मुझे भी कुछ कहना है

विचारों की अभिव्यक्ति

46 Posts

1665 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1876 postid : 36

दर्द (कविता)

Posted On: 24 May, 2010 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

farmer
भारत के
किसान के आंसू
जो सींचते थे
कभी फसलों को
अब बहते हैं
उसकी आँखों से
खून की बूंदें बनकर
फिर छीन लेते हैं
उससे
उसी की ही ज़िन्दगी
और बना देते हैं
उपजाऊ जमीन को
बंजर
सदा के लिए

| NEXT



Tags:                 

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

anamika के द्वारा
July 10, 2010

वास्तविक चित्रण है किसानो की और उपजाऊ ज़मीन की ………..

    aditi kailash के द्वारा
    July 10, 2010

    अनामिका जी, काफी करीब से देखा है हमने इस दर्द को… आपके प्रोत्साहन के लिए आभार…

babali के द्वारा
June 9, 2010

इस दर्द का दर्द कोई नहीं समझ सकता.

    aditi kailash के द्वारा
    June 9, 2010

    बबली जी, सही कहा आपने इस दर्द का दर्द कोई नहीं समझ सकता……भारत में किसान किस दयनीय हालत में जी रहे हैं ये किसी से छुपा नहीं हैं, पर कोई सोचना नहीं चाहता………आपने इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी हमें बहुत अच्छा लगा………चलो कोई तो समझता है ये दर्द………. आपका बहुत-बहुत आभार………


topic of the week



latest from jagran