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तुम बिन कब तक रहूँ अधूरी (कविता)

पोस्टेड ओन: 30 May, 2010 जनरल डब्बा में

intezarजब से गये हो तुम मेरे सजना
याद नहीं दिन रात महीना

दिन सूना है रात है सूनी
दिल की हर एक बात है सूनी

बिंदियाँ रूठी रूठे कंगना
भूल गई अब सजना-संवरना

नैना तेरे दरस को तरसे
आँखे मेरी हरदम बरसे

आकर मेरी प्यास बुझा दो
मिलने की कुछ आस बंधा दो

आ भी जाओ अब तो सजना
मुश्किल हो गया तुम बिन जीना

अब न सही जाये ये दूरी
तुम बिन कब तक रहूँ अधूरी

तुम बिन कब तक रहूँ अधूरी



Tags: नारी  तुम बिन कब तक रहूँ अधूरी  याद  कविता  इंतज़ार  अधूरापन  aditi kailash  Hindi poem  

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38 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashukla25 के द्वारा
June 8, 2010

हर तरफ़ पयार की शम्मा को जलाना होगा मादर-ए- हिंद को मिल जुल के बचाना होगा वह ज़मीं जिसपे कभी उगते थे चाहत के शजर लग गई आज उसे धर्म सेयासत की नज़र रहनुमां आज न गीता है न कोई कुरआं धर्म के नाम पे कुरबां हैं हजारों इन्सां जालिमों ने तो अभी ज़ुल्म की हद ही करदी दिनबदिन बढ़ती ही जाती है ये दहशत गर्दी है कहीं मॉल पे हमले तो कहीं जनों पर कैसी आफत है पड़ी आज ये इंसानों पर यों तो अल्लाह, खुदा, बोले, या वो राम कहे क्या ज़माने में कोई है? जो खुलेआम कहे सबकी आंखों में वही अश्क वही सपने हैं चाहे हिंदू हों,मुसलमां हों, सभी अपने हैं एक इंसान जिस इन्सां से परेशां होगा सच तो ये है के वो हिंदू न मुसलमां होगा हम अगर साथ हों तूफां से निकल सकते हैं ये ज़मीं क्या है ? ज़माना भी बदल सकते हैं पर ये मुमकिन है मुहब्बत से, सियासत से नहीं जुल्म से जुर्म से जज्बात से ताक़त से नहीं ये जहाँ पयार से आबाद है,नफरत से नहीं कर लो वादा ये वसी से के शरारत से नहीं हमको बस पयार से ही पयार है, वहशत से नहीं ये नये साल का वादा है, निभाना होगा हर तरफ़ पयार की शम्मा को जलाना होगा.

    ashukla25 के द्वारा
    June 8, 2010

    Aditiji mai naya user hoon. Par apki kavita achchi hi nahi bahut achchi lagi. Kya maulik hai???????????

    aditi kailash के द्वारा
    June 8, 2010

    शुक्ला जी, बहुत ही प्यारे विचार……….बहुत ही उम्दा रचना…….बधाई तथा धन्यवाद्…….

    aditi kailash के द्वारा
    June 8, 2010

    शुक्ला जी, आप मेरी पोस्ट “क्या आप एक अच्छा ब्लॉग लिखना चाहते हैं ” प्रतिक्रियायों के साथ पढ़े, हिंदी में लिखने में मदद मिलेगी……… आपके प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद्……..जी हाँ, ये हमने ही लिखी है…….बस थोडा बहुत लिख लेते हैं……..

    G Umashanker के द्वारा
    June 9, 2010

    रचना सराहनिय है.

    aditi kailash के द्वारा
    June 9, 2010

    उमाशंकर जी, आपको हमारी कविता “तुम बिन कब तक रहूँ अधूरी ” पसंद आई………आपका आभार……..

ssachin2910 के द्वारा
June 7, 2010

अदितिजी मैंने साथी नाम का ब्लॉग तो तैयार कर लिया है. पर Hinglish में कैसे लिखू समज मैं नहीं अ रहा है. कुछ बता सकती है प्लीज़.

    aditi kailash के द्वारा
    June 7, 2010

    सचिन जी, आप मेरा नया लेख “एक अच्छा ब्लॉग कैसे लिखे” पढ़े, मैंने खास आप जैसे नए ब्लोगेर के लिए ही लिखा है…….उसमें विस्तार से दिया गया है की आप हिंदी में कैसे लिखे………फिर भी अगर कोई परेशानी हो तो जरुर पूछियेगा……..

Sachin के द्वारा
June 6, 2010

में एक ब्लॉग तयार करना चाहता हु पर हो नहीं प् रहा है. यहाँ से में लोगिन नहीं कर प् रहा हूँ. रेगिस्टर तो कर दिया हैं पर पास्वोर्ड नही मिल रहा. क्या आप कुछ बता सकती है. sachin297780@yahoo.com सहकार्य के लिए पहले से ही धन्यवाद.

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    सचिन जी, आप अपने मेल अकाउंट चेक कीजिये, वहां एक मेल आई होगी, उस पर लिंक दिया होगा, उसे क्लिक कर आप लोगिन कर सकते है………अगर कोई और समस्या आती है तो बेझिझक पूछियेगा……..

    ssachin2910 के द्वारा
    June 7, 2010

    अदितिजी , मैंने साथी नाम का ब्लॉग तैयार किया हैं. पर Hinglish मैं कैसे लिखू समज मैं नहीं आ रहा है. क्या आप कुछ मार्गदर्शन कर सकती है.

    aditi kailash के द्वारा
    June 7, 2010

    सचिन जी, आप “मेरा ब्लॉग” आप्शन पर जाकर डेशबोर्ड पर दांयी और न्यू पोस्ट का link है………उसे क्लिक करें फिर HTML पर क्लिक कर टाइप करें……… फिर भी समस्या हो तो जरुर पूछे…….

Sachin के द्वारा
June 6, 2010

नैनो में तुम नीर न लाओ बिरहा के तुम गीत न गा ओ जुदाई की उम्र तो बहोत छोटी है आज नहीं तो कल मुलाकात फिर होती है.

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    सही कहा आपने जुदाई की उम्र छोटी होती है, पर जुदाई का भी अपना मजा होता है………मिलन की ख़ुशी दुगुनी हो जाती है……..

Sachin के द्वारा
June 6, 2010

कविता अच्छी है. दिल की हालत लिखी है, अच्छी बात हैं. याद तुम्हारी हर पल आती बिरहा के तीर खूब चुभाती नयनो मैं हर दम नीर है लाती याद तुम्हारी हर पल आती.

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    सचिन जी, टिप्पणी के लिए आभार……….आपने भी अच्छी पंक्तियाँ लिखी हैं……बधाई…..

aditi kailash के द्वारा
June 6, 2010

आप सभी के लिए, जो नायिका की विरह वेदना से चिंतित थे, एक अच्छी खबर है…………नहीं…नहीं, नायिका के नायक वापस नहीं आये हैं……….हाँ पर उनका जवाब आ गया है, एक कविता के रूप में………..”अक्सर याद बहुत तुम आती हो” के रूप में…….पढियेगा जरुर………

piyush1104 के द्वारा
June 5, 2010

kavita thik hai par jaha tak mera manna hai ki virah hi prem ki kasouti hoti hai.. jaise sona aag me tap kar kundan banta hai vaise hi prteecha ki agni me jal kar hi prem apni purta ko prapt hota hai ………

    aditi kailash के द्वारा
    June 5, 2010

    बिलकुल सही कहा पियूष जी आपने………जब तक हमें विरह की वेदना का अहसास नहीं होगा, तब तक मिलन की ख़ुशी का भी अंदाजा नहीं होगा……… रोज का मिलना भी क्या मिलना है… ख़ुशी तो तब हुई जब हम बरसों बाद मिले…… आपका आभार………

bhagwat के द्वारा
June 5, 2010

sundar kavita…….

    aditi kailash के द्वारा
    June 5, 2010

    आपका आभार………

kmmishra के द्वारा
June 4, 2010

अच्छी कविता । नायिका के साजन आ जाये तो बता दीजियेगा । हम लोग उसकी विरह वेदना से चिंतिति हैं ।

    kmmishra के द्वारा
    June 4, 2010

    चिंतिति x चिंतित

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    आपको कविता पसंद आई …..आपका आभार….. नायिका के दुःख में आप भी चिंतित हैं ये जान कर अच्छा लगा…….जैसे ही उनके साजन आ जायेंगे हम आपको खबर कर देंगे…..और आपको यहाँ हैप्पी हैप्पी वाली कविता मिल जाएगी……….भगवान से दुआ कीजिये कि आपको ज्यादा दिनों तक चिंतित ना रहना पड़े……..

ilovepoetry के द्वारा
June 3, 2010

आपकी ये कविता पढ़कर मुझे फिल्म “तुम बिन” का शीर्षक गीत याद आ जाता है……….वैसे दोनों में शब्दों की समानता तो नहीं है, पर भाव एक ही हैं…………..

    aditi kailash के द्वारा
    June 3, 2010

    वो मेरे पसंदीदा गानों में से एक है……..

rajesh के द्वारा
June 3, 2010

आपकी रचना अच्छी लगी………..प्रेम रस पर और लिखे………..

    aditi kailash के द्वारा
    June 3, 2010

    राजेश जी, वैसे से तो मैंने इस रस में काफी लिखा है, पर अभी पोस्ट नहीं किया है………… आपका आभार……….

aashu के द्वारा
June 3, 2010

उम्दा रचना……..

    aditi kailash के द्वारा
    June 3, 2010

    आपको कविता पसंद आई………आपका धन्यवाद………..अन्य पर भी आपकी राय जानना चाहेंगे……

minu के द्वारा
June 3, 2010

बहुत अच्छी कविता………तुम बिन कब तक रहूँ अधूरी……….नारी और पुरुष गाड़ी के पहियों के समान हैं जो एक दुसरे के बिना अधूरे हैं…………….

    aditi kailash के द्वारा
    June 3, 2010

    आपने बिलकुल सही कहा……..नारी के बिना पुरुष अधुरा है और पुरुष के बिना नारी…….. आपको कविता पसंद आई, आभार………..

rajkamal के द्वारा
May 31, 2010

kavita koi bhi likhe mujko bahut hi acha lagta hai- jis tarah app ko apni itni achi kavitao pe pratikirta ka intezaar rehta hai-isi tarah dusro ko bhi-app aur nahi to jitni bhi ladies poets hai yuha par-woh to khuldili se ek dusrey par comment kar sakti hai-jabki hamko lakh bar sochna padta hai -

    aditi kailash के द्वारा
    June 1, 2010

    राजकमल जी, आपकी पुनः पतिक्रिया का धन्यवाद. कविता की लेखिका तो मैं ही हूँ पर नायिका मैं नहीं हूँ. उम्मीद है आगे भी इसी तरह उत्साह वर्धन होता रहेगा. आपसे एक निवेदन है, आप लिखते अच्छा हैं, पर अगर हिंदी में लिखे तो पढ़ने वालों को भी मजा आएगा.

rajkamal के द्वारा
May 30, 2010

aisa lagta hai ki kavita ki nayika ki नयी-२ shadi hui hai- varna baad me to…..

    aditi kailash के द्वारा
    May 31, 2010

    नायिका हमें ये बताना तो भूल ही गई ………..अगली बार मिलेंगे तो जरुर पूछेंगे……………..

ilovepoetry के द्वारा
May 30, 2010

बहुत अच्छी कविता…….विरह की वेदना उड़ेल दी आपने……..इसी तरह लिखते रहिये………

    aditi kailash के द्वारा
    May 30, 2010

    आपको कविता पसंद आई, आभार………..उम्मीद है आगे भी इसी तरह प्यार मिलता रहेगा…….




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