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पूछती हूँ सवाल पर मिलता नहीं कोई हल (कविता)

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क्या थे, क्या हैं, और क्या हो जायेंगे कल?
पूछती हूँ सवाल पर मिलता नहीं कोई हल


atyachar
हर तरफ है हिंसा, द्वेष और अत्याचार
भूल बैठे हैं सब क्या होता है प्यार
क्या ख़त्म ना होगा कभी जातीयता का ये दंगल?
पूछती हूँ सवाल पर मिलता नहीं कोई हल


garibi
मंहगाई, गरीबी और भूख से जनता है बेहाल
जल, बिजली, सड़क से हुआ सब का जीवन बदहाल
कब छटेंगे आम जीवन से अव्यवस्था के ये बादल
पूछती हूँ सवाल पर मिलता नहीं कोई हल


bhrashtachar
भष्ट है नेता, भ्रष्ट है अफसर, बढ़ रहा है भ्रष्टाचार
देख देश की दुर्दशा नहीं होते फिर भी शर्मसार
और कब तक करेंगे वो इस देश को घायल
पूछती हूँ सवाल पर मिलता नहीं कोई हल


bhrun hatya
भभक रही है चारो तरफ से दहेज़ की ज्वाला
भ्रूण-हत्या और बलात्कार से झुलस रही हर बाला
कब तक तड़प के ऐसे जीयेगी नारी यूँ हर पल
पूछती हूँ सवाल पर मिलता नहीं कोई हल


bomb
बस्ती उजड़ी, गांव उजड़े, उजड़ रहे हैं शहर
और कब तक चलेगा ये दुश्मनी का सफ़र?
उठाते हम ही क्यों नहीं अब कदम कोई अटल?
पूछती हूँ सवाल पर मिलता नहीं कोई हल


question
पूछती हूँ सवाल पर मिलता नहीं कोई हल

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51 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dr. SHASHIBHUSHAN के द्वारा
October 27, 2011

इतने निराश क्यूँ होते हैं, यूँ बिलख-बिलख कर रोते हैं, यूँ क्रन्दन करते अज्ञानी, कायर, गरीब या अवमानी। उठकर कराल हूँकार भरें, झंझावातों को पार करें, जो अत्याचारी है दिखता, उसकी छाती पर वार करें। जब अपना तेज दिखायेंगे, वह चूर-चूर हो जायेगा, मिट्टी में वह मिल जायेगा, तब नया सबेरा आयेगा।

Cheyanna के द्वारा
May 25, 2011

Haahhhaa. I’m not too bright today. Great post!

bharatswabhiman के द्वारा
October 20, 2010

|कविता तो आपने जून मे लिखी थी पर मैंने आज ही पड़ी |बहुत ही सुन्दर व् कम शब्दों मे बात को कहना |वाह क्या बात है | अब तक हमने सिर्फ नेताओ को बदला , सरकारों को बदला , पर जब तक व्यवस्था नहीं बदलेगी , कुछ नहीं होगा |

Jalal के द्वारा
June 16, 2010

स्वागत है अदिति जी बात तो बहुत सरल है लेकिन जितनी सरल है उतनी ही जटिल हो गयी है. आज लोग घर में खाना खाते हैं तो पड़ोसियों का हाल जान लेना कुछ अजीब संमझते हैं. खाना खाते समय दूसरों के बच्चों को बाहर कर देते हैं. हम समझ सकते हैं के ऐसे भूखे लोग क्या करेंगे. चाहे वोह कोई भी हो अगर हमें आसपास के लोगों से प्यार नहीं तो किसी से नहीं. हम इंसान कहलाते हैं लेकिन इंसानियत का कोई सुबूत नहीं देते. बात नेताओं की क्या करें . जो पहले सेवा हुआ करती थी वोह अब उनका करियर हो गया है. फिर जब अपनी रोज़ी रोटी के लिए लोग राजनीती करेंगे तो वह देश के लिए पहले सोचेंगे या अपने लिए. हमारे गाँधी जैसे नेताओं की कमी है जिसने कुर्सी न चाह कर सेवा की थी. तभी देश सुधर सकता है. आज हमारे नेता भी पार्टी बचाने के लिए कुछ भी करते हैं देश के लिए नहीं. देश तो उनके लिए मानो है ही नहीं वह तो पार्टी में रहते हैं. इन सब के बावजूद हम देश को सुधार सकते हैं अगर हम अपने आप को सुधार सके. हमें प्रण करना चाहिए की हम अच्छा काम करेंगे. किसी को हानि नहीं पहुंचाएंगे. तो आप इंतज़ार क्यों कर रहें हैं आज ही एक अच्छा काम करें दूसरों के इंतज़ार में ना रहें. येही एक रास्ता है. मैं तो चला. फिर मिलेंगे.

    aditi kailash के द्वारा
    June 16, 2010

    jalal ji, आपकी इतनी अच्छी प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार……बिलकुल सही कहा आपने आज के इस कंप्यूटर युग में लोग दुनिया जहान की जानकारी रखते है पर पड़ोस में क्या चल रहा है इससे अनभिज्ञ रहते हैं…..प्रतियोगिता की भावना ने पडोसी के बीच के प्यार को ख़त्म कर दिया है….. नेतागिरी की तो जितनी भी बात की जाएँ कम है…. सही कहा आपने किसी को भी दोष देने के बजाय इंसान को कोशिश करनी चाहिए की हम स्वयं को सुधारे…… फिर आइयेगा…..

dipakjain के द्वारा
June 9, 2010

बहुत बहुत धन्यवाद् इस रचना के लिए लेकिन ये सब रचनाएँ सिर्फ पढने में ही अच्छी लगती हैं फिर भी यदि आपकी इस रचना को पढ़कर किसी एक व्यक्ति में भी थोडा सा सुधर हो जाता है तो आपकी रचना सार्थक हो जाएगी दीपक जैन

    aditi kailash के द्वारा
    June 9, 2010

    देखिये दीपक जी, दीपक ये सोचकर तो जलना नहीं छोड़ देता कि उसकी थोड़ी सी रोशनी से क्या अंधकार मिट पायेगा, पर कई दीपक जब एक साथ जल उठते हैं तो अंधकार अपने आप मिट जाता है…….. उसी तरह कलम का काम भी है जगाना, आज नहीं तो कल लोग जागेंगे ही……..और सबसे पहले जागना होगा हमें, स्वयं को……… हम किसी एक को जगायेंगे, अगला किसी अन्य को…….. इस प्रकार एक दिन ऐसा आएगा कि सब जाग चुके होंगे……. आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार……..

    Deepak Jain के द्वारा
    June 9, 2010

    बहुत सही बात कही आपने , धन्यवाद्

    aditi kailash के द्वारा
    June 9, 2010

    आपकी पुनः प्रतिक्रिया के लिए आभार……..

neha के द्वारा
June 7, 2010

बहुत ही सुन्दर रचना……….तुम बिन कब तक रहूँ अधूरी और याद बहुत तुम आती हो के बाद ये पढ़कर तो मै तो आपकी A C हो गई हूँ ….

    aditi kailash के द्वारा
    June 8, 2010

    आपका धन्यवाद………आपने बहुत बड़ी बात कह दी……वैसे अभी गर्मी का मौसम चल रहा है, तो AC का अच्छा उपयोग भी होना चाहिए…..

Sachin के द्वारा
June 5, 2010

बहोत ही स्वाभाविक कविता हैं. मैं कोई टीका या टिपण्णी नहीं कर रहा हूँ. पर ये सभी सवाल हर आम आदमी के दिमाग में तभी से आते हैं जब से वोह स्कूल जाता हैं. नौकरी करता हैं. हर वोह महिला को ये सवाल आते हैं पर उसमें से ही कुछ ख़ास होती हैं जो ये सवाल को आम लोगो के सामने रख पाते हैं. तो उन ख़ास लोगों में शामिल होने के लिए अभिनन्दन. सवाल तो हो चुके लेकिन जवाब अभी भी नहीं मिल रहे हैं. सिर्फ बधाई आती हैं. “जवाब सभी जानते हैं पर बोल नहीं पाएंगे अपने ही नेताओं के नाम ले नहीं पायेंगे. नेताओ को चुनने के लिए वोट हमने ही दिया हैं. किस हिसाब से आज उनपर ऊंगली हम ऊथायंगे”

    aditi kailash के द्वारा
    June 5, 2010

    सचिन जी, आपने सही कहा कि सवाल सभी के दिमाग में आते हैं और हम इंसान हैं तो हमारे दिमाग में सवाल आने भी चाहिए……नहीं तो जानवरों और हम में कोई फर्क नहीं रह जायेगा…….हमें जवाब खोजने कि कोशिश भी करनी चाहिए…….और जवाब तब ही मिल पायेगा जब एक अच्छा नेता चुना जायेगा………और सोच समझ कर चुना जायेगा……….इसके लिए हम युवा वर्ग को ही आगे आना होगा……….और पार्टी और जाति से ऊपर उठकर, योग्यता के आधार पर नेता चुनना होगा……… शुभकामनायों के लिए आपका आभार………

    Jobeth के द्वारा
    May 25, 2011

    Didn’t know the forum rules allowed such birllniat posts.

R K Khurana के द्वारा
June 4, 2010

प्रिय अदिति जी, बहुत सुंदर कविता है ! आपने जो भी प्रश्न किये हैं उनका जवाब इन नेताओं और इस सरकार के पास नहीं है ! यह सवाल हमेशा कांटे की तरह चुभते रहेंगे ! हाँ ! टॉप 20 में आने की बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    खुराना जी, आपका बहुत- बहुत आभार……..और आपको भी मेरी तरफ से टॉप २० में आने की ढेर सारी बधाइयाँ…. इस मंच पर आपको देखकर काफी ख़ुशी होती है, एक परिवार का आभास होता है……….साथ ही सबसे बड़ी बात ये है कि नए जमाने के साथ चल रहे है आप….. मैंने आपकी कई पोस्ट पढ़ी, बहुत ही अच्छा लिखते हैं आप……….

    Koyie के द्वारा
    May 25, 2011

    AFAIC that’s the best anwesr so far!

rajkamal के द्वारा
June 4, 2010

aditi kailash ji- jab bhi koi achhi pratikirya deta hai to woh man ko gudgudati hai- jab koi buri pratikirya deta hai to woh dil+dimag+aatma par chot pahuchati hai- lekin dono hi haulaat me writer hamesha aagey hi badtey hai-ruktey nahi-lekin alag-2 andaz se-thanks

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    हाँ, जब कोई अच्छी प्रतिक्रिया देता है तो मन जरुर खुश होता है, पर ऐसी बात नहीं है कि आलोचना से चोट पहुंचती हो………क्योंकि सभी के सोचने का अपना-अपना तरीका होता है और आपके विचार जरुरी नहीं है कि दूसरों के विचारों से मेल खाए…….इसलिए बुरी प्रतिक्रिया का भी हमें स्वागत रहता है, क्योंकि इससे ही आगे कुछ नया सिखाने मिलता है……….रचनाकार इन्ही प्रोत्साहन और आलोचनाओं से ही तो निखरता है……… इसलिए अगर हमारी कोई रचना अच्छी न भी लगे तो बेझिझक कहियेगा, हमें सुधार करने का मौका मिलेगा………. आपका आभार…..

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    माफ़ कीजियेगा, कृपया सुधार कर पढ़े बुरी प्रतिक्रिया= आलोचना

rajkamal के द्वारा
June 4, 2010

aditi ji-agar koi achhi pratikirya mil jaye to woh man ko gudgudati hai- agar koi buri mil jaye to woh dil+dimag+aatma ko chot pahuchati hai- lekin dono hi haulat me writer aagey hi badta hai rukta nahi lekin alag alag tarikey se-thanks

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    एक बात और, आपसे एक निवेदन है…..आप अगली बार जब भी कोई पोस्ट करें या किसी को टिप्पणी दे कृपया hinglish वाला विकल्प दबाना ना भूले, क्योंकि हिंदी को हिंदी में पढना अच्छा लगता है हिंदी में भावों को समझना अच्छा लगता है.

rajkamal के द्वारा
June 4, 2010

very nice poem-i think i have no words- but solution is to control increasing population-lekin yeh bhi kuchek probems ka hi hal hoga- baki ke liye to ham sabko hi badlna padega-kyonki hami se milkar hi yeh samaj bana hai-

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    राजकमल जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद्, वहीँ हमें लग रहा था की आपकी कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई, अच्छी या बुरी…….इस मंच पर एक आप ही हैं शायद जो हर एक कविता को पढ़ते हैं और टिपण्णी देते हैं……. आप सही हैं, पहले हमें खुद को बदलना होगा, फिर आस-पास के लोगों को, फिर…………लिस्ट बहुत लम्बी है…….

bhagwat के द्वारा
June 4, 2010

गहरे और चुभते सवाल……..

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    गहरे हैं तो चुभना तो स्वाभाविक है……….पर कब तक और कब तक?

    Nona के द्वारा
    May 25, 2011

    You’ve hit the ball out the park! Incredblie!

Akhilesh के द्वारा
June 4, 2010

अदिति जी, मैंने अभी-अभी आपका ब्लॉग पढ़ा, एक बात मैं कहना चाहूँगा की आप काफी गहराई से सोचती, अच्छा लगा की नई पीढ़ी के लोग भी इस देश के बारे में सोचते हैं. इसी तरह लिखते रहिये. लोगों तक अपनी बातें पहुंचाते रहिये.

    Akhilesh के द्वारा
    June 4, 2010

    और हाँ, आपको मेरी तरफ से सुनहरे भविष्य की ढेरों शुभकामनायें.

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    अखिलेश जी, आपका आभार……..

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    बस हमारी भी यहीं कोशिश रहती है की अपनी बातें हम लोगों तक पहुंचा सकें………. आपका प्यार मिला, हम आपके आभारी हैं…………..

soham के द्वारा
June 4, 2010

आपके एक-एक सवाल दिल में कई-कई और सवाल पैदा कर रहे हैं और बयां कर रहे हैं इस देश की बदहाली………. आपको बधाइयाँ……….

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    सोहम जी, आप ने सही कहा……अगर हम देश की दुर्दशा को सोचे कितने सारे अनबुझे सवाल दिलों-दिमाग में छाने लगते हैं और एक का भी जवाब नहीं मिलता…….. आपका आभार……..

ilovepoetry के द्वारा
June 4, 2010

आपकी एक और अच्छी रचना…………..

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    आपका बहुत-बहुत धन्यवाद्……

    all village के द्वारा
    May 1, 2012

    ये हे राजस्थान क jila चित्तोर्ड गद क डीन्दोली (३१२२०३) क भरून हत्या का मामला हे येहा पर एक बंगाली डॉक्टर लिंग परिक्षण कर लडकियों का अवोसेनं करता हे . जिसेसे सभी गावो क लोग परेशान हे और वो नशीली दवाएयो से लडकियों को आदि बना रहा हे जिससे सभी आसपास गावो वाले लोगो को अपनी लडकियों क लिए परेशानी का कारेन बन रहा हे. करेपाया एस पर कड़ी कारवाही की जावे .


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