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एक मुलाकात बेरोजगारी बहन से (कविता/हास्य-व्यंग्य)

Posted On: 29 May, 2010 में

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राह चलते एक दिन मिल गई हमे बेरोज़गारी बहन
सामने आते ही उनसे मिले हमारे ये दो नयन

नयन मिले तो बात करनी ही पड़ी
हमने पूछा, कैसी हो बड़ी बी?

हमारी बातें सुनकर पहले तो वो शरमाई
थोडा सा इठलाते हुए फिर हमसे फरमाई

क्या बताये बेगम तुम्हें अब अपने दिल का हाल
फैल चूका है चारों तरफ मेरा ही माया जाल

गली गली में होने लगे अब तो मेरे ही चर्चे हैं
रोज ही देखो छपने लगे मेरे नाम के पर्चे हैं

साथ दे रही है आज की शिक्षा और सरकार
मिल रहा है दोनों से ही मुझे ढेर सा प्यार

बन गई हूँ अब तो मैं हर युवा के दिल की धड़कन
फिर भी छुड़ाना चाहते हैं सब मुझसे अपना दामन

कहे देती हूँ……..इतनी जल्दी मैं उनका साथ नहीं छोडूंगी
अभी-अभी तो पकड़ा है…………… ये हाथ नहीं छोडूंगी

इतनी जल्दी साथ नहीं छोडूंगी…….

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Maharathi के द्वारा
June 12, 2015

डा. अदिति कैलाश जी सटीक चित्रण किया है। बधाई।। महारथी।।

rajkamal के द्वारा
July 21, 2010

ADITI JI ….KIRPA KARKE IS KO DUBAARA AAJ KE DINO ME POST KARE …… AAP NE EK BAAR SHAYRI KE BAARE ME PUCHA THA … SHAYRI ACTIVE AUR PASSIVE KA FARK HI HAI .. ME ROTI KHATA HU..ROTI MERE DWARA KHAI JAATI HAI..


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