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वर-वधु गुण मिलाने से पहले क्यों ना सास-बहु गुण मिला लिए जाए (लेख)

Posted On: 2 Jun, 2010 Others,लोकल टिकेट में

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kundaliआजकल शादियों का मौसम जोरों पर है. हमारे आस-पास या रिश्तेदारी में कहीं न कहीं रोज कोई न कोई शादी हो ही रही है. भारत में पुराने समय से ये प्रथा चली आ रही है कि शादी से पहले वर-वधु के गुण मिला लिए जाये और ये प्रथा अभी भी कायम है. ऐसा माना जाता है कि जितने ज्यादा गुण मिलेंगे, विवाह उतना सफल रहेगा. पर आज के परिवेश में मुझे लगता है कि वर-वधु के गुण मिलाने से ज्यादा जरुरी है सास-बहु के गुणों का मिलना. क्योंकि आये दिन हमें सास-बहु के मतभेद के किस्से सुनने मिल ही जाते हैं.

saa2आखिर ऐसा क्यूँ होता है कि सास और बहु की कुंडली मिल नहीं पाती है? क्यूँ दोनों में हमेशा ३६ का आंकड़ा रहता है? इसका जवाब सास भी जानती है और बहु भी पर दोनों अपनी-अपनी जगह मजबूर हैं. और सबसे ज्यादा मजबूर तो बेटा/पति होता है, जो पिस रहा होता है माँ और पत्नी के बीच.


saas3अगर हम सास के नजरिये से देखे तो उसे लगता है कि बहु के आने से बेटा उससे दूर हो गया है. आज तक जो बेटा उसके सबसे करीब था, उसके जीवन में अब किसी और का स्थान ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है. यह भावना हर सास के मन में कभी ना कभी जरुर आती है कि दो दिन पहले आई बहु ने उसका बेटा उससे छीन लिया है. और अगर बहु थोड़ी ज्यादा गुणवान है, तब तो मामला ज्यादा ही बिगड़ जाता है. सास को लगता है कि ये मेरी बहु नहीं बल्कि मेरी प्रतिद्वंदी है. उस पर ये टी वी पर आने वाले सासु माँ के हर समय प्रिय रहने वाले सास-बहु के धारावाहिकों ने रही सही कसर पूरी कर दी है. उन धारावाहिकों का रोना-धोना देखकर हर सास को यहीं लगता है कि दुनिया कि सबसे दुखी सास वहीँ हैं.

बहुए जो कि नए ज़माने की नई नई पौध होती हैं, उनमे सहनशीलता की काफी कमी होती है. सास ने कुछ कहा नहीं कि मुँह फूल गया. सास कि हर बात उन्हें दकियानूसी लगती हैं. सास के इच्छा के विरुद्ध काम करना वो अपना हक समझती हैं. साथ ही उसके मन में कहीं ना कहीं पहले से ही ललिता पंवार वाली सास कि तस्वीर बनी होती है.

saa4सास-बहु का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता होता है जहाँ आपसी मनमुटाओं और तकरार होना दैनिक जीवन का हिस्सा है. पर आपसी विश्वास और एक दुसरे के प्रति ज़िम्मेदारी समझने से इस रिश्ते में प्यार बढ़ सकता है. सास को चाहिए कि वो बहु को अपनी बेटी जैसा प्यार दे. बहु के साथ ऐसा व्यव्हार कभी ना करें जो अपनी बेटी के साथ कभी नहीं करना चाहेंगी. बहु तो आज के ज़माने की समझदार युवती है. उसे चाहिए की छोटी-छोटी बातों को नज़रंदाज़ करके घर का माहौल खुशनुमा बनाये रखे. सास भी तो माँ की तरह होती है, या यूँ कहूँ कि माँ से बढ़कर होती है तो गलत नहीं होगा. क्यूंकि यहीं सास है जिसने आपको पति जैसा प्यारा उपहार दिया है. जब आप माँ की बातों का बुरा नहीं मानती तो फिर सास की बातों का बुरा क्यूँ मानना. आज समय की यहीं मांग हैं कि सास अपनी बहु में अपनी बेटी और बहु अपनी सास में अपनी माँ को देखे तो ये सास बहु के झगड़े हमेशा के लिए ख़त्म हो जायेंगे.

अगर आप सास हैं तो

  • हमेशा बहु से अपनी बेटी की तरह व्यवहार करें.
  • बहु अपना घर परिवार छोड़कर आपके घर आई है तो उसे घर के एक सदस्य की तरह अपनों में शामिल करें ना कि परायेपन का अहसास दिलाये.
  • दो परिवारों कि रीती-रिवाजों में बहुत फर्क होता है. अगर बहु को आपके घर के रीती-रिवाज़ पता नहीं हैं तो बहु को ताना ना दे, बल्कि अपने घर के रीती-रिवाज़ सिखाये.
  • यदि बहु कामकाजी है तो घर के कामों में उसकी मदद करें.


  • अगर आप बहु हैं तो

  • सास को अपनी माँ की तरह आदर दें.
  • ससुराल के रीती-रिवाजों का पालन करे.
  • छोटी छोटी बातों को मन से ना लगाये.
  • सास को कभी कभी अपने साथ खरीददारी करने या घुमाने जरुर ले जाये.
  • यदि आप कामकाजी हैं तो घर के सारे काम का बोझ सास पर ना डाले, बेहतर होगा अगर नौकर रख ले.

  • अगर इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान हर सास और बहु रखे तो इससे प्यारा रिश्ता और कोई नहीं हो सकता है.

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    नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    BertieorBirdie के द्वारा
    May 25, 2011

    I bow down humbly in the persecne of such greatness.

    Janisa के द्वारा
    May 25, 2011

    Now I feel stupid. That’s cealred it up for me

    allrounder के द्वारा
    July 13, 2010

    अदितिजी बहुत – बहुत धन्यबाद इस लेख से रूबरू कराने का ! मैंने ये लेख पहले नहीं पढ़ा था, अगर मैंने ये लेख पहले पढ़ लिया होता तो शायद मैं नारी ही नारी पर भारी कभी नहीं लिखता ! क्योंकि मेरे और तुम्हारे लेख मैं काफी समानताएं हैं, सन्देश लगभग एक सा ही है ! अंतर सिर्फ बात को कहने का है, जहाँ तुम्हारा ये लेख किसी Classice Film की भांति है वहीँ मेरा लेख किसी Masaala Film की तरह है ! यही अंतर है एक अच्छे लेखक और एक काम चालू लेखक मैं ! हाँ इतना जरुर कहूँगा की अगर मेरे लेख मैं तुम्हारे लेख से मिलता – जुलता कुछ है तो मात्र संयोग से !

      aditi kailash के द्वारा
      July 13, 2010

      चलिए देर से ही सही आपने पढ़ तो लिया… वैसे इसमें कोई बुरी बात नहीं होती कि आप इसे पहले से पढ़कर भी वो लेख लिखते, क्योंकि सभी को अपने विचार व्यक्त करने कि आज़ादी है… और हाँ एक बात बताना चाहेंगे… आपके रेल यात्रा वाले लेख के समय ही हम भी अपनी रेल यात्रा के बारे में एक लेख लिख चुके थे और पोस्ट करने ही वाले थे कि आपका लेख आ गया, और हमने उसे कुछ दिनों के लिए ठन्डे बस्ते में डाल दिया…. आपकी फिल्मों की बात ने हमें हँसा दिया, वैसे ज्यादातर लोगों को मसाला फ़िल्में ही पसंद आती हैं….

      allrounder के द्वारा
      July 14, 2010

      आपने बिलकुल सही कहा अदितिजी, कि आपका लेख पढ़कर भी लेख लिखने कोई बुराई नहीं थी, किन्तु बात बुराई कि नहीं Satisfaction की है, जो की हमारे लिए, बहुत मायने रखता है, और संभवता आपके लिए भी, वर्ना आप हमारा जनरल डब्बे का सफ़र देखकर आप अपने VIP डब्बे का सफ़र ठन्डे बसते मैं क्यों डालतीं?

      aditi kailash के द्वारा
      July 15, 2010

      ऐसी बात कतई नहीं है…. असल में हमारा लेख कुछ अलग ही विषय में था, पर उस समय रेलवे के विषय में ढेर सारे लेख आ रहे थे इसलिए कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया उसे….

      allrounder के द्वारा
      July 15, 2010

      अदितिजी, No 4 पर आने के लिए बहुत-बहुत बधाई ! हम जानते हैं की आपका लेख मेरे लेख से बिलकुल ही अलग होगा ! किन्तु मुझे लगता है एक बात आपने तय कर ली है, हमारी हर बात का जवाव आप नकारात्मक ही देंगी ! चलिए हमें आपके रेल पर लिखे इस लेख का इंतज़ार रहेगा ! अब भारतीय रेल की तरह इसे ज्यादा लेट न करें, कृपया इसे प्रकाशित करें, वर्ना हमारी आत्मा पर एक बोझ रहेगा की हमारे जनरल डब्बे की बजह से आपको अपने प्यारे लेख की कुर्बानी देनी पढ़ी, और पाठक भी एक अच्छे लेख से वंचित रह गए !

      aditi kailash के द्वारा
      July 16, 2010

      ऐसी कोई बात नहीं है सचिन जी, बस आजकल थोडा व्यस्त हैं अपने रिसर्च में, जल्द ही पोस्ट करने की कोशिश करेंगे….

    ashukla25 के द्वारा
    June 8, 2010

    Good Imegination

      aditi kailash के द्वारा
      June 8, 2010

      Thank you…

    subhash के द्वारा
    June 6, 2010

    aadikaal se hi inka 36 ka ankda hai par jis parivar main inka mel hai vo sada sukhi hai

      aditi kailash के द्वारा
      June 6, 2010

      सही कहा आपने सुभाष जी…….आपका आभार……..

    samta gupta kota के द्वारा
    June 4, 2010

    अदिति जी ,बहुत समझदारी भरा और बढ़िया लेख है,धन्यवाद्,

      aditi kailash के द्वारा
      June 4, 2010

      समता जी, पुनः आपको अपने ब्लॉग पर पाकर बहुत ख़ुशी हुई………आपको पोस्ट पसंद आई, आभार……आगे भी आपकी उम्मीदों की कसौटी पर खरे उतरने की कोशिश रहेगी……….

    rajkamal के द्वारा
    June 3, 2010

    aditi kailash ji-aapko bahut badhai-ki aapka name top 20 ki list me aa guya hai-vese mein apni ek kavita me advance me hi coming blogstar ko badhai de chuka hoon- aapme ek khas baat hai ki aap blog ke sath-2 kavita bhi likhti hai- aise hi ek lady ki yuha par mene english me bahut hi simple kavita padi thi-to yeh sabh kalayen god given gifts hoti hai

      aditi kailash के द्वारा
      June 3, 2010

      राजकमल जी, जानकारी के लिए आपका धन्यवाद…….आपके बताने के बाद ही हमने वो लिस्ट देखी…….असल में हमें इस मंच से जुड़े हुए अभी १५ दिन भी नहीं हुए हैं, तो हमें उम्मीद ही नहीं थी कि हमारा भी वहां नाम होगा………..वैसे ये सब आप जैसे पाठकों का ही प्यार हैं जिन्होंने हमारी रचना को सराहा है…..हमने कभी स्टार बनने का सपना तो देखा नहीं है………बस यहाँ अपने विचारों को अभिव्यक्त कर देते हैं…….

      aditi kailash के द्वारा
      June 3, 2010

      एक बात तो पूछना हम भूल ही गए कि किसे आपने बधाई दे दी है………..किसे बना दिया है आपने स्टार…….और कौन सी कविता है वो……….

    abhijeet के द्वारा
    June 3, 2010

    सबसे ज्यादा मजबूर तो बेटा/पति होता है, जो पिस रहा होता है माँ और पत्नी के बीच. बिलकुल सही लिखा आपने…………

      aditi kailash के द्वारा
      June 3, 2010

      अभिजीत जी, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस सास-बहु कि लड़ाई में बेचारा बेटा/पति बहुत मजबूर होता है. ना तो वो अपनी माँ का साथ दे सकता है और ना ही पत्नी का.

      kmmishra के द्वारा
      June 4, 2010

      सत्य वचन कहा आपने । ये दोनों ऐसी कौम हैं जो भारत पाकिस्तान के माफिक हमेशा लगे रहते हैं । अगर सास बहु की कुण्डली मिलाने बैठेंगे तो एक भी शादी नहीं होगी क्योंकि इन की कुण्डलियों कभी न मिलंगी ।

      aditi kailash के द्वारा
      June 4, 2010

      मिश्रा जी, आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर बहुत मजा आया……लगता है आप भी इन दोनों कौमों के सताए हुए हैं……

    geetanjali के द्वारा
    June 3, 2010

    मैं भी अपनी सास के साथ रहती हूँ. कई बार ना चाहते हुए भी हम दोनों में अन-बन हो जाती है. पता नहीं क्यों, शायद ये रिश्ता ही ऐसा होता है.

      aditi kailash के द्वारा
      June 3, 2010

      गीतांजली जी, ऐसा अक्सर इस रिश्ते में होता है. पर अगली बार जब भी उनकी कोई बात आपको बुरी लगे तो कुछ भी प्रतिक्रिया देने से पहले सोचियेगा कि अगर आपकी माँ ने ये बात कही होती तो आपको इसी तरह बुरा लगता……….धीरे-धीरे आपके मन में सास के प्रति सम्मान बढ़ता जायेगा………

    rajkamal के द्वारा
    June 2, 2010

    aditi ji -aap ek baat shayad bhul gayi ki aajkal jyadatar joint family nahi hoti- hamko koi bahut hi powerfull personality chahiye- shahad raja ram mohan rai jaisi- iwoh koi aurat bhi ho sakti hai -wese bahut si divine ladies bhi hai-par unka asar apne followers par hi hai-jabki hamko koi sire se samaz ki soch ko badlane wala chahiey- aaj kal ke mahoul agar kisi ki baat 2-4 logo par bhi asar kar jaye to samjho ki maqsad poora hua-

      aditi kailash के द्वारा
      June 2, 2010

      राजकमल जी, आप ने सही कहा कि अब संयुक्त परिवार नहीं होते हैं. पर ये हमारे लिए अच्छा संकेत नहीं हैं. सयुंक्त परिवार में जहाँ लोग आपस में एक दुसरे से बंधे होते है वहीँ सुख-दुःख का ख्याल भी बखूबी रखते हैं. आज की ज्यादातर बहुएं कामकाजी हैं, जिसके कारण अधिकतर सास अपने पोते-पोतियों की देखभाल के लिए लिए बहुओं के साथ रहती हैं. मेरी कई सहेलियों की सास उनके साथ रहती हैं, उन सास बहु की परेशानियाँ देख कर ही मैंने ये लेख लिखा है. आज के परिवेश में ये जरुरी है कि उनमें आपस में प्यार बना रहे. आपकी आगे की बातें मुझे समझ नहीं आई.

      aditi kailash के द्वारा
      June 2, 2010

      आपकी आगे की बातें मुझे समझ नहीं आई. क्षमा चाहूंगी .


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