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याद आता है तेरा (कविता)

Posted On: 22 May, 2010 में

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याद आता है तेरा
वो माँ कहकर बुलाना
पापा के डर से आकर
कभी आँचल में छुप जाना

cute babyखिलौनों के लिए तेरा
यूँ मचलना, रूठ जाना
पर अगले ही पल
क्यूँ था रूठा ये भी भूल जाना

दादी की कहानी पे तेरा
हँसना खिलखिलाना
चंदा का मामा और
सूरज का चाचा कहलाना
पापा के साथ मिलकर
मुझे हरदम चिढाना
रूठ जाऊ तो प्यारी माँ
कहकर मनाना

याद आता है तेरा ………..

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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Trudy के द्वारा
May 25, 2011

That’s not just logic. That’s really sesnlbie.

aditi kailash के द्वारा
June 9, 2010

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद्……..ये रचना हमारे दिल के बहुत ही करीब है और इस मंच पर हमारी पहली पोस्ट……..दोनों ही मायने में हमारे लिए बहुत ही खास………..

babali के द्वारा
June 9, 2010

ममता से परिपूर्ण रचना …………

    Ellyanna के द्वारा
    May 25, 2011

    Cool! That’s a clever way of lokoing at it!

rajkamal के द्वारा
May 23, 2010

HAR BACHHEY KI ANKHO ME BHAGWAN EK REHTA HAI- SHAYAD ISILIEY HARDAM KHILEY PHOOL SA WOH CHEHAKTA HAI- WOH HUSSEY TO KHUDA MEHARBAAN HAI- WOH ROYE TO SAMJHO KI KHUDA PARESHAAN HAI

    aditi kailash के द्वारा
    May 23, 2010

    राजकमलजी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद.

    Zabrina के द्वारा
    May 25, 2011

    AFAIC that’s the best awnser so far!


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