंदे-जहरीले पानी से हमारी सुंदर-स्वच्छ नदियों और हरी-नीली झीलों को काला-पीला बना दिया जा रहा है………..और बाद में इन्ही नदियों को स्वच्छ करने अरबों रुपये पानी में बहाए जा रहे है………ये तो वहीँ बात हुई कि अगर काम नहीं है तो अच्छे-खासे पायजामे को फाडिये और फिर सिलाने बैठ जाइये…..

कब होता है पर्यावरण असंतुलित?
2हमारे आस पास के प्रकृति की अपनी एक व्यवस्था है, जो स्वयं में पूर्ण है और प्रकृति के सारे कार्य एक सुनिश्चित व्यवस्था के अतंर्गत होते रहते हैं…….. यदि मनुष्य प्रकृति के नियमों का पालन करता है तो उसे पृथ्वी पर जीवन-यापन की मूलभूत आवश्यकताओं में कोई कमी नहीं रहती है……… पर आज मनुष्य आधुनिकता की चकाचौंध में अंधा होकर अपने संकीर्ण स्वार्थ के लिए प्रकृति का अति दोहन करता जा रहा है, जिसके कारण प्रकृति का संतुलन डगमगाने लगा है……परिणामतः बाढ़, सूखा, प्रदुषण, महामारी, दिनों दिन बढती गर्मी, जल की कमी जैसी समस्याये पैदा होने लगी हैं…………


पर्यावरण असंतुलन के दुष्परिणाम

  • पर्यावरण असंतुलन के कारण मनुष्य तथा अन्य वन जीवों को अपने जीवन के प्रति संकट का सामना करना पड़ रहा है………बहुत से जीव-जंतु हमें बिल्कुल अनुपयोगी और हानिकारक प्रतीत होते हैं, लेकिन वे खाद्य श्रृंखला की प्रमुख कड़ी होते हैं और उनका पर्यावरण के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान होता है…………पर्यावरण में आये इस असंतुलन के कारण इस पृथ्वी पर कई प्रकार के अनोखे एवं विशेष नस्ल की तितली, वन्य जीव, पौधे गायब हो चुके हैं……..
  • प्रदूषित पर्यावरण का प्रभाव पेड़ पौधे एवं फसलों पर भी पड़ा है………कृषि योग्य भूमि लगातार कम हो रही है……..साथ ही समय के अनुसार वर्षा न होने पर फसलों का चक्रीकरण भी प्रभावित हुआ है।
  • प्रकृति के नियमों का पालन ना किये जाने से वनस्पति एवं जमीन के भीतर के पानी पर भी इसका बुरा प्रभाव देखा जा रहा है…… जमीन के अन्दर पानी के श्रोत कम हो गए हैं और लोगों को पर्याप्त पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है………..
  • सिमटते जंगल और शिकारियों पर कोई अंकुश नहीं होने से राष्ट्रीय पशु और जंगल के राजा बाघ के साथ-साथ अन्य कई जानवरों की संख्या लगातार कम होती जा रही है, जो चिंता का सबब है……. सन् 2002 के सर्वेक्षण में बाघों की संख्या 3500 आंकी गई थी लेकिन ताज़ा सर्वेक्षण के अनुसार भारत में केवल 1411 बाघ बचे हैं………यानि की आधे से भी कम……..
  • समुद्र तटों पर स्थित महानगरों को पर्यावरण असंतुलन के कारण अब भयंकर स्थिति का सामना करना पड़ रहा है…… समुद्र के पानी का स्तर सामान्य से ज्यादा होने के कारण भयंकर तूफान से इन महानगरों के डूब जाने का खतरा बढ़ता जा रहा है………..
  • आज दुनिया में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता जा रहा है, जिससे ग्लोबल वॉर्मिग का संकट और भी गहराता जा रहा है……

    कैसे करें पर्यावरण कि रक्षा
    3पर्यावरण के नुक़सान से जो क्षति हो रही है वह हाल के दशक के मानव समाज की कई उपलब्धियों को बौना बना रही है……….अपने पर्यावरण की सुरक्षा करना आज की सबसे बड़ी जरुरत है……..लेकिन पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने में जब तक हरेक इंसान इसमें अपना योगदान नहीं करेगा, ये मुहिम सफल नहीं हो सकती……… हम भी कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर अपने आस-पास के पर्यावरण को साफ-सुथरा और प्रदूषण रहित रखने में योगदान कर सकते हैं………

  • पानी व्यर्थ ना बहायें
  • कचरे को ठीक जगह पर फेंके
  • बिजली को व्यर्थ खर्च ना करें
  • जंगलों को न काटे।
  • कार्बन जैसी नशीली गैसों का उत्पादन बंद करे।
  • उपयोग किए गए पानी का चक्रीकरण करें।
  • ज़मीन के पानी को फिर से स्तर पर लाने के लिए वर्षा के पानी को सहेजने की व्यवस्था करें
  • ध्वनि प्रदूषण को सीमित करें
  • वृक्षारोपण करें



    आप सोच रहें होंगे क्या इन छोटी-छोटी बातों से हमारा पर्यावरण सुरक्षित रह पायेगा…….जी हाँ ये छोटी छोटी बातें ही हैं जिन्हें ध्यान में रख कर हम अपने पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते है…..पर्यावरण सिर्फ चर्चा करने का विषय नहीं है, बल्कि जरुरत है कि हम इसे अपने आसपास महसूस करें और इसकी सुरक्षा का प्रण लें, सिर्फ २४ घंटे के लिए नहीं बल्कि हर चौबीसों घंटे के लिए………….यही समय है जब हम सब को एकत्रित होकर हमारे पर्यावरण को सुरक्षित रखने तथा उनका विकास करने की कोशिश करनी चाहिए…….नहीं तो पृथ्वी पर भी अन्य ग्रहों की तरह जीवन नामुमकिन हो जाएगा……

    आओ कुछ नया करें

    5पर्यावरण संतुलन के लिए जरुरी है कि हम वृक्षारोपण एवं वन्य जीव संरक्षण का महत्व समझे……….वृक्ष खाद्य श्रृंखला की प्रथम कड़ी हैं, अतः पर्यावरण के संरक्षण में वृक्षों का सबसे अधिक महत्व है और इनकी सुरक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है…….. क्यों ना हम अपने जन्म दिन पर, बच्चों के जन्मदिन पर, विवाह दिवस पर तथा अन्य मांगलिक अवसरों पर स्मृति के रूप में वृक्ष लगाये………सिर्फ वृक्ष ना लगाये अपितु उनकी देखभाल भी करें…….. पर्यावरण संतुलन के लिए आज इस स्वस्थ परंपरा को आरंभ करने की महती आवश्यकता है……. समाज को इस दिशा में सकारात्मक पहल कर इस प्रथा को स्थायित्व प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए………..


    जरुर देखे
    नीचे, भारत सरकार की “भारत विकास प्रवेशद्वार” का लिंक दिया गया है, जिस पर क्लिक करके आप पर्यावरण सुरक्षा के छोटे-छोटे सुझाव पा सकते हैं……….यहाँ, पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं इसकी रोचक जानकारी दी गई है……..एक बार जरुर देखिये………

    <http://www.indg.in/rural-energy/environment/92a93094d92f93e935930923-93894193091594d93793e-92a930-93894191d93e935/view?set_language=hi

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    19 प्रतिक्रिया

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    नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    Brysen के द्वारा
    May 25, 2011

    Great common sense here. Wish I’d thuohgt of that.

    Nikhil के द्वारा
    June 6, 2010

    पर्यावरण और उसकी सुरक्षा पर काफी सरल और उपयोगी लेख है. बहुत खूब.

      aditi kailash के द्वारा
      June 6, 2010

      आपका आभार………..

      Matty के द्वारा
      May 24, 2011

      HHIS I shluod have thought of that!

    aditi kailash के द्वारा
    June 5, 2010

    राजकमल जी, आपने सही कहा, पर प्रतियोगिता स्वस्थ होनी चाहिए……अगर आपको किसी की पोस्ट सही में पसंद आई तो उस पर अपने विचार तो देना ही चाहिए………खैर सब के अपने-अपने सोचने का तरीका होगा…..पर सब को खेल-भावना के साथ आगे चलना चाहिए…….

    rajkamal के द्वारा
    June 5, 2010

    अदिति जी -नमस्कार- में आपके सरे सूझआवो से सहमत हूँ-बस एक को छोड़ कर-धवनी प्रदुषण- क्योंकि में म्यूजिक बहुत ऊँची आवाज़ में सुनता हूँ- jo भी कोई kavita लिखता है में उस के ऊपर टूटी फूटी शायरी में कुछ न कुछ लिखने की कोशिश करता हूँ- यह कभी भी नहीं सोचा था की कभी अप्प पे भी लिखूंगा-लेकिन आप के कल के के जवाब की रौशनी में- \"अगर कुछ और पत्थर ज़माने ने हम पर फेंके होते तो अपना भी कोई मकान बन गया होता – किसी के दिल में न सही खुले आसमान के नीचे ही सही अपना भी कोई आशिया बन गया होता- इस bare में में संपादक मंडल को भी कुछ लिखने वाला हूँ-

      GOPI DUTT के द्वारा
      June 5, 2010

      Sir, Subject :- Soliciting your co-operation in fulfilling our sacred mission of cleaning the Yamuna River. A plan to clean and stop pollution in Yamuna within 7 months. My, aimis to serve the nation in various ways. You must be aware of the pollution being caused due to the disposal of used flowers and other worship materials in our Holy River Yamuna , and carried by all the rivers of India. Our organization, YFF, has undertaken a project to clean the rivers of INDIA starting with The YAMUNA, which will be starting from Delhi . We have devised a 3 Point Programme to help clean YAMUNA RIVER in DELHI. A) To stop people from throwing the Ceremonial flowers / Poly bags etc in YAMUNA River. B)All things being currently thrown in YAMUNA to be collected & a recycling process to be initiated. C) To organize children currently engaged in coin collecting & rag picking and give them employment & education. Sir, I Gopi Dutt want to draw your attention to problem that Delhi has been facing since as long as 10 yrs now. I am talking about the pollution in Yamuna caused by devotional material, Polybags, Flowers etc. Our govt., different NGOs and now Maharaja Sri Sri Ravi Shankar Ji have put their best efforts to clean up the river. Sri Sri Maharaja Ji is a spiritual guru he has no desire or want for money or fame. From South Africa to America, Iraq to Kashmir people worship him and follow him. Whole world wants to meet him, seem him and Seek his blessings, still he took over the charge to clean the Yamuna in Delhi from various disposed things. Maharaja Sri did the work with his own hands, he tried cleaning up the river by picking up the disposal on his own. He is the first spiritual guru in the world who left popularity and still tried to clean the Life Line of Delhi – The Yamuna. Do you know why? He did this to awaken Delhi. But did we WAKE UP? 24/4/10 Maharaja Ji finished up his tasks and camps associated with the river and cleaning up river banks. And on 25/4/10 people of Delhi disposed approx. 3,50,000kgs of used hawan samagri, flowers etc. I have some pictures to show this. The same way other NGOs, NDTV, the CM of Delhi (Yamuna Mei Jaan Dalo) with various programmes and camps have been trying to clean up the Yamuna but due to lack of a disposal sytempeople still turn to Yamuna for disposing the used materials during pujas into the Yamuna. We need a Disposal System that stops people from throwing these materials in the River. Even though Sri Ravi Shankar Ji tried his best to clean up the river but people still dispose off the samagri and flowers into the river which results that the efforst put in by all the people associated with the cleaning up the River in Vain. We all have been trying to clean it up for the past 10 yrs but it hasn’t stopped yet. Does anyone have a plan to stop this that here is no further need to clean n re-clean the river? The problem is that we only create awareness that people should not pollute the river but there are no measures taken to stop this pollution. Very soon Delhi is conducting the Common Wealth Games and people from all over the globe are going to travel the city. They talk about Indian Culture which fascinates them, but what are they going to think when they see the flowers used in worshipping God 10 minutes back are in the garbage can or in the river polluting it? What message are we delivering to them? We have to stop this pollution before other nationals start noticing. I have researched about the whole polluting issues for the past 7 years; have also noticed it in 22 different states. I have found the cause and the Solution of the problem. During my research I have met CM’s of different states and 162 MP’s and have brought their attention to the issue. I have also met the religious heads of different religions and they have all agreed upon the solution I have now. According to the time limits and need of the hour. They have found my solution to be the best possible way as there is no other option that stops pollution in as soon as 7 months after being implemented. In 2006, I met the President APJ Abdul Kalam and the Vice President B.S. Shekhawat and discussed the whole plan with them. The president initiated the project and promised to keep it running believing that this is the only way to save Yamuna. I have run the plan in small yet different places to check if what I had researched and concluded can be done practically. Thankfully, it was successful everywhere it was implemented. Now I want to implement the whole plan in the region of Delhi so that we can clean Yamuna and stop it from polluting further in future. I am planning to conduct a 40 days programme called Delhi ki Ganga – Yamuna Mahotsav. ( Swachcha Delhi – Swachcha Yamuna ) We would be highly obliged if you could kindly help us in organizing this and give us a meeting time where we could explain our Programme in detail. Fresh Air…. Fresh Idea…. Fresh Talent…. Fresh Energy…. I need your support Sir. Jai Hind Thanking you. Kind Regards, Gopi Dutt Akash 98185-92979 President – Youth Fraternity Foundation e- yff.india@gmail.com

      aditi kailash के द्वारा
      June 5, 2010

      राजकमल जी, जानकर अच्छा लगा कि आप भी पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं………ये छोटी-छोटी बातें ही हैं जो हमारे आने वाले कल को संवार रहे हैं……… वैसे किसने आप पर इतने पत्थर बरसाए और क्यों, हमें भी तो पता चले……..

      aditi kailash के द्वारा
      June 5, 2010

      Gopi ji, I am very happy to know that u r taking pains for cleaning up the river Yamuna……….but, as I am not based in Delhi, please let me know how can I will make any contribution in ur effort………

      rajkamal के द्वारा
      June 5, 2010

      अदिति जी-पहले ही दिन मेरा स्वागत yaha पतथरो से ही हुआ था-जेसे की हमारे जनकशान ब्लॉग में तुम्हारा क्या काम है-लेकिन अबी जा कर थोडा सा मुझको बरदआशत करना शुरू किया है-

      aditi kailash के द्वारा
      June 5, 2010

      राजकमल जी, ऐसा सभी के साथ होता है………जब आप नए होते हो तो लोग आपके बारे में नहीं जानते हैं, पर जब जानने लगते हैं तब आपको स्वीकार कर लिया जाता है…………ये प्रकृति का नियम है………..मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था………किसी ने तो यहाँ तक लिख दिया की मैंने टिप्पणियां पाने के लिए कोई लेख लिख दिया……..ये तो सब का अपना-अपना सोचने का तरीका होता है………हमें आहत नहीं होना चाहिए…..

      rajkamal के द्वारा
      June 5, 2010

      अदिति जी-जागरण जनकशन होम पेज पर जो सबसे ज्यादा कमेन्ट पाने वाले ब्लोग्स के बारे में लिखा रहता है-वोह सरासर गलत है-ज़मीनी हकीकतो से एक दम परे- उस के ही कारन कोई एक दुसरे पर कमेन्ट नहीं करता-की कही दूसरा आगे न निकल जाये- वेसे कमेन्ट की जगह सही वर्ड -वीउस या फीलिंग्स होना चाहिए था-


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