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ना बांटो इस देश को (कविता)

Posted On: 23 May, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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तेलंगाना की घोषणा के साथ ही देश में नए राज्य बनाने की होड़ सी लग गई है. नए राज्य के पीछे सबके अपने अपने तर्क है. हर कोई भाषा, सामाजिक- आर्थिक विकास, सरकार की बेरुखी आदि के नाम पर नए राज्य की वकालत करते नजर आ रहे हैं. पर क्या सिर्फ राज्यों को तोड़कर नए राज्य बनाने से ही विकास की गति तेज हो जाएगी? टुकड़ों में बंटकर कब किसने तरक्की की है? चाहे वो पाकिस्तान हो या बांग्लादेश या हो झारखण्ड, उत्तराँचल या छत्तीसगढ़, इन सब की हालत किसी से छुपी नहीं है. भारत तो एक विशाल देश है, क्या अब विकास के लिए इसके टुकड़े करना जरुरी है?

ना बांटो इस देश को हर एक भाषा के नाम पर
क्यूँ तोड़ते हो लोगों को विकास की आशा के नाम पर

सोचो हमने क्या पा लिया आज हो कर के उन्तीस
थे खुश तब भी जब थे चौदह या थे हम इक्कीस
आज आया तेलंगाना, कल गोरखालैंड भी आएगा
फिर विदर्भ, पूर्वांचल और ना जाने किसका नंबर आएगा

सोचो क्या हुआ है विकास झारखण्ड में बिहार से फूटकर
या हुई है तरक्की उत्तराखंड या छत्तीसगढ़ का टूटकर
टुकड़े कर दो कितने देश फिर भी तरक्की नहीं कर पायेगा
जब तक नहीं जागेगी जनता, एक अच्छा नेता नहीं चुना जायेगा

ये तो अच्छा है नेता को है सिर्फ मुख्यमंन्त्री पद का चस्का
नहीं लगा है किसी को प्रधानमंत्री की कुर्सी का मस्का
नहीं तो कल फिर कोई नेता आमरण अनशन पे बैठ जायेगा
अलग देश की मांग लेकर इतिहास फिर से दुहराया जायेगा

वो भी दूर नहीं जब दिन एक ऐसा भी आएगा
टुकड़े करने के लिए ना कोई राज्य रह जायेगा
पर नेताओं के मन में तब भी चैन कहाँ से आएगा
हर जिले को प्रान्त बना दो ये मांग उठाया जायेगा

ना सेंको राजनीति की रोटियां जनता के नाम पर
क्यूँ तोड़ते हो लोगों को विकास की आशा के नाम पर

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36 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Aileen के द्वारा
May 25, 2011

Posts like this brighten up my day. Tnhaks for taking the time.

Jailyn के द्वारा
May 25, 2011

Great thinking! That really brkeas the mold!

sameer के द्वारा
June 6, 2010

अदिति जी, एक बहुत ही अच्छी कविता……..लगता है आपने इसे कुछ महीनों पहले लिखा था……. आपको बधाइयाँ…..

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    समीर जी, आपका आभार……….हाँ ये मैंने उस समय ही लिखी थी जब तेलंगाना की आग चारों तरफ फैली थी, पर उस समय इसे व्यक्त करने का कोई मंच नहीं मिला था………मैं जागरण जंक्शन की बहुत शुक्रगुजार हूँ जिसने मुझे एक ऐसा मंच प्रदान किया जहाँ मैं अपने विचार अभिव्यक्त कर सकती हूँ…..और आप जैसे कला प्रेमियों का स्नेह प्राप्त कर पा रही हूँ………

    Leatrice के द्वारा
    May 25, 2011

    AFAIC that’s the best awsner so far!

    Rocky के द्वारा
    May 25, 2011

    Walking in the presence of giants here. Cool thinking all aonrud!

neha के द्वारा
June 6, 2010

अदिति जी, मैंने आपकी कविताएँ पढ़ी, अच्छा लिखती हैं आप, पर इस कविता के साथ लोगों ने न्याय नहीं किया लगता है…………बहुत ही अच्छी कविता है, आपको बधाइयाँ, इसी तरह लिखती रहिये…..

    aditi kailash के द्वारा
    June 6, 2010

    नेहा जी, आपका आभार…….ये मुझे भी काफी पसंद है………..ये कविता मैंने इस ब्लॉग पर पहले दिन ही डाली थी, तब लोग मुझे जानते भी नहीं थे……..कुछ लोगों ने ही पढ़ी है इसे………

ilovepoetry के द्वारा
June 3, 2010

आपकी सर्वश्रेष्ठ कविताओं में से एक……..

    aditi kailash के द्वारा
    June 3, 2010

    आपका आभार…………

    Teige के द्वारा
    May 25, 2011

    That’s really srehwd! Good to see the logic set out so well.

rajesh के द्वारा
June 3, 2010

लाभ की राजनीती करने वालों पर अच्छा प्रहार………….

    aditi kailash के द्वारा
    June 3, 2010

    सही कहा आपने……अगर इन नेताओं का बस चले तो अपने स्वार्थ के लिए और एक अदद कुर्सी की खातिर अपने घर के टुकड़े करने से भी ना रुकें………..

minu के द्वारा
June 3, 2010

बहुत खूब………हम सभी को देश के लिए इस तरह सोचना चाहिए……….आपको मेरा सलाम………….

    aditi kailash के द्वारा
    June 3, 2010

    और आपको भी मेरा सलाम………..

Tufail A. Siddequi के द्वारा
May 24, 2010

आप सच्ची देशभक्त.

    aditi kailash के द्वारा
    May 24, 2010

    सिद्दकीजी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद. 

Chaatak के द्वारा
May 24, 2010

अदिति जी, आपके विचारों कि इस देश को सबसे ज्यादा जरूरत है. हम आपकी बात के कायल हैं. ऐसे ही लिखते रहिये.  आपके लिए मैं दुष्यंत कुमार जी कि चंद पंक्तियाँ दोहराना चाहूँगा- पीर पर्वत सी हुई अब ये पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए, ……. …. मेरे  सीने में नही तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए.

    aditi kailash के द्वारा
    May 24, 2010

    चातक जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद. आपको कविता अच्छी लगी, जानकर खुशी हुई. आगे भी इसी तरह आपकी प्रतिक्रिया का इन्तजार रहेगा. पुनः धन्यवाद.  

    Libby के द्वारा
    May 25, 2011

    Kewl you should come up with that. Execllnet!


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