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भारत माँ! देख तेरे बेटों का क्या है हाल (कविता)

Posted On: 28 May, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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संक्षेप में भारतीय किसान की दर्द भरी कहानी प्रस्तुत है, जिसे एक कविता के रूप में पिरोने का प्रयास किया है. उम्मीद है पढ़कर आपको दर्द जरुर होगा.


अच्छी फसल की आशा में, बीज बोता है हर एक किसान
बीटी कपास के जाल में फँसकर, छोड़ा है इसने अब बोना धान

इस गरीब के लिए नहीं है देखो, हमारे बैंकों में कोई भी क़र्ज़
साहुकार से लेकर पैसे, करता है पूरे ये अपने सब फ़र्ज़

साहुकार से ही लेता है, हर जरुरत में ये पैसे उधार
रखकर गिरवी जेवर-ज़मीन, नहीं मानता किस्मत से हार

हर साल खरीद के लाता है ये, चमकीले-महंगे विदेशी बीज
खाद और दवाई डालकर, खेतों को देता है पसीने से सींच

देखभाल करता है ये फिर, अपनी फसल की दिन-रात
चाहे सर्दी हो गर्मी हो, या हो चाहे भीषण बरसात

क्या करेगा वो भी जब, नहीं देती है किस्मत ही साथ
मेहनत करने के बाद भी, असफलता ही लगती है हाथ

बीमारीमुक्त बीज में भी जब, लग जाती है ढेरों बीमारी
बेवक्त अकाल के आने से, नष्ट हो जाती है फसलें सारी

फसल ख़राब हो जाने से, कैसे होगी बोलो अब कोई कमाई
घर में भी तो है एक बेटी, हुई है दस दिन पहले ही सगाई

सोचो कैसे भरेंगे पेट, कैसे होगी अब इस बेटी की शादी
फसल के न होने से तो अब, हो गई है उसकी पूरी बर्बादी

साहुकार भी देगा नहीं, अब फिर से उसे पैसे उधार
जेवर तो गए ही है बीवी के, अब देने पड़ेंगे एकड़ चार

ज़मीन और घर की चिंता में, चिता का रह रहकर आता है ध्यान
खेत में डालने की दवाई खाकर, दे देता है वो एक दिन अपनी जान

कितना असहाय हो गया है यारों, सोचो इस देश का किसान
हर आधे घंटे में जो दे रहा है, इसी ज़मीन पे अपनी जान

इसी ज़मीन पे अपनी जान
इसी ज़मीन पे अपनी जान


शायद आप में से काफी कम लोगों को पता हो कि हमारे लिए दिन-रात मेहनत कर के अपना पसीना बहाने वाला भारत का किसान कितने अवसाद में है. ये वही किसान है है जो अपनी मेहनत से फसल उगाता है, पर जिसे खुद ही साल में कई दिनों तक भूखा ही सोना पड़ता है. यदि हम सरकारी डाटा पर विश्वास करे तो हर एक साल में औसतन १६,६३२ भारतीय किसान आत्महत्या कर रहे हैं. दुसरे शब्दों में कहे तो हर आधे घंटे में कही ना कही, कोई ना कोई किसान अपनी जान ले रहा है. सबसे बड़ी चिंता कि बात तो ये है कि आत्महत्या करने वाले किसानों में सबसे ज्यादा १५-२९ वर्ष कि आयु के युवा किसान है.

आखिर क्यूँ हो रहा है ये सब? क्या गलत हो रहा है उनके साथ? ये एक बहुत बड़ा प्रश्न है, जो यहाँ अभी बयां करना संभव नहीं है. अगली बार जरुर चर्चा करुँगी इस बारे में. उम्मीद है आपका भी करूणा से भरा दिल जरुर रो रहा होगा ये पढ़कर और आपको जरुर मजबूर कर रहा होगा कुछ सोचने पर. अपने विचार बताइयेगा जरुर, मुझे इंतजार रहेगा.

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

चन्द्र प्रकाश घींटाला के द्वारा
July 29, 2014

देश का भविष्य युवा किसान है देश का 70% पैसा ॠण बड़े व्यापारियों को दिया जाता है अगर कीसान यह पैसा भारत अगर किसानो को ॠण दिया जाये तो तो भारत एक सुख सम्पन्न देश हरा भरा भारत कहलायेगा

Akhilesh के द्वारा
June 4, 2010

अब इसे आप देश की दुर्दशा ही कहेंगे कि ज्यादातर लोग अपने आस-पास क्या हो रहा है,उसके बारे में सोचते ही नहीं. काफी अच्छी पोस्ट है. शहर के जो लोग किसान के बारे में नहीं जानते, वो भी अगर इसे पढ़े तो उसकी दुखद कहानी उनकी आँखों के सामने छा जाएगी. रोजमर्रा से हटकर एक अलग विषय पर लिखने के लिए आप बधाई कि पात्र हैं.

    aditi kailash के द्वारा
    June 4, 2010

    अखिलेश जी, आपका पुनः आभार…………इसी तरह अन्य पोस्ट पर आगे भी आपके विचार जानना चाहेंगे……

jack के द्वारा
May 28, 2010

वाकई भारत में किसानों की दशा दयनीय हैं.

    aditi kailash के द्वारा
    May 28, 2010

    ये बात जानते सभी हैं, पर इस पर सोचना कोई नहीं चाहता. हर आधे घंटे में समाज के इस वर्ग में कोई ना कोई आत्महत्या कर रहा है, पर ना सरकार के पास वक़्त है और ना ही समाज के पास.


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